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OBC Creamy Layer Rule SC: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को झटका! ओबीसी क्रीमी लेयर पर 11 मार्च का फैसला रखा बरकरार

ओबीसी क्रीमी लेयर से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को फैसला सुनाया था। इसमें अदालत ने स्पष्ट किया था कि माता-पिता की सैलरी को अकेले आधार बनाकर किसी उम्मीदवार को ओबीसी क्रीमी लेयर में नहीं रखा जा सकता

shankar anandअपडेटेड Nov 06, 2026 पर 1:33 PM
OBC Creamy Layer Rule SC: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को झटका! ओबीसी क्रीमी लेयर पर 11 मार्च का फैसला रखा बरकरार
इस फैसले को मामले में अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट शशांक रत्नू ने ओबीसी वर्ग की बड़ी जीत बताया

ओबीसी आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर तय करने के नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने 11 मार्च को दिए अपने फैसले को बरकरार रखते हुए उसमें बदलाव या स्पष्टीकरण की मांग करने वाली केंद्र सरकार की अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने फिर स्पष्ट किया है कि ओबीसी उम्मीदवारों के क्रीमी लेयर स्टेटस का निर्धारण सिर्फ माता-पिता की सैलरी और कृषि से होने वाली आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उन योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का निर्देश भी दिया है जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की थी लेकिन ओबीसी क्रीमी लेयर के गलत आकलन के कारण कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने उन्हें नियुक्ति या सेवा आवंटन नहीं दिया था। इनमें IAS, IPS, IRS समेत अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए चयनित ऐसे उम्मीदवार शामिल हैं जो अदालत के तय मानदंडों के तहत ओबीसी नॉन-क्रीमी लेयर के पात्र हैं।

इस फैसले को मामले में अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी करने वाले एडवोकेट शशांक रत्नू ने ओबीसी वर्ग की बड़ी जीत बताया है। उनका कहना है कि इससे करीब एक दशक से चला आ रहा अन्याय खत्म होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने कोई नया नियम नहीं बनाया है बल्कि 1993 के ओबीसी नियमों को लागू करने के अपने पहले के फैसले को बरकरार रखा है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की थी?

ओबीसी क्रीमी लेयर से जुड़े इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को फैसला सुनाया था। इसमें अदालत ने स्पष्ट किया था कि माता-पिता की सैलरी को अकेले आधार बनाकर किसी उम्मीदवार को ओबीसी क्रीमी लेयर में नहीं रखा जा सकता। कृषि से होने वाली आय को भी आय-धन परीक्षण में वेतन के साथ जोड़कर क्रीमी लेयर का निर्धारण नहीं किया जा सकता। इस फैसले के बाद केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक मिसलेनियस एप्लीकेशन दाखिल की थी। सरकार की ओर से अदालत से फैसले में बदलाव और कुछ पहलुओं पर स्पष्टीकरण देने की मांग की गई थी। सरकार चाहती थी कि 11 मार्च के फैसले को किस तरह लागू किया जाए, इस पर अतिरिक्त स्पष्टता मिले। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की इस अर्जी को खारिज कर दिया और अपने 11 मार्च के फैसले को बरकरार रखा। अदालत के इस रुख के बाद अब सरकार को पहले दिए गए फैसले के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

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