Varanasi Durga Puja: एक मूर्ति पर 5000-8000 तक का मुनाफा, कोलकाता के कारीगर यूं सवार रहे बनारस में मूर्तियों का कारोबार

वाराणसी में दुर्गा पूजा उत्सव का अलग ही रंग देखने को मिलता है। नवरात्रि के पहले यहां कोलकाता से आए दर्जनों कारीगर बंगाली थीम पर देवी की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं। ये 5 फीट से लेकर 12 फीट तक की देवी प्रतिमा बनाते हैं। इन प्रतिमाओं की वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल में काफी मांग है।

अपडेटेड Oct 13, 2026 पर 8:03 PM
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नवरात्रि के पहले कोलकाता से आए कारीगर बंगाली थीम पर देवी की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी को मिनी बंगाल कहा जाता है। इस शहर में दुर्गा पूजा उत्सव का अलग ही रंग देखने को मिलता है। नवरात्रि के पहले यहां कोलकाता से आए कारीगर बंगाली थीम पर देवी की प्रतिमा को अंतिम रूप दे रहे हैं। इन प्रतिमाओं की डिमांड वाराणसी के अलावा पूर्वांचल के अलग-अलग जिलों में है। नवरात्रि में मूर्तियों को बनाने का ये कारोबार करोड़ों का है। इसके लिए वाराणसी में कई कारखाने हैं जहां दर्जनों लोग काम करते हैं। नवरात्रि से करीब 4 महीने पहले से इस काम को शुरू किया जाता है।

शहर के पांडेय हवेली इलाके में देवी की प्रतिमा को तैयार करने वाले कई कारखाने हैं। तंग गलियों में बसे इन कारखानों में सैकड़ो प्रतिमाएं तैयार होती हैं। कारीगर ऑर्डर के हिसाब से इन प्रतिमाओं को अलग-अलग आकार में तैयार करते हैं। विश्वनाथ मूर्ति कला केंद्र के सुनील पाल ने बताया की वो लोग दुर्गा पूजा उत्सव के लिए हर साल देवी की पारंपरिक यानी बंगाली थीम पर आधारित प्रतिमा को तैयार करते हैं। उनके कारखाने में कोलकाता के आधा दर्जन कारीगर काम करते हैं।

सामान्य तौर पर वो 5 फीट से लेकर 12 फीट तक की देवी प्रतिमा बनाते हैं। बाजार में इस आकार की प्रतिमा की खूब मांग होती है। उन्होंने बताया की साइ और डिजाइन के हिसाब से ही इनकी कीमत तय होती है। देवी की जो प्रतिमाएं 8 से 12 फीट की होती हैं उसकी कीमत 22,000 से 30,000 के बीच होती है। अलग-अलग कई स्टेप्स में इसे तैयार किया जाता है,इसलिए एक प्रतिमा को बनाने में करीब 20 से 25 दिन का वक्त लगता है। उनके कारखाने में दशकों से यह काम होता चला आ रहा है। बताते चलें की सुनील के कारखाने में हर साल 50 से ज्यादा मां दुर्गा की बड़ी प्रतिमाएं तैयार होती हैं।

इसके अलावा भी इस इस इलाके में बंशीचरण पाल का कारखाना भी हैं जहां वो भी लगभग 50 के करीब प्रतिमाओं को तैयार करते हैं। उन्होंने बताया की वाराणसी के साथ ही मिर्जापुर, जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया सहित कई जिलों में उनकी बनाई प्रतिमा सालों से जा रही हैं। हालांकि बदलते दौर में अब वहां भी कुछ कारीगर इस काम को कर रहें है। इसके अलावा वाराणसी के कई पूजा पंडालों के लिए कारीगर सीधे कोलकाता से आते हैं। जो विशेष ऑर्डर पर 15 से 20 फीट ऊंची प्रतिमाओं को तैयार करते हैं। हालांकि इन प्रतिमाओं की कीमत 50 हजार से 80 हजार के बीच होती है।

सुनील पाल ने बताया की एक प्रतिमा को तैयार करने में जो लागत आती है मौजूदा समय पर उसपर 40 से 45% तक फायदा होता है, हालांकि इसमें ज्यादातर पैसे कारीगरी पर खर्च होते हैं। लेकिन फिर भी एक प्रतिमा पर आसानी से 5000 से 8000 रुपये तक की बचत होती है। अकेले वाराणसी जिले में शहर से लेकर गांव तक छोटे बड़े 500 से ज्यादा सार्वजनिक पूजा पंडाल सजते हैं।

वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट


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