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काशी के मंदिरों में चढ़े फूलों से हो रहा कमाल: बन रही अगरबत्ती और हर्बल गुलाल, 80 महिलाओं की चमकी किस्मत!

Varanasi Flower Recycling: बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के मंदिरों में रोजाना भगवान पर चढ़ने वाले हजारों किलो फूलों का आखिर क्या होता है? वाराणसी नगर निगम और 'ईजी हेल्प' संस्था की एक अनोखी पहल ने इन अपशिष्ट फूलों को रोजगार का बड़ा जरिया बना दिया है। 'पुष्प-रथ' से फूल इकट्ठा कर अगरबत्ती, धूप और हर्बल गुलाल बनाए जा रहे हैं। इससे 80 से ज्यादा महिलाएं कैसे आत्मनिर्भर बन रही हैं? जानिए इस खास रिपोर्ट में

Edited By: Abhishek Guptaअपडेटेड Oct 18, 2026 पर 3:08 PM
काशी के मंदिरों में चढ़े फूलों से हो रहा कमाल: बन रही अगरबत्ती और हर्बल गुलाल, 80 महिलाओं की चमकी किस्मत!
काशी के लगभग 110 मंदिरों से प्रतिदिन करीब 1,000 किलो चढ़ाए हुए फूल और पत्तियां एकत्र की जाती हैं

Varanasi Temple Flower Recycling Agarbatti: धर्म नगरी काशी को मंदिरों का शहर कहा जाता है। इस शहर में हर दिन लाखों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। काशी के इन्हीं मंदिरों में भगवान को अर्पित किए जाने वाले फूलों से अब अगरबत्ती, धूप और हवन सामग्री जैसी पूजा की चीजें तैयार की जा रही हैं। इस काम से महिलाओं को न सिर्फ रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, बल्कि वे इससे अच्छी कमाई भी कर पा रही हैं। वाराणसी नगर निगम और एक निजी संस्था के सहयोग से धार्मिक कचरे का बेहतर प्रबंधन हो रहा है और इससे महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।

रोज कलेक्ट होते है 1,000 किलो फूल और पत्तियां

एक आंकड़े के मुताबिक, काशी के लगभग 110 मंदिरों से प्रतिदिन करीब 1,000 किलो चढ़ाए हुए फूल और पत्तियां एकत्र की जाती हैं। इसके बाद महिलाएं उनकी छंटाई कर उनमें से उपयोगी फूलों को अलग करती हैं। फूलों को बिना केमिकल के प्राकृतिक तरीके से सुखाया जाता है और फिर उन्हें पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है। इस कच्चे माल से पूजा के अलग-अलग उत्पाद बनाए जाते हैं।

अगरबत्ती, धूप से लेकर बन रहे हर्बल गुलाल

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