Gulabi Meenakari Handicraft: वाराणसी के कई हस्तशिल्पियों की कलाकारी का डंका विदेशों में बज रहा है। मुगलों के जमाने की 400 साल पुरानी कलाकारी भी उनमें से एक है। बीते कुछ सालों से यूएस, कनाडा, सिंगापुर जैसे देशों में अचानक गुलाबी मीनाकारी की डिमांड बढ़ गई है। बनारस की गलियों में रहने वाले हस्तशिल्पी अब एक्सपोर्टर बनकर अपने इन हैंडीक्राफ्ट्स को विदेशों में बेच रहे हैं। हर महीने करीब 20 लाख से ज्यादा के ऑर्डर अलग-अलग कारीगरों के पास आ रहे हैं, जिससे इन कारीगरों के अच्छे दिन आ गए हैं।
हाल के दिनों में गुलाबी मीनाकारी से बने चेस सेट का ऑर्डर गाय घाट इलाके में रहने वाले आर्टिजन रमेश कुमार विश्वकर्मा को मिला। चेस सेट के अलावा गुलाबी मीनाकारी की ज्वेलरी और लक्ष्मी-गणेश की खूबसूरत प्रतिमा की डिमांड भी विदेशों में है। नेशनल अवार्डी रमेश विश्वकर्मा ने बताया कि 2014 से पहले काशी की इस कलाकारी से जुड़े आर्टिजन के पास न तो ऑर्डर थे और न ही बाजार में उनके बनाए प्रोडक्ट की डिमांड थी। जो कारीगर पीढ़ियों से इस काम को कर रहे थे, वे भी इसे छोड़कर दूसरे कामों में जुट गए थे। मेरा हौसला भी टूट रहा था। लेकिन जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काशी के सांसद बने, उन्होंने इस आर्ट को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। वे हम आर्टिजन के भगवान से कम नहीं हैं।
पीएम मोदी ने बाइडेन को दिया था गिफ्ट
कई विशेष अवसरों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुलाबी मीनाकारी से बने अलग-अलग उत्पादों को अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्षों को सौंपा। साल 2021 में पहली बार उन्होंने अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को अपने अमेरिकी दौरे के दौरान इसी गुलाबी मीनाकारी से बने चेस सेट को तोहफे के रूप में भेंट किया था। उस वक्त पूरी दुनिया में इस खूबसूरत आर्ट की चर्चा शुरू हुई थी। इसके बाद उन्होंने जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान उस समय के तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और उनकी पत्नी को इसी आर्ट से बने पिकॉक ब्रोच और कफलिंग सेट उपहार स्वरूप भेंट किए थे। जिसके बाद से कलाकारों के पास इनके प्रोडक्ट के ऑर्डर आने का सिलसिला शुरू हो गया, जो आज भी जारी है।
नेशनल अवार्डी रमेश कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि अब इस आर्ट से जुड़े कारीगरों के पास पूरे साल ऑर्डर रहते हैं। वर्तमान समय में दीपावली से जुड़े ऑर्डर कारीगरों के पास हैं, जिसे तैयार करने में वे दिन-रात जुटे हैं। उन्होंने बताया कि बीते कुछ सालों में जो कारीगर इस काम को छोड़ चुके थे, वे भी वापस लौट आए हैं। वर्तमान समय में उनकी अगली पीढ़ी भी इस काम को कर रही है। स्टेट अवार्डी रोहन विश्वकर्मा ने बताया कि अब युवा कलाकार भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। युवा कलाकारों को तैयार करने के लिए बाकायदा उन्हें ट्रेनिंग भी दी जा रही है, ताकि भविष्य में यह खूबसूरत आर्ट न सिर्फ जिंदा रह सके बल्कि वे बनारस की इस खूबसूरत थाती को सहेज सकें।
वर्तमान समय में कारीगर इस खूबसूरत आर्ट से हाथी और मोर जैसे शो-पीस के साथ ज्वेलरी सहित कई अन्य चीजें भी बना रहे हैं। इस आर्ट के तहत 400 डिग्री सेल्सियस पर चांदी को तपाकर उसे अलग-अलग स्टेप्स में पहले आकार दिया जाता है। उसके बाद इस पर गुलाबी मीनाकारी का खूबसूरत रंग भरा जाता है, जिसकी खूबसूरती सबको खूब पसंद आती है। बता दें कि गुलाबी मीनाकारी को साल 2015 में जीआई टैग भी मिल चुका है। इसके साथ ही 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) में भी इसका नाम शामिल है।