वाटर ग्रिड और रिवर ड्रेजिंग का फॉर्मूला... नितिन गडकरी लेकर आए वो प्लान जिससे खत्म हो जाएगी बिहार की बाढ़?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को बिहार को बाढ़-मुक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर वॉटर मैनेजमेंट, नदी की खुदाई, सुरक्षा दीवार बनाने और वॉटर ग्रिड की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने 'बिहार इन्वेस्टर समिट 2026: भारत का उभरता हुआ इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन' के उद्घाटन के बाद ये बातें कहीं

अपडेटेड Oct 01, 2026 पर 7:41 PM
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गडकरी ने 'बिहार इन्वेस्टर समिट 2026: भारत का उभरता हुआ इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन' का उद्घाटन किया।

बिहार में हर साल आने वाली विनाशकारी बाढ़ से राज्य को बचाने के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने वाटर ग्रिड और रिवर ड्रेजिंग का फॉमूला पेश किया है। उन्होंने गुरुवार को पटना में 'बिहार इन्वेस्टर समिट 2026: भारत का उभरता हुआ इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन' का उद्घाटन किया। इस मौके पर गडकरी ने कहा कि राज्य की बाढ़ की समस्या को कम खर्च में हल करने के लिए टेक्नोलॉजी को नई नीतियों और भविष्य के नजरिए के साथ जोड़ने की जरूरत है।

समिट के उद्घाटन के बाद केंद्रीय मंत्री ने बिहार को बाढ़-मुक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर जल प्रबंधन, नदी की खुदाई, सुरक्षा दीवार बनाने और वॉटर ग्रिड की जरूरत पर जोर दिया। गडकरी ने कहा कि गडकरी ने कहा, "नेशनल हाईवे और पावर ग्रिड की तरह, वॉटर ग्रिड सिस्टम लागू करने और एक बेसिन से दूसरे बेसिन में पानी ट्रांसफर करने से राज्य में ज्यादा पानी के बहाव को मैनेज करने में मदद मिल सकती है।" उन्होंने बाढ़ के खतरे को कम करने के उपाय के तौर पर नदी की खुदाई पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, "मैंने एनएचएआई के अधिकारियों से बात की। हम खुदाई करने और गाद को मुफ्त में हटाने को तैयार हैं। गाद का इस्तेमाल हाईवे बनाने के लिए मटीरियल के तौर पर किया जा सकता है। अगर बिहार सरकार ऐसी योजना की इजाजत देती है, तो मैं भरोसा दिला सकता हूं कि बाढ़ की समस्या को कम खर्च में अच्छे से हल किया जा सकता है।"

गडकरी ने कहा कि तटबंधों और सुरक्षात्मक दीवारों के निर्माण के जरिए गहरे जलमार्ग विकसित करने से जल परिवहन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे परिवहन लागत कम होगी और उद्योग, व्यापार तथा निवेश पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम तीन मीटर गहरा जलमार्ग बनाते हैं तो वाराणसी से बांग्लादेश के ढाका तक 3,000 टन क्षमता वाला बजरा ले जाया जा सकता है। भारत का कंटेनर बांग्लादेश जाने के लिए जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीटी) और कोलंबो के रास्ते जाता है। प्रस्तावित मार्ग से लॉजिस्टिक्स लागत में काफी कमी आएगी। अगर आप उद्योग, व्यापार और कारोबार बढ़ाना चाहते हैं तो लॉजिस्टिक्स लागत कम करनी होगी।’’

गडकरी ने अपने कार्यकाल के दौरान नेपाल में कोसी नदी पर बांध परियोजना पूरी नहीं हो पाने पर अफसोस जताया।


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