Success Story: हर किसी को भगवान कोई न कोई हुनर जरूर देता है। लेकिन हर किसी के लिए उसे कमाई का जरिया बनाना आसान नहीं होता। कोलकाता के दुर्गापुर की रहने वाली पापिया नट्टा ने अपने हुनर को एक बिजनेस में बदल दिया। कभी स्कूल टीचर रहीं पापिया पिछले लगभग 15 सालों से हाथ से बनी ज्वेलरी बना और बेच रही हैं। 2009 में शुरू हुआ उनका यह सफर आज भी 'पापिया आर्ट एंड क्राफ्ट' के नाम से जारी है।
शौक से शुरू हुआ काम, धीरे-धीरे बन गया कारोबार
पापिया बताती हैं कि उन्हें शुरू से ही हाथ से चीजें बनाने में बहुत दिलचस्पी थी। उन्होंने कई तरह की हस्तकलाएं सीखीं। बाद में उन हुनर का इस्तेमाल करके गहने बनाना शुरू किया। उस समय, उन्होंने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उनका यह शौक आगे चलकर एक बिजनेस बन जाएगा।
उनके लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। वह पहले एक स्कूल टीचर थीं। जब उन्होंने इस काम पर ध्यान देने के लिए अपनी नौकरी छोड़ी, तो कई लोगों ने उनके फैसले पर सवाल उठाए। यहां तक कि उनके टीचर ने भी पूछा कि वह आखिर क्या कर रही हैं। किसी से बहस करने के बजाय, पपिया ने अपने काम को ही अपनी पहचान बनाने का फैसला किया।
मिट्टी, कपड़े और पीतल से बनती हैं ज्वेलरी
पापिया की ज्वेलरी की एक खास बात यह है कि यह पूरी तरह से हाथ से बनाई जाती है। इसे बनाने में कपड़ा, मिट्टी, पीतल और दूसरी धातुओं का इस्तेमाल होता है। मिट्टी की ज्वेलरी के लिए वह उसी तरह की मिट्टी का इस्तेमाल करती हैं, जिससे आमतौर पर देवी-देवताओं की मूर्तियां बनाई जाती हैं। उनका काम सिर्फ नेकलेस या इयररिंग्स तक ही सीमित नहीं है। बल्कि वह पूरे शरीर के लिए कई तरह की ज्वेलरी बनाती हैं, जिसमें बालों की एक्सेसरीज से लेकर पैरों की ज्वेलरी तक शामिल है। उनके कलेक्शन में कई तरह के डिजाइन हैं। इनमें अंगूठियों और बालों की सजावट से लेकर हाथों और पैरों की ज्वेलरी तक शामिल है।
पापिया ₹30 से ₹800 की कीमत वाली कई तरह की ज्वेलरी बेचती हैं, जिनमें अलग-अलग स्टाइल शामिल हैं। जिन गहनों को बनाने में ज्यादा बारीकी या मेहनत लगती है, उनकी कीमत अधिक होती है। पापिया ने 'मनीकंट्रोल' से बातचीत में बताया कि उनके पास अलग-अलग तरह के ग्राहक आते हैं। कुछ ग्राहक महंगी चीजें नहीं खरीदना चाहते या उनका बजट कम होता है। इसलिए उन्होंने कीमतें इस तरह तय की हैं कि हर कोई आसानी से उनकी ज्वेलरी खरीद सके।
पापिया बताती हैं कि उनके बनाए गहनों की कीमत ₹30 से ₹800 के बीच होती है। उन्हें इस काम से लगभग 20% से 30% का मुनाफा होता। अगर कोई गहना ₹500 में बिकता है, तो मुनाफा लगभग ₹100 से ₹150 होता है। जबकि ₹800 वाले गहने पर लगभग ₹160 से 240 रुपये की कमाई होती है। वह कहती हैं कि उनकी कमाई इस बात पर भी डिपेंड करती है कि वह अपने प्रोडक्ट कहां और कैसे बेचती हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जगहों पर बिक्री के आंकड़े अलग-अलग होते हैं। वह यह भी बताती हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा मुनाफा एग्जीबिशन से होता है।
(दिल्ली से शुभांगी तिवारी की रिपोर्ट)