राइड हेलिंग प्लेटफॉर्म रैपिडो का लक्ष्य और 10 करोड़ यूजर्स तक जल्द से जल्द पहुंच बनाने का है। कंपनी का फोकस किफायती राइड के साथ-साथ भारत के और शहरों में विस्तार पर है। यह बात रैपिडो के को-फाउंडर और CEO अरविंद सांका ने मनीकंट्रोल स्टार्टअप कॉन्क्लेव के तीसरे एडिशन में कही। कंपनी राइड-हेलिंग से आगे बढ़ते हुए फूड डिलीवरी में बड़े मौके देख रही है।
कॉन्क्लेव में बात करते हुए सांका ने कहा कि रैपिडो ने 11 साल तक बिना ज्यादा चर्चा में आए अपना बिजनेस बनाया और सप्लाई साइड को मजबूत करने पर ध्यान दिया। अगर सप्लाई की समस्या को हल किया जाता है तो उसका असर ज्यादा बड़ा होता है। अब कंपनी और 10 करोड़ यूजर्स से जुड़ना चाहती है। सांका के मुताबिक, "हम बड़े पैमाने पर अगले 10 करोड़ यूजर्स की जरूरतों को पूरा करना चाहते हैं। हम उन सेगमेंट्स को प्राथमिकता देना चाहते हैं, जिनका सबसे ज्यादा असर हो। कंपनी ने सीमित पूंजी और मुश्किल हालात के बावजूद अपना बिजनेस लगातार बढ़ाया है।"
रैपिडो भारत में लगातार विस्तार कर रही है। सांका ने आगे कहा, "जैसे-जैसे हम भारत में और आगे बढ़ रहे हैं, हम हर साल 100-200 शहरों में सर्विस शुरू कर रहे हैं। हमारे लिए किफायती दाम पर सर्विस मुहैया कराना सबसे जरूरी है। इसी तरह हम भारत में और आगे बढ़ रहे हैं।"
सीमित संसाधनों के साथ अच्छा बिजनेस बना पाना बेहद सौभाग्य की बात
सांका ने बताया कि रैपिडो को अपना पहला वेंचर कैपिटल राउंड 5 साल बाद मिला, जिससे कंपनी को यह समझने का समय मिला कि वह कैसा असर डाल रही है और मार्केट में कैसे मुकाबला करना है। सीमित संसाधनों के साथ काम करने से कंपनी का कल्चर असर डालने पर केंद्रित हुआ। ज्यादातर टैलेंट कंपनी के अंदर ही डेवलप किया गया। रैपिडो ने कभी फंड जुटाने का जश्न नहीं मनाया। आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर सांका ने कहा कि इसने रैपिडो को अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को लॉन्च करने की रफ्तार बढ़ाने में मदद की है।
फूड डिलीवरी में राइड शेयरिंग जैसी पैठ नहीं
फूड डिलीवरी मार्केट के बारे में सांका ने कहा कि रैपिडो नई कैटेगरी में यह मानकर नहीं उतरती कि उसमें पहले से ही दो बड़ी कंपनियों का दबदबा (डुओपॉली) है। उनके मुताबिक, "हमने फूड डिलीवरी में राइड शेयरिंग जैसी पैठ नहीं देखी है। भले ही काफी लोग बाहर जाकर खाना खाते हों, लेकिन यह फूड डिलीवरी इंडस्ट्री में रिफ्लेक्ट नहीं हो रहा है।" आगे कहा, "हमें लगता है कि यह 10-15 करोड़ यूजर वाला मार्केट बन जाएगा। यह सब किफायती होने की बात है। हम यह नहीं कह रहे हैं कि हमारे पास इसका जवाब है। लेकिन हमें लगता है कि इसमें मौका है।"