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UPSC के 100 साल की कहानी, जानिए ब्रिटिश काल से लेकर आज तक कैसे बदली सिविल सेवा परीक्षा

भारत के पहले पब्लिक सर्विस कमीशन, यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की स्थापना के 1 अक्टूबर 2026 को 100 साल पूरे हो रहे हैं। यह एक संवैधानिक संस्था है जो परीक्षाएं कंडक्ट करती है। इस संस्थान की स्थापना 1926 में हुई थी। यह एक सलाहकार संस्था थी। आइए जानें

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 01, 2026 पर 5:01 PM
UPSC के 100 साल की कहानी, जानिए ब्रिटिश काल से लेकर आज तक कैसे बदली सिविल सेवा परीक्षा
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, 1919 में एक लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने 1 अक्टूबर 2026 को भारत के पहले लोक सेवा आयोग के तौर पर स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं। इस संस्थान का सफर 1926 में शुरू हुआ था। यह एक सलाहकार संस्थान थी, जिसके अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति लंदन में सेक्रेटरी ऑफ स्टेट द्वारा की जाती थी। आज, यूपीएससी एक संवैधानिक संस्था है जो परीक्षाएं आयोजित करती है, स्पेशलिस्ट पोस्ट के लिए भर्ती करती है और सरकार को भर्ती, प्रमोशन और डिसिप्लिनरी मामलों पर सलाह देती है। इसका एक सदी लंबा विकास भारत की लोक सेवा व्यवस्था में बड़े बदलाव को दिखाता है।

यूपीएससी से पहले

प्रतियोगिता के जरिए पब्लिक सर्वेंट चुनने का नियम आधिकारिक तौर से 1855 में बना था। इंडियन सिविल सर्विस (ICS) परीक्षा ने ईस्ट इंडिया कंपनी की नामांकन व्यवस्था की जगह ली। लेकिन प्रतियोगिता का मतलब भारतीयों के लिए बराबर पहुंच नहीं था। परीक्षा सिर्फ लंदन में, अंग्रेजी में होती थी, और इसमें ग्रीक और लैटिन जैसे सब्जेक्ट शामिल थे।

सत्येंद्रनाथ टैगोर 1862 में कलकत्ता से इंग्लैंड एग्जाम देने गए जो वे अपने देश में नहीं दे सकते थे। उन्होंने 1863 में इसे पास किया और ICS में जाने वाले पहले भारतीय बने। फिर भी भारतीयों का प्रतिनिधित्व सीमित रहा।

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