Honda Activa News: कहते हैं कि बूंद-बूंद से घड़ा भरता है और छोटी-छोटी बचत से बड़े से बड़े सपने पूरे हो जाते हैं। तेलंगाना के मंचेरियल जिले के एक शख्स ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। उन्होंने तीन साल तक ₹10 के सिक्के जमा किए और जब पर्याप्त रकम इकट्ठा हो गई, तो उन्हीं सिक्कों से 1 लाख 23 हजार रुपये की होंडा एक्टिवा (Honda Activa) स्कूटर खरीद ली। उनकी इस अनोखी कहानी ने शोरूम के कर्मचारियों से लेकर स्थानीय लोगों तक का ध्यान खींचा है। लक्षेट्टीपेट निवासी बी. रवि जोसेफ ने बताया कि उन्होंने परिवार के लिए कोई उपयोगी चीज खरीदने के उद्देश्य से रोजमर्रा के लेनदेन, जैसे किराने का सामान खरीदने के दौरान मिले 10 रुपये के सिक्कों को सावधानीपूर्वक बचाकर रखा।
परिवार को पहले था शक, लेकिन बाद में किया सपोर्ट
पीटीआई के मुताबिक, जोसेफ ने कहा कि शुरुआत में परिवार के सदस्यों को उनके इस विचार पर शक हुआ था। लेकिन बाद में उन्होंने उनका साथ दिया। रवि ने बताया कि उनकी पुरानी बाइक खराब होने लगा था, जिसके बाद उन्होंने नया स्कूटर खरीदने का फैसला किया। शोरूम के मैनेजर ने बताया कि रवि जोसेफ करीब 15 दिन पहले यह पता करने आए थे कि क्या शोरूम स्कूटर के पेमेंट के लिए सिक्के स्वीकार करेगा। मैनेजर के अनुसार, शोरूम ने सिक्के स्वीकार करने पर सहमति जताई। मैनेजर ने बताया कि इसके बाद रवि जोसेफ एक लाख 23 हजार रुपये के 10 रुपये के सिक्के लेकर शोरूम पहुंचे और स्कूटर खरीदा।
रोजमर्रा के खर्च से बचाए पैसे
रवि जोसेफ पेशे से चर्च के पादरी हैं। रवि ने रोजमर्रा के खर्चों में से थोड़े-थोड़े पैसे बचाकर यह रकम जुटाई। पोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 10 अक्टूबर 2023 से ₹10 के सिक्के जमा करना शुरू किया था। किराने का सामान खरीदने और रोजमर्रा के लेन-देन के दौरान मिलने वाले सिक्कों को वह अलग रख देते थे। इस तरह तीन साल तक लगातार बचत करते हुए उन्होंने करीब ₹1.23 लाख जमा कर लिए।
पुराना वाहन खराब हुआ तो लिया नया स्कूटर खरीदने का फैसला
रवि जोसेफ का पुराना वाहन बार-बार खराब होने लगा था। ऐसे में उन्होंने नया दोपहिया वाहन खरीदने का फैसला किया। उनका सपना पहले रॉयल एनफील्ड बुलेट खरीदने का था। लेकिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें अपना यह इरादा छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपनी जमा की गई रकम से परिवार के लिए एक नया स्कूटर खरीदने का फैसला किया। जिस पैसे को उन्होंने लंबे समय तक धीरे-धीरे जमा किया था, वही आखिरकार उनके काम आया।
परिवार ने भी जताई थी चिंता
रवि जोसेफ के लिए तीन साल तक सिक्के जमा करना आसान नहीं था। इस दौरान उनके परिवार के लोगों ने भी चिंता जताई। ₹10 के सिक्कों को लेकर बाजार में इनके बंद होने या कानूनी मान्यता खत्म होने जैसी अफवाहों की चर्चा से परिवार को लगा कि कहीं उनकी मेहनत बेकार न चली जाए। परिवार ने उन्हें सिक्के जमा करना बंद करने की सलाह भी दी। लेकिन रवि जोसेफ ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा और लगातार बचत करते रहे।
दो घंटे तक सिक्के गिनते रहे शोरूम के कर्मचारी
शख्स ने होंडा मोटर्स शोरूम में अपनी जमा रकम से स्कूटर खरीदने का फैसला किया। इसके बाद जब रवि जोसेफ अपने परिवार के साथ सिक्के लेकर शोरूम पहुंचे, तो कर्मचारियों के सामने उन्हें गिनने और रकम का मिलान करने की चुनौती थी। रिपोर्ट के अनुसार, सिक्कों को गिनने और कुल राशि की पुष्टि करने में कर्मचारियों को करीब दो घंटे लग गए। आखिरकार, सिक्कों की कुल कीमत ₹1.23 लाख निकली और रवि जोसेफ ने इन्हीं पैसों से अपनी सपनों की Honda Activa खरीद ली।
रवि जोसेफ की यह कहानी केवल एक स्कूटर खरीदने तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि नियमित रूप से थोड़ी-थोड़ी रकम बचाकर भी किसी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। जहां कई लोग छोटी रकम को नजरअंदाज कर देते हैं। वहीं, रवि ने रोजमर्रा के लेन-देन से मिलने वाले ₹10 के सिक्कों को अपनी ताकत बना लिया। तीन साल की मेहनत के बाद जब वह अपने परिवार के साथ नया स्कूटर लेकर निकले, तो उनकी बचत की कहानी दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गई। रवि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।