पंजाब में रिलायंस जियो के खिलाफ किसानों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए रिलायंस ने किसानों के सामने अपना पक्ष रखा है। रिलायंस ने कहा है कि हमारा कॉरपोरेट फार्मिंग या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से कोई लेना देना नहीं है। रिलायंस ने कहा, "कॉरपोरेट या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में हमारे दाखिल होने की कोई योजना नहीं है।" कंपनी ने एक बयान जारी करके यह भी कहा है कि "हमने कभी भी कॉरपोरेट फार्मिंग के लिए खेती की जमीन नहीं खरीदी है।" कंपनी ने यहा तक भी कहा है कि वह खेती की जमीन नहीं खरीदेगी।

रिलायंस ने सोमवार को एक बयान जारी करके साफ किया है कि वह किसानों से डायरेक्ट अनाज नहीं खरीदती है। सप्लायर्स किसानों से MSP पर अनाज खरीदते हैं। कंपनी ने कहा कि उसने कभी भी कम कीमत पर लॉन्ग टर्म प्रोक्योरमेंट कॉन्ट्रैक्ट (खरीदारी का करार) नहीं किया है। कंपनी ने कहा कि उनका मकसद किसानों को ताकतवर बनाना है।

रिलायंस ने तोड़फोड़ के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के हाई कोर्ट में रिट पीटिशन डाला है। रिलायंस ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट से निवेदन किया है कि हमारे कर्मचारियों और प्रॉपर्टी को नुकसान से बचाया जाए। कंपनी ने यह भी कहा है कि इस तोड़फोड़ के पीछे कारोबारी प्रतिद्वंदियों का हाथ बताया है।

क्या है पूरा मामला?

पंजाब में पिछले कुछ हफ्तों में नए कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसानों ने रिलायंस जियो के करीब 1,500 मोबाइल टावर और टेलीकॉम गियर को काफी नुकसान पहुंचाया है। इतना ही नहीं नवंबर महीने में कई किसान संगठनों ने तो पंजाब के कई हिस्सों में रिलायंस फ्रेश स्टोर तक बंद कर दिए थे।

कॉरपोरेट और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पर अपनी सफाई में कंपनी ने एक ताजा बयान जारी किया और कहा, "कॉरपोरेट या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में हमारे दाखिल होने की कोई योजना नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि हमने कभी भी कॉरपोरेट फार्मिंग के लिए खेती की जमीन नहीं खरीदी है. इतना ही नहीं कंपनी ने यहां तक कहा कि रिलायंस "खेती की जमीन नहीं खरीदेगी।"

वहीं अपने पिछले बयान में आरआईएल ने टावर और टेलीकॉम सेवाओं को बाधित करने की घटनाओं की निंदा करते हुआ कहा था, "हमारे व्यापारिक प्रतिद्वंदी अपने निहित स्वार्थों के चलते ऐसा करने वालों को भड़का और उकसा रहा हैं।" कंपनी ने आगे कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के पास चल रहे किसान आंदोलन का लाभ उठाते हुए, रिलायंस के खिलाफ लगातार, दुर्भावनापूर्ण और विद्रोह का अभियान चलाया गया, जिसका सच में कोई आधार नहीं है।

दरअसल नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का मानना है कि इन कानूनों से किसानों का 'कॉर्पोरेट शोषण' बढ़ जाएगा. इसी के चलते हजारों किसान, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 26 नवंबर से चल रहे इस आंदोलन में किसानों की मुख्य मांग हैं- तीनों कृषि कानूनों की वापसी और एमएसपी सिस्टम को बनाए रखने की गारंटी।

इस गतिरोध को खत्म करने के लिए केंद्र और किसान संघ के नेताओं के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है। किसानों को डर है कि नए कृषि सुधार कानून एमएसपी सिस्टम खत्म कर देंगे। हालांकि, केंद्र ने कहा है कि इन सुधारों से किसानों को लाभ होगा।

इसी कड़ी में 4 जनवरी को केंद्र और किसान यूनियन के नेताओं के बीच एक और दौर की बातचीत होने वाली है। पिछली बैठक में केंद्र और किसान विद्युत अधिनियम और पर्यावरण से जुड़े कुछ मुद्दों पर आम सहमति पर पहुंच गए। हालांकि, दो प्रमुख मांगों पर सहमति तब भी नहीं हो पाई- एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी और तीन कृषि सुधार कानूनों की वापसी।

(डिस्केलमर- न्यूज18 हिंदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनी नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का हिस्सा है. नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट लिमिटेड का स्वामित्व रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास ही है.)

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