Commodity Market : जानिए आगे हफ्ते कैसी रह सकती है कमोडिटीज की चाल, सोने को कहां मिलेगा सपोर्ट और कहां होगा रेजिस्टेंस
Commodity Market : अगले हफ्ते ताजे आंकड़ों पर सेंट्रल बैंक की प्रतिक्रिया के बारे में अनुमान लगाने के लिए FOMC की मीटिंग के मिनट्स, यूएस फेड के अधिकारियों के बयानों, सप्लाई से जुड़ी खबरों और जियोपोलिटिकल घटनाओं पर बाजार की नजर रहेगी
Commodity Market :अगले हफ्ते कॉपर को लेकर एक खास जोखिम बना रहेगा। चिली में BHP की एस्कोन्डिडा और एंटोफ़ागास्टा की सेंटिनेला खदानों के कर्मचारियों ने नए कॉन्ट्रैक्ट ऑफ़र ठुकरा दिए हैं
Commodity Market : 2 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यूएस बॉन्ड की भारी बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि अमेरिका से लगातार आने वाले कमजोर डेटा के कारण फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े अनुमानों में काफी बदलाव हुआ है। अप्रैल 2025 के बाद पहली बार डॉलर 102 के स्तर से ऊपर चला गया। इसमें सबसे ज्यादा तेजी गुरुवार को आई। ग्लोबल बॉन्ड की बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण US में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.34 प्रतिशत (2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर) तक पहुंच गई और डॉलर भी 102.2 के हाई पर पहुंच गया।
करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं
दो अलग-अलग आंकड़ों ने मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला,लेकिन करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। बुधवार को आए कोर PCE के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। वहीं, शुक्रवार को आए सितंबर के पेरोल आंकड़े सिर्फ़ 29,000 पर रहे, जो लगभग 84,000 से 90,000 के अनुमान से काफी कम थे। साथ ही बेरोज़गारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। जुलाई-अगस्त के आंकड़ों में कुल मिलाकर 60,000 नौकरियों की कमी आई।
अमेरिका में वेतन बढ़ोतरी की रफ्तार पड़ी धीमी
वेतन में बढ़ोतरी की रफ्तार भी धीमी पड़ती दिखा। सितंबर में प्रति घंटा औसत कमाई में सिर्फ़ 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सालाना बढ़ोतरी धीमी होकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई,जो 2021 के बाद से सबसे कम है। इस जॉब्स रिपोर्ट के बाद ब्याज दरों में बदलाव के अनुमान बदल गए। यूएस फेड की अक्टूबर की बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना,जो एक हफ्ते पहले 60 प्रतिशत से ज़्यादा थी,घटकर 20 प्रतिशत से भी कम हो गई है।
इन आंकड़ों के बाद शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई, हालांकि पिछले पांच हफ्तों में ज्यादातर समय डाओ जोन्स और S&P 500 में गिरावट देखने को मिली। जबकि नैस्डक में बढ़त जारी रही।
हफ्ते के आखिर में स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में 3 प्रतिशत और 6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई। डॉलर और यील्ड में बढ़ोतरी का असर ब्याज दरों के अनुमानों पर पड़ा। फेड अधिकारी ज़्यादातर सतर्क रुख अपनाते दिखे। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट विलियम्स ने कहा कि इस साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है,हालांकि उन्हें इसकी कोई जल्दबाजी नहीं दिखी। जबकि उनके कई सहयोगियों ने महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने के जोखिम की ओर इशारा किया।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़त होने पर सोने पर बनेगा दबाव
बीते हफ्ते सोने की कीमतों में दो बार तेजी आई। कमजोर जॉब्स और महंगाई के आंकड़ों की वजह से यह कुछ समय के लिए $4,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया,लेकिन यह अपनी बढ़त बनाए नहीं रख सका और $4,150 से नीचे बंद हुआ। चांदी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। हफ्ते में दोनों बार यह $62 प्रति औंस के करीब पहुंची, लेकिन हर बार वापस $60 से नीचे आ गई। इनकी आगे की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि डॉलर और यील्ड काबू में रहते हैं या नहीं। अगर इनमें से किसी में भी दोबारा तेजी आती है,इन मेटल्स पर और दबाव पड़ने की संभावना है।
सोने के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
गोल्ड फ्यूचर्स में कमजोरी का रुख बना हुआ है और ये 20-डे EMA और सुपरट्रेंड (7,3) दोनों के नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि RSI (14) 50 से नीचे है,जो सुस्त मोमेंटम का संकेत है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट ₹1,45,950 प्रति 10 ग्राम पर है। अगर गोल्ड इस लेवल से नीचे बना रहता है,तो यह ₹1,44,500 के आसपास स्थित अगले सपोर्ट लेवल तक गिर सकता है।
ऊपर की तरफ इसके लिए ₹1,51,100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा हैऔर उसके बाद ₹1,53,000 पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस है। शॉर्ट-टर्म आउटलुक में सुधार के लिए सोने के लिए लगातार ₹1,53,000 के ऊपर बने रहना जरूरी होगा। कुल मिलाकर इसका टेक्निकल ट्रेंड साइडवेज से लेकर बेयरिश बना हुआ है।
कच्चे तेल पर रहेगी नजर
ईंधन की कीमतों को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव के जवाब में G7 देशों ने अगले चार महीनों में 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल तक डीजल और कच्चे तेल के भंडार को कम करने की एक मिली-जुली योजना बनाई है। इस योजना के तहत डीजल भंडार का अधिकांश हिस्सा शुरुआती तीन हफ्तों में ही कम किया जाएगा। इस योजना के दबाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें हफ्ते के आखिर में गिरकर बंद हुईं।
इसी जॉइंट स्टेटमेंट में ईरान के अपने पड़ोसियों पर हालिया हमलों की निंदा की गई और रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को फिर से दोहराया गया। फिर भी,कच्चे तेल के भाव में सिर्फ 2 प्रतिशत की ही कमी आई। इसकी वजह यह है कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी जोखिम बना हुआ है। ऐसी खबरें भी हैं कि अमेरिका का तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इस क्षेत्र में भेजा जा रहा है,जिसके नवंबर के आखिर तक पहुंचने की उम्मीद है।
उधर डोनाल्ड ट्रम्प ने उस पूर्व रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन ने ठोस परमाणु रियायतों के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत की पेशकश की है। हालांकि कतर ने दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की बात कही है। हालांकि इससे अभी कोई बड़ी सफलता नहीं हासिल हुई है।
सप्लाई के नजरिए से देखें तो पिछले महीने ड्रोन हमले से हुए नुकसान के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फिर से चालू हो गई है। यह पाइपलाइन अभी अपनी पूरी क्षमता के लगभग आधे यानी रोज़ाना 35 लाख बैरल की रफ़्तार से चल रही है। साथ ही,सितंबर में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की कुल शिपमेंट बढ़कर रोज़ाना 1.63 करोड़ बैरल हो गई है,जो फरवरी के आखिर में शुरू हुए टकराव के बाद से सबसे तेज रफ़्तार है।
बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट
बीते हफ्ते बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट आई। कॉपर 2 प्रतिशत से ज़्यादा गिरकर $14,260 प्रति टन के आसपास बंद हुआ। जबकि जिंक और एल्युमीनियम में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। डॉलर के 17 महीने के हाई पर पहुंचने का असर डॉलर में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज़ पर पड़ा,जिससे चीन के आंकड़ों में आए अच्छे सुधार का असर भी बेअसर हो गया।
चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी
चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी दिखी है। वहीं, सर्विस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को कवर करने वाला नॉन-मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स बढ़कर 50.2 पर पहुंच गया है। इन दोनों आंकड़ों में नए स्टिमुलस पैकेज के बाद बढ़त आई है,जिसे 2024 के बाद का सबसे बड़ा पैकेज बताया जा रहा है और जिसका मकसद चीन में 4.5 से 5 प्रतिशत के ग्रोथ टारगेट को हासिल करना है।
हफ़्ते की शुरुआत में सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के कारण कॉपर की कीमत $14,400 से ऊपर बनी हुई थी,लेकिन बाद में दूसरी कमोडिटीज की तरह इसमें भी गिरावट आई। नेशनल डे की छुट्टियों के कारण चीन में कमजोर कारोबारी गतिविधि के कारण मेटल्स की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।
FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर रहेगी नजर
आने वाले हफ्ते में डेटा कम ही आएगा। मुख्य रूप से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सर्विस PMI और US के शुरुआती कंज्यूमर सेंटीमेंट और महंगाई के अनुमान ही आएंगे। इस हफ्ते के डेटा पर सेंट्रल बैंक की प्रतिक्रिया के बारे में और अंदाजा लगाने के लिए FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर बाजार का फोकस रहेगा।
अगले हफ्ते कॉपर को लेकर एक खास जोखिम बना रहेगा। चिली में BHP की एस्कोन्डिडा और एंटोफ़ागास्टा की सेंटिनेला खदानों के कर्मचारियों ने नए कॉन्ट्रैक्ट ऑफ़र ठुकरा दिए हैं और वे सरकार की अनिवार्य मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं। अगर बातचीत विफल रहती है तो सेंटिनेला में 13 अक्टूबर के आसपास कानूनी हड़ताल हो सकती है,जिससे तांबे की फिजिकल सप्लाई पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। पनामा की कोब्रे पनामा खदान को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव से भी ज़्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
OPEC से प्रोडक्शन कोटा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं
उम्मीद है कि OPEC प्रोडक्शन कोटा में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं, मार्केट G7 के डीजल रिलीज़ और अगर कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं, तो रिज़र्व से और डीजल निकालने के किसी भी संकेत पर नजर रखेगा। सऊदी अरब और हूथी के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम कच्चे तेल की कीमतों के लिए सबसे अहम फैक्टर बना हुआ है। इससे सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधा खतरा है।
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