UP Voter List Row: यूपी के वोटर लिस्ट में 'राम ने यादव को मारा' और पिता का नाम 'मूर्ख चंद्र यादव'! CEO ने दिए जांच और सुधार के निर्देश
UP voter list Row: उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं, जिन्हें देखकर लोग हैरान भी हैं और सवाल भी उठा रहे हैं। 'राम ने यादव को मारा', 'मूर्खचंद यादव' और 'मोहम्मद पागल रेहान' जैसे नाम आगामी यूपी विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में दर्ज होने का दावा किया गया है। इन अजीबोगरीब नामों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है
UP voter list Row: मतदाताओं के रिकॉर्ड में पिता के नाम के तौर पर 'बीकॉम', और 'राम ने शर्मा को मारा' जैसी अजीबो-गरीब नाम भी सामने आई हैं
UP voter list Row: उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट में कुछ ऐसी एंट्री सामने आई हैं, जिन्हें देखकर लोग हैरान हैं। कहीं मतदाता का नाम 'राम ने यादव को मारा' दर्ज है, तो कहीं पिता के नाम की जगह 'मूर्ख चंद्र यादव' लिखा हुआ है। इतना ही नहीं, दो अन्य मतदाताओं के रिकॉर्ड में पिता के नाम के तौर पर 'बीकॉम', 'मोहम्मद पागल रेहान' और 'राम ने शर्मा को मारा' जैसी अजीबो-गरीब नाम भी सामने आई हैं। ये मामले उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इलाहाबाद-झांसी ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट से जुड़े हैं। इन नामों के सामने आने के बाद वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया और रिकॉर्ड के सत्यापन पर सवाल उठने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (Legislative Council) चुनावों के लिए तैयार की गई नई मतदाता सूचियों में अजीबो-गरीब तकनीकी त्रुटियां सामने आई हैं, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और डेटा वेरिफिकेशन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाहाबाद-झांसी Graduates' Constituency की मतदाता सूची में ऐसे नाम दर्ज मिले हैं, जिनका शाब्दिक अर्थ बेहद आपत्तिजनक और हास्यास्पद है।
चुनाव आयोग की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने गुरुवार (22 अक्टूबर) को इस मामले में सफाई दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रजिस्टर्ड 14.8 लाख मतदाताओं में से 150 से कम लोगों के नाम या उनके परिजनों के डिटेल्स में गलत प्रिंटिंग की शिकायतें सामने आई हैं। यह कुल मतदाताओं का 0.01 फीसदी से भी कम है। उन्होंने नई ऑनलाइन व्यवस्था का बचाव करते हुए कहा कि इस बार ग्रेजुएट और टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों की वोटर लिस्ट तैयार करने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की गई है।
वोटर लिस्ट में कैसे-कैसे नाम आए सामने?
इलाहाबाद-झांसी ग्रेजुएट निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में सामने आई अजीब नामों ने चुनावी रिकॉर्ड की शुद्धता पर बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, एक मतदाता का नाम 'राम ने यादव को मारा' दर्ज है और उसके पिता का नाम 'मूर्ख चंद्र यादव' लिखा हुआ है। इसी तरह, दो अन्य मतदाताओं के रिकॉर्ड में पिता के नाम वाले कॉलम में 'बीकॉम' और 'राम ने शर्मा को मारा' जैसी गलतियां दर्ज मिलीं।
इन नामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर आवेदन से लेकर फाइनल वोटर लिस्ट तैयार होने तक सत्यापन की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि ये गलतियां आवेदन भरते समय हुईं, डेटा एंट्री के दौरान दर्ज हुईं या डिजिटल प्रोसेस के किसी अन्य चरण में सामने आईं।
14.8 लाख मतदाताओं में 150 से कम रिकॉर्ड में गड़बड़ी
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा कि राज्य में ग्रेजुएट और टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों की वोटर लिस्ट तैयार करने के लिए पहली बार पूरी तरह ऑनलाइन सिस्टम अपनाई गई है। इससे पहले यह काम जिला स्तर पर मैन्युअल तरीके से किया जाता था। रिणवा के मुताबिक, करीब 14.8 लाख रजिस्टर्ड मतदाताओं में 150 से कम लोगों के नाम या उनके परिजनों के डिटेल्स गलत छपे होने की जानकारी मिली है। उनके अनुसार, यह संख्या कुल मतदाताओं के 0.01 प्रतिशत से भी कम है।
निर्वाचन अधिकारी ने आंकड़ों के आधार पर गड़बड़ियों का दायरा सीमित बताया। लेकिन असामान्य नामों की प्रविष्टियां सामने आने से यह सवाल बना हुआ है कि डिजिटल सिस्टम में सत्यापन की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही।
4 महीने में तैयार किया गया ऑनलाइन सिस्टम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, चुनाव कार्यालय की आईटी टीम ने तकनीकी सहायता से करीब चार महीने में यह ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किया। इसका इस्तेमाल मतदाता रजिस्ट्रेशन से लेकर आवेदन की जांच और फाइनल वोटर लिस्ट तैयार करने तक किया गया। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म में कई प्रक्रियाएं शामिल हैं:-
मतदाता रजिस्ट्रेशन और आवेदन जमा करना।
आवेदनों की जांच और स्वीकृति या अस्वीकृति।
एक से अधिक बार दर्ज हुए आवेदनों की पहचान।
मतदाताओं के नामों का क्रम निर्धारित करना।
फाइनल वोटर लिस्ट तैयार करना और उसे डाउनलोड करने की सुविधा।
अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना और अलग-अलग चरणों को डिजिटल माध्यम से पूरा करना है। हालांकि, हालिया मामला यह सवाल भी उठाता है कि डिजिटल सिस्टम में गलत जानकारी दर्ज होने या फाइनल वोटर लिस्ट में पहुंचने से रोकने के लिए किस स्तर पर जांच की गई।
राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया पर उठीं शिकायतें
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ROs) और चुनाव से जुड़े अन्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने स्वीकार किया कि राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया के माध्यम से मतदाताओं के नामों तथा उनके परिजनों के डिटेल्स में गलतियों की शिकायतें मिली हैं।
रिणवा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी पात्र मतदाता को केवल लिपिकीय गलती या नाम की गलत प्रिंटिंग के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि वोटर लिस्ट में नाम, पिता का नाम या अन्य डिटेल्स गलत होने से मतदाता की पहचान की पुष्टि में परेशानी आ सकती है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों को शिकायतों की जांच कर नियमानुसार सुधार की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।
पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रखने पर जोर
चुनाव अधिकारियों के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर वोटर लिस्ट में मौजूद गलत नामों और पारिवारिक डिटेल्स की जांच कर आवश्यक सुधार करना है। वहीं, दूसरी ओर यह सुनिश्चित करना है कि किसी पात्र मतदाता का नाम या गलत डिटेल्स उसके मतदान के अधिकार में बाधा न बने। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की ग्रेजुएट और टीचर्स निर्वाचन क्षेत्रों की वोटर लिस्ट तैयार करने में ऑनलाइन सिस्टम का इस्तेमाल एक बड़ा बदलाव है। लेकिन इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि डिजिटल व्यवस्था के साथ-साथ सही डेटा दर्ज करने, दस्तावेजों का वेरिफाई करने और गलतियों को समय रहते पकड़ने की प्रक्रिया भी मजबूत होनी चाहिए।