बदल रहा है केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, मेडिकल कॉलेज से लेकर हाईकोर्ट बेंच तक सात साल में विकास के कई माइलस्टोन किए पार

लद्दाख में 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद से कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सात साल की इस अवधि में राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर हुई हैं और हाईकोर्ट की बेंच भी स्थापित हुई है। यहां की ऑटोनॉमस हिल काउंसिल का विस्तार हुआ है। लद्दाख संस्थागत विकास का एक अहम दौर देख रहा है।

अपडेटेड Oct 21, 2026 पर 7:23 PM
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18 अक्टूबर, 2026 को लेह में जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की लद्दाख बेंच का उद्घाटन हुआ।

देश के सुदूर उत्तरी केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में बीते सात साल कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। 2019 में केंद्र शासित प्रदेश बनने के करीब सात साल बाद, लद्दाख में हेल्थकेयर, न्याय और जमीनी स्तर पर शासन से जुड़े कई संस्थागत बदलाव हो रहे हैं। दशकों तक यहां के निवासियों ने इस दुर्गम इलाके में रहने की चुनौतियों का सामना किया है।

हेल्थकेयर, प्रोफेशनल पढ़ाई और कानूनी कार्रवाई जैसे सामान्य सेवाओं के लिए यहां के लोगों को कड़ाके सर्दी में मुश्किल यात्रा करनी पड़ती थी। लेकिन अब ये सभी सेवाएं इनके पास पहुंच रही हैं। लेह में केंद्र शासित प्रदेश के पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज को मंजूरी देने से लेकर एक खास हाई कोर्ट बेंच के उद्घाटन और ऑटोनॉमस हिल काउंसिल के विस्तार तक, लद्दाख संस्थागत विकास का एक अहम दौर देख रहा है।

पहला सरकारी मेडिकल कॉलेज

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 2027-28 एकेडमिक वर्ष से लेह में लद्दाख के पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज को चालू करने की मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी उन छात्रों के लिए बहुत ज़रूरी है, जिन्हें MBBS की डिग्री के लिए पहले से ही लद्दाख से बाहर जाना पड़ता था। इस मंजूरी से 103 मंजूर रेगुलर पोस्ट पर धीरे-धीरे भर्ती का रास्ता भी साफ हो गया है, जिसमें इंस्टीट्यूशन को एकेडमिक कामकाज के लिए तैयार करने के लिए जरूरी फैकल्टी और सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं।

लद्दाख के लिए डेडिकेटेड हाई कोर्ट बेंच

इस केंद्र शासित प्रदेश में कानूनी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में 18 अक्टूबर, 2026 को भारत के चीफ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत ने लेह में जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट की लद्दाख बेंच का उद्घाटन किया। बेंच ने अक्टूबर में अपनी तय न्यायिक बैठकें शुरू कीं, जिसमें लद्दाख से जुड़े 75 मामलों का पहला सेट सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया। जम्मू और कश्मीर हाई कोर्ट की स्थापना 1928 में हुई थी। लगभग एक सदी बाद, लद्दाख में अपनी एक हाईकोर्ट बेंच बनना इतिहास को देखते हुए बहुत बड़ा कदम है।


सभी आठ जिलों के लिए हिल काउंसिल

लद्दाख ने लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल्स (LAHDC) (अमेंडमेंट) रेगुलेशन, 2026 को लागू करके अपने लोकल एडमिनिस्ट्रेटिव फ्रेमवर्क को बढ़ाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम उठाया है। यह रेगुलेशन, जो 19 अक्टूबर को लागू हुआ, केंद्र शासित प्रदेश के सभी आठ जिलों में ऑटोनॉमस हिल काउंसिल्स का रास्ता बनाता है, जिसमें नया बना सांकू जिला भी शामिल है। इस कदम का मकसद पूरे लद्दाख में हिल-काउंसिल फ्रेमवर्क को बढ़ाना है, जिससे इस इलाके को स्थानीय विकास और जिला-स्तर पर प्रतिनिधित्व के लिए एक संस्थागत व्यवस्था मिल सके।

संकू लद्दाख का आठवां जिला बना

16 अक्टूबर को, लद्दाख प्रशासन ने पांच नई तहसीलों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश के आठवें जिले के तौर पर सांकू बनाने की घोषणा की। बाद में प्रशासन की आधिकारिक प्रेस रिलीज में भी यह घोषणा दिखाई दी। यह कदम प्रशासन को विकेंद्रीकृत करने और सरकारी सेवाओं को निवासियों के करीब लाने के एक बड़े प्रयास का हिस्सा है।

लद्दाख के लिए IIT और IIM कैंपस की योजना

हायर एजुकेशन एक और क्षेत्र है जहां लद्दाख घर के करीब अवसरों का विस्तार करना चाहता है। केंद्र ने लेह में IIT जम्मू और IIM जम्मू के कैंपस स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित कैंपस इस इलाके के युवाओं के लिए टेक्निकल और मैनेजमेंट एजुकेशन तक पहुंच बढ़ा सकते हैं, साथ ही प्रोफेशनल ट्रेनिंग और एकेडमिक जुड़ाव के मौके भी पैदा कर सकते हैं।

लद्दाख संजीवनी सेवा के तहत उपलब्ध होंगी 73 एम्बुलेंस

प्रशासन ने लद्दाख संजीवनी सेवा पहल शुरू करने की भी घोषणा की है। इसमें केंद्र शासित प्रदेश के सात मौजूदा जिलों के 248 गांवों में सेवा देने के लिए 73 एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाई गई है। ऊंचाई, मुश्किल सड़कों और कड़ाके की सर्दियों वाले इलाके में, इमरजेंसी मेडिकल ट्रांसपोर्ट खास तौर पर जरूरी है।

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