OTT Platforms और डिजिटल मीडिया के सेल्फ रेगुलेशन के लिए बनेगा कानून, I&B ministry इस योजना पर कर रही काम

मोदी सरकार नेटफ्लिक्स, एमेजॉन प्राइम सहित देश में चलने वाले सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया के सेल्फ रेगुलेशन के लिए कानून बनाने जा रही है
अपडेटेड Jan 17, 2021 पर 11:38  |  स्रोत : Moneycontrol.com

मोदी सरकार नेटफ्लिक्स, एमेजॉन प्राइम और हॉटस्टार सहित देश में चलने वाले सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (OTT platforms) और डिजिटल मीडिया (Digital Media) के स्व-नियमन यानी सेल्फ रेगुलेशन (self-regulation) के लिए कानून बनाने जा रही है। जिस तरह प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया है, फिल्मों के लिए सेंसर बोर्ड (CBFC) है और टीवी चैनल्स के लिए केवल टेलीविजन नेटवर्क्स रेगुलेशन एक्ट है, ठीक उसी तर्ज पर केंद्र सरकार ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया के नियमन के लिए कानून बना रही है। अब तक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया के रेगुलेशन के लिए कोई कानून नहीं था।

मोदी सरकार के प्रस्तावित कानून का मकसद फेक न्यूज और सेंसेटिवि वीडियो कंटेंट की समस्याओं का समाधान करना है। आपको बता दें कि भारत में कम से कम 40 OTT platforms और सैंकड़ों न्यूज वेबसाइट्स हैं, जिनपर सेल्फ-रेगुलेशन के लिए यह प्रस्तावित कानून लागू होगा। एचटी में छपी खबर के मुताबिक, सरकार ने इसी महीने ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल मीडिया के सेल्फ रेगुलेशन के लिए कानून बनाना शुरू किया है।

I&B ministry इस कानून को लेकर बेहद सतर्क

सूत्रों ने बताया कि सूचना प्रसारण मंत्रालय (I&B ministry) इस कानून को लेकर बेहद सतर्क है कि इससे किसी भी प्रकार से अभिव्यक्ति (Freedom of Speech and Expression) की आजादी का हनन नहीं हो। इसके लिए I&B ministry इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के साथ मिलकर लगभग एक साल से ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल के सेल्फ रेगुलेशन के लिए काम कर रही है। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि एसोसिएशन ने जो सेल्फ-रेगुलेशन मैकेनिज्म का प्रस्ताव तैयार किया है, वह OTT Platforms के फेवर करने वाला है। सरकार इसे ठीक करने पर काम कर रही है।

ऑस्ट्रेलियन मॉडल की भी जांच-परख कर रही सरकार

साथ ही डिजिटल मीडिया से संबंधित शिकायतों के निपटारे के लिए भी एक अलग मैकेनिज्म बनाने पर काम कर रही है। आपको बता दें कि I&B ministry को OTT Platforms पर अश्लीलता और गाली-गलौज सहित भद्दी भाषा के प्रयोग की रोज सैकडों शिकायतें मिलती हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार रेगुलेटरी बॉडी या कानून बनाने के लिए बाध्य हुई है। इसके अलावा सरकार ऑस्ट्रेलियन मॉडल की भी जांच-परख कर रही है, जिसमें गूगल और फेसबुक जैसे मल्टीनेशनल टेक प्लेटफॉर्म्स को लोकल न्यूज कंटेट के लिए पैसा चुकाना होता है। 

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