Vadodara Bullet Train Update: देश के सबसे बिजी रेल रूट पर सबसे मुश्किल काम पूरा, 8.3 KM के स्ट्रेच में लगी 14 विशाल बीम

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट ने वडोदरा में सबसे बड़ी चुनौती पूरी कर ली है। दिल्ली-मुंबई राजधानी मेन लाइन के ऊपर 1500 टन वजनी सभी 14 पोर्टल बीम का निर्माण पूरा हो गया। 8.3 KM के इस बिजी स्ट्रेच पर मौके पर ही 37 मीटर लंबे बीम ढाले गए। अब इन पर 40 मीटर के गर्डर लगाकर वायाडक्ट का काम तेज होगा।

अपडेटेड Oct 13, 2026 पर 8:44 AM
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वडोदरा। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन परियोजना ने वडोदरा में अपनी सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौतियों में से एक को पार कर लिया है। दिल्ली-मुंबई राजधानी मेन लाइन के ऊपर सभी 14 पोर्टल बीम का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा हो गया है।

यह सिर्फ कंस्ट्रक्शन का एक पड़ाव नहीं है, बल्कि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को वडोदरा के मौजूदा रेलवे नेटवर्क से इंटीग्रेट करने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह काम देश के सबसे व्यस्त रेलवे रूट पर बिना ट्रेनों की आवाजाही को बाधित किए किया गया है।

क्यों अहम है वडोदरा का ये 8.3 KM का हिस्सा?


वडोदरा का यह पूरा स्ट्रेच करीब 8.3 किलोमीटर लंबा है और यह घनी आबादी वाले शहरी और रेलवे इलाके से होकर गुजरता है। यहां बुलेट ट्रेन का रूट भारतीय रेलवे की पांच लाइनों को क्रॉस करता है, जिसमें दो मेन लाइनें शामिल हैं।

सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि बुलेट ट्रेन का एलाइनमेंट दिल्ली-मुंबई राजधानी मेन लाइन को तिरछा यानी डायगोनली पार करता है। ऐसे में जरूरी क्लीयरेंस बनाए रखने और मौजूदा रेल सिस्टम के साथ सुरक्षित कनेक्टिविटी के लिए विशेष डिजाइन वाले पोर्टल स्ट्रक्चर की जरूरत थी।

14 पोर्टल बीम कहां लगी ?

NHSRCL के मुताबिक, इन 14 पोर्टल बीम में से 10 बीम वडोदरा बुलेट ट्रेन स्टेशन और विश्वामित्री रेलवे स्टेशन के बीच सूरत की तरफ लगाए गए हैं। वहीं, 4 बीम वडोदरा रेलवे स्टेशन और छायापुरी रेलवे स्टेशन के बीच अहमदाबाद की तरफ हैं।

ये पोर्टल बीम एक मजबूत स्ट्रक्चरल फ्रेम का काम करेंगे, जिसके ऊपर बुलेट ट्रेन वायाडक्ट का सुपरस्ट्रक्चर बनाया जाएगा।

अब आगे क्या होगा? 

इन बीम के पूरा होने के साथ ही अब इस सेक्शन में वायाडक्ट के इंटीग्रेशन को गति मिलेगी।

- राजधानी मेन लाइन क्रॉसिंग वाले हिस्से पर इन 14 बीम के ऊपर लगभग 40 मीटर लंबे कम्पोजिट गर्डर लगाए जाएंगे।

- बाकी पोर्टल बीम वाली लोकेशंस पर स्पैन-बाय-स्पैन लॉन्चिंग तकनीक से काम आगे बढ़ेगा।

1500 टन वजन, मौके पर ही हुई ढलाई

इन बीम की इंजीनियरिंग भी बेहद खास है। हर पोर्टल बीम का वजन लगभग 1,500 टन है। जगह कम होने और चालू रेलवे लाइनों के बीच काम करने की मजबूरी के कारण इन्हें 'कास्ट-इन-सीटू' यानी मौके पर ही ढलाई करके बनाया गया है। पारंपरिक प्रीकास्ट लॉन्चिंग मेथड यहां संभव नहीं था।

हर बीम की लंबाई करीब 37 मीटर, चौड़ाई 4 मीटर और ऊंचाई 4 मीटर है। एक बीम को बनाने में लगभग 590 क्यूबिक मीटर कंक्रीट लगता है, जबकि सिर्फ इसके अंदर लगने वाले स्टील के रीइन्फोर्समेंट केज का वजन ही 55 टन है।

इसे बनाने के लिए हाई-कैपेसिटी क्रेन, हाइड्रोलिक जैक, लंबे बूम वाले कंक्रीट पंप और सटीक सर्वे इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया गया। NHSRCL को इसके लिए भारतीय रेलवे के साथ मिलकर हर चरण की माइक्रो-प्लानिंग करनी पड़ी और कई बार रेलवे ब्लॉक भी लेना पड़ा।

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