हरियाणा। गुरुग्राम में मेट्रो का नेटवर्क अब पुराने शहर से साइबर सिटी तक पहुंचने वाला है। हरियाणा सरकार ने गुरुग्राम मेट्रो फेज-2 के सिविल निर्माण के लिए टेंडर को मंजूरी दे दी है। इस प्रोजेक्ट में करीब 15 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसमें कुछ हिस्सों में डबल-डेकर कॉरिडोर भी शामिल है।
कब जारी होगा टेंडर और कहां तक जाएगी मेट्रो?
गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड (GMRL) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 18 फीसदी GST सहित 1,662 करोड़ रुपये के सिविल कंस्ट्रक्शन टेंडर को मंजूरी मिल चुकी है। टेंडर करीब एक सप्ताह के अंदर जारी होने की उम्मीद है।
फेज-2 में सेक्टर-9 से DLF साइबर सिटी तक करीब 15.3 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। यह रूट पुराने गुरुग्राम के कई इलाकों से होकर गुजरेगा। इस पर कुल 14 स्टेशन बनाए जाने हैं।
इस कॉरिडोर में ये इलाके शामिल होंगे:
सेक्टर-7, सेक्टर-4 और सेक्टर-5
बजघेरा रोड और पालम विहार एक्सटेंशन
पालम विहार, सेक्टर-23A और सेक्टर-22
उद्योग विहार फेज-4 और फेज-5
डबल-डेकर कॉरिडोर क्यों बनाया जाएगा?
फेज-2 में बजघेरा और ओल्ड दिल्ली रोड पर डबल-डेकर हिस्से भी बनाए जाएंगे। इन्हें गुरुग्राम में ट्रैफिक की भीड़ कम करने और आने-जाने में आसानी के लिए शामिल किया गया है। इसके लिए GMDA की जरूरतों को भी ध्यान में रखा गया है। 1,662 करोड़ रुपये के टेंडर में मेट्रो कॉरिडोर, स्टेशन, ट्रैक और डबल-डेकर हिस्से बनाने का काम शामिल है। वहीं बिजली, सिग्नलिंग, ट्रैक्शन और डिजाइन का काम अलग से किया जाएगा।
फेज-2 का कॉरिडोर पुराने गुरुग्राम को साइबर सिटी से जोड़ेगा। इसमें रैपिड मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर के साथ इंटरचेंज की सर्विस भी होगी। इससे पैसेंजर के लिए अलग-अलग मेट्रो और रेल सर्विस के बीच सफर करना आसान होगा।
प्रोजेक्ट में देरी का कारण और अब इसकी लागत
जून में विश्व बैंक की मंजूरी के बाद फेज-2 का टेंडर हरियाणा सरकार को भेजा गया था। कुछ बदलावों के बाद अब इसे मंजूरी मिल गई है। वहीं, महंगाई और नई GST दरों के कारण गुरुग्राम मेट्रो की कुल लागत 5,452 करोड़ से बढ़कर 10,266 करोड़ रुपये हो गई है। फेज-1 का काम भी चल रहा है, जिसमें मिलेनियम सिटी सेंटर से सेक्टर-9 तक करीब 15 किलोमीटर का कॉरिडोर और 13 स्टेशन हैं। इसे द्वारका एक्सप्रेसवे के पास सेक्टर-101 तक ले जाने का प्लान है। इसका करीब 15 फीसदी काम अब तक पूरा हो चुका है।
फेज-2 के लिए जमीन लेने का काम भी चल रहा है। कुछ लोगों ने अपनी जमीन देने से मना कर दिया था। इसके बाद हरियाणा सरकार ने पिछले महीने 2013 के जमीन अधिग्रहण कानून के तहत जमीन लेने का फैसला किया।