'औपनिवेशिक मानसिकता वाली भाषा अपमानजनक!' US PERM विवाद पर अमेरिका को भारत का करारा जवाब

US PERM Row: अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा PERM प्रोग्राम सस्पेंड किए जाने और अमेरिकी उप-राष्ट्रपति की टिप्पणियों पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले से H-1B वीजा धारकों के मौजूदा स्टेटस पर कोई असर नहीं पड़ेगा, वैसे ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। भारत ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति के बयान को 'औपनिवेशिक और अपमानजनक' करार देते हुए कहा कि भारतीय टैलेंट अमेरिकी अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ है। जानिए विदेश मंत्रालय के कड़े रुख और पूरे मामले की 5 बड़ी बातें

अपडेटेड Oct 09, 2026 पर 1:16 PM
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भारत ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति के बयान को 'औपनिवेशिक और अपमानजनक' बताया है

PERM Program Suspension: अमेरिका द्वारा चुनिंदा कंपनियों के 'परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन' (PERM) प्रोग्राम को निलंबित किए जाने और इस संबंध में अमरीकी उप-राष्ट्रपति की ओर से की गई टिप्पणियों पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक विस्तृत और सख्त बयान जारी करते हुए साफ किया है कि इस फैसले से H-1B वीजा धारकों के मौजूदा स्टेटस पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह दोनों देशों के आपसी आर्थिक और तकनीकी हितों के अनुकूल नहीं है।

इसके साथ ही, भारत ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा और बयानों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित और अपमानजनक करार दिया है।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के 5 मुख्य बिंदु:


1. PERM प्रोग्राम के निलंबन पर भारत की नजर

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा कुछ विशेष कंपनियों के लिए PERM प्रोग्राम को निलंबित करने के फैसले पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।

2. H-1B वीजाधारकों पर नहीं पड़ेगा असर, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया हो सकती है प्रभावित

विदेश मंत्रालय ने आम लोगों और आईटी पेशेवरों की आशंकाओं को दूर करते हुए स्थिति साफ की है। PERM प्रोग्राम, H-1B वीजा व्यवस्था से पूरी तरह अलग है। इस सस्पेंशन का असर पहले से जारी H-1B वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों के लीगल स्टेटस पर नहीं पड़ेगा। हालांकि, प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है।

3. प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों के हित में

बयान में भारत ने अमेरिका को याद दिलाया कि कुशल भारतीय पेशेवरों का अमेरिका जाना दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल भारतीयों के लिए अवसर पैदा करता है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को विश्वस्तरीय टैलेंट, इनोवेशन, रिसर्च, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में बढ़त दिलाता है।

भारतीय टैलेंट अमेरिका में जॉब क्रिएशन और शेयरधारकों के लिए वेल्थ (संपत्ति) बनाने में अहम भूमिका निभाता है। अमेरिका का यह कदम दोनों देशों की साझी महत्त्वाकांक्षाओं और प्रगति को आगे नहीं बढ़ाता है।

4. US उप-राष्ट्रपति की टिप्पणियों पर सख्त ऐतराज

अमेरिकी उप-राष्ट्रपति के बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत सरकार ने कहा, 'ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह अनावश्यक और अनुचित हैं। ये बयान इस सच्चाई को नजरअंदाज करते हैं कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित, कुशल और वहां के इनोवेशन इकोसिस्टम के प्रमुख आधार हैं।'

अमेरिका का खुद का इतिहास आप्रवासियों की मेहनत और नवाचार से गढ़ा गया है। ऐसी शब्दावली या भाषा का इस्तेमाल करना, जिसमें औपनिवेशिक काल की दर्दनाक यादें जुड़ी हों, बेहद अपमानजनक और आपत्तिजनक है।

5. स्थिति पर लगातार निगरानी

भारत सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे से जुड़ी हर एक डेवलपमेंट पर लगातार नजर रख रही है और अमेरिकी प्रशासन के साथ सभी हितधारकों के सामने भारतीय पेशेवरों के हितों को मजबूती से उठाती रहेगी।

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