वाराणसी में देश के पहले अर्बन रोपवे का काम कहां तक पहुंचा? इसके स्टेशन, किराया और 15 मिनट वाले नए रूट की पूरी डिटेल जानिए

Varanasi Ropeway Project: वाराणसी में देश का पहला अर्बन रोप वे ट्रांसपोर्ट तैयार हो रहा है। कैंट से गोदौलिया तक बन रहे इस रोप वे ट्रांसपोर्ट से 4 किलोमीटर का सफर आसान होगा। अब तक रोप वे ट्रांसपोर्ट का 95 फीसदी काम करीब पूरा हो चुका है। जानिए किराया और रूट्स समेत इसके बारे में पूरी डिटेल्स

अपडेटेड Sep 27, 2026 पर 4:55 PM
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Varanasi Ropeway Project: काशी में रोप वे ट्रांसपोर्ट का 95 फीसदी काम करीब पूरा हो चुका है

Varanasi Ropeway Project: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में देश का पहला अर्बन रोप वे ट्रांसपोर्ट तैयार हो रहा है। कैंट से गोदौलिया तक बन रहे इस रोप वे ट्रांसपोर्ट से 4 किलोमीटर का सफर आसान होगा। अब तक रोप वे ट्रांसपोर्ट का 95 फीसदी काम करीब पूरा हो चुका है। इस रोपवे ट्रांसपोर्ट से गोदौलिया-कैंट रूट पर गाड़ियों का प्रेशर कम होगा और इससे रोजाना करीब 90 हजार लोग सफर कर पायेंगे। इस रोप वे ट्रांसपोर्ट की शुरुआत के बाद काशी में टूरिज्म को नया आयाम भी मिले गा। रोपवे इस प्राचीन शहर में पर्यटकों को बिलकुल अलग अनुभूति कराएगा। अब तक पहाड़ी इलाकों में तो लोग रोपवे का सफर करते है लेकिन शहरी इलाके में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तौर पर पहली बार लोग ऐसे सफर का एक्सपीरियंस उठाया जा सकेगा।

वाराणसी में बन रहें रोप वे ट्रांसपोर्ट के लिए शहर में कुल 5 स्टेशन बनाए गए है। इसमें कैंट, विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर और गोदौलिया शामिल हैं। हर एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच सफर के लिए स्थानीय लोगों और पर्यटकों को 10 रूपये प्रति व्यक्ति किराया देना होगा। जो लोग कैंट से सीधे गोदौलिया तक का सफर करेंगे उन्हें इसके लिए 50 रूपये खर्च करने होंगे। फिलहाल सड़क मार्ग से भी कैंट से गोदौलिया तक के सफर के लिए करीब इतना ही किराया लोगों को देना होता है। रोपवे से इस सफर को सिर्फ 15 से 16 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। फिलहाल सड़क मार्ग से इस सफर के लिए लोगों को अभी 35 से 45 मिनट का समय लगता है।

इस रोपवे को कौन बना रहा?


वाराणसी में नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैंनेजमेंट लिमिटेड इस काम को पूरा कर रही है। कैंट, विद्यापीठ और रथयात्रा के स्टेशन के साथ यहां रोप वे ट्राली के ट्रायल का काम भी लगभग पूरा हो चुका है। वहीं गिरजाघर और गोदौलिया स्टेशन का काम फिलहाल तेजी से जारी है। यहां तारों पर गंडोला की टेस्टिंग भी हो रही है। वाराणसी के कमिश्नर एस राजलिंगम ने बताया की रोपवे ट्रांसपोर्ट का 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अगले महीने तक बाकी बचे काम को भी पूरा किया जा सकता है।

इस प्रोजेक्ट पर कितना हो रहा खर्च, ये भी जानिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट पर कुल 807 करोड़ रूपये खर्च हो रहे हैं। वाराणसी में बन रहा देश का पहला अर्बन रोपवे ट्रांसपोर्ट को भी वाराणसी के थीम पर ही बनाया जा रहा है। यहां के स्टेशन पर आप भगवान शिव के साथ घाटों का खूबसूरत थीम भी दिखेगी। इसके अलावा जिस ट्राली (गंडोला) से यात्री सफर करेंगे उनमें भी घाट और मंदिर की झलक पर्यटकों को दिखेगी। रोप वे ट्रांसपोर्ट के लिए वाराणसी में 29 टॉवर बनाए गए है। इन टॉवर की ऊंचाई 55 मीटर तक है। यानी पर्यटक काशी की खूबसूरत छठा को 150 फीट की ऊंचाई से निहार सकेंगे।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

हर स्टेशन पर 2 से 3 मिनट के अंतराल पर रोपवे ट्राली मिलेगी। इसमें एक बार 10 यात्री सफर कर पाएंगे। हर घंटे करीब 6 हजार लोग इससे सफर करेंगे। पुरे दिन में करीब 16 घंटे इसका संचालन होगा। यानी एक दिन में करीब 90 हजार से ज्यादा लोग इससे सफर कर पाएंगे। रोप वे ट्रांसपोर्ट तैयार होने के बाद पर्यटक आसानी से काशी विश्वनाथ धाम पहुंच सकेंगे।

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टूरिज्म वेलफेयर एसोशिसन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने बताया की रोप वे ट्रांसपोर्ट से सफर करना यहां आने वाले लाखों पर्यटकों के लिए बिलकुल नया अनुभव होगा। इसलिए इसकी शुरुआत के बाद यहां टूरिज्म इंड्रस्टी को एक बार फिर बूस्टअप मिलेगा।

(वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट)

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