CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ीं, कोर्ट ने ये सख्त बातें बोलकर हिरासत बढ़ा दी

दिल्ली की एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने सोमवार को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी। अब दोनों 21 अक्टूबर तक हिरासत में रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि इन नेताओं ने "कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाया"।

अपडेटेड Oct 20, 2026 पर 9:23 AM
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CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की मुश्किलें बढ़ीं

दिल्ली की एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने सोमवार को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ा दी। अब दोनों 21 अक्टूबर तक हिरासत में रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि इन नेताओं ने "कानून के प्रति कोई सम्मान नहीं दिखाया" और वे "डी-नोटिफाइड इलाकों में विरोध-प्रदर्शन" करने के आदी हैं।

SEM ऋतु राज ने कहा कि इन दोनों ने 11 अक्टूबर को एक अन्य मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बॉन्ड का "जानबूझकर उल्लंघन किया" और "इस मामले में तुरंत शांति भंग की"।

बता दें कि इन दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत के बाद कोर्ट के सामने पेश किया गया था। कोर्ट ने उनके वकील को दो दिनों के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया, और साथ ही जांच अधिकारी को भी इसकी एक अग्रिम प्रति (एडवांस कॉपी) देने को कहा।


दोबारा अपराध न करने के भरोसे पर कोर्ट ने उठाए सवाल

कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों का यह आश्वासन कि वे दोबारा अपराध नहीं करेंगे, उनके पिछले बर्ताव और जांच अधिकारी द्वारा रिकॉर्ड पर रखे गए सबूतों को देखते हुए, भरोसे के लायक नहीं है।

SEM ने कहा, "आसन्न खतरे, प्रतिवादियों के पिछले बर्ताव और दोनों पक्षों की दलीलों को देखते हुए, प्रतिवादियों को अपनी बात लिखित रूप में रखने का मौका दिया जाना चाहिए।"

कोर्ट ने यह भी माना कि पुलिस की ओर से हिरासत की अवधि बढ़ाने के लिए दी गई अर्जी के साथ ऐसे ठोस सबूत थे, जो शांति भंग होने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की गंभीर आशंका पैदा करते हैं।

SEM ऋतु राज ने कहा, "मुझे लगता है कि प्रतिवादियों ने दक्षिण-पश्चिम जिले के SEM के समक्ष दिए गए अपने 11.10.2026 के बॉन्ड का जानबूझकर उल्लंघन किया है और इस मामले में तुरंत शांति भंग की है।"

बचाव पक्ष ने रिहाई की मांग की

दास और रंका की ओर से पेश हुए वकील अभिक चिमनी ने पुष्प शर्मा के साथ मिलकर उनकी तुरंत रिहाई की मांग की। उन्होंने दलील दी कि 10 अक्टूबर के बाद उन्होंने विरोध-प्रदर्शन का कोई आह्वान नहीं किया था और न ही दोबारा ऐसा अपराध होने की कोई आशंका है। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि दोनों अलग-अलग जंतर-मंतर गए थे।

हालांकि, SEM (स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) को पेश की गई जमानतें (sureties) सही नहीं लगीं। एक जमानतदार, तीरथ, बॉन्ड पर लगी अपनी फोटो और अपने आधार कार्ड के बीच के अंतर को नहीं समझा सका, और न ही कोई दूसरा वैध पहचान पत्र पेश कर पाया। एक अन्य जमानतदार, मन्नू राज आनंद, दास के बारे में बुनियादी जानकारी भी नहीं दे सका, जिसके लिए वह जमानत दे रहा था।

अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी जमानतदार प्रतिवादियों की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं लग रहा है, इसलिए उन्हें नए जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया गया।

इस मामले में आगे की कार्यवाही और किसी भी जवाब के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की गई है। इससे पहले14 अक्टूबर को अदालत ने CJP के इन दोनों नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

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