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आपके लिए खास चार मंत्र जो फाइनेंशियल ICU में जाने से बचाएंगे

आपके द्वारा खरीदे जाने वाले प्रत्येक स्टॉक के लिए, यह स्पष्ट होना चाहिए कि उस स्टॉक में आपका कितना आवंटन है
अपडेटेड May 27, 2020 पर 14:42  |  स्रोत : CNBC-Awaaz

देविना मेहरा और शंकर शर्मा
  
2020 लगभग सभी भारतीय निवेशकों के लिए बहुत ही कष्टकारी रहा। निवेश की लगभग सभी रणनीतियाँ विफल हुई और अधिकतर निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा - चाहे वह स्वयं निवेश कर रहे हो या किसी म्यूच्यूअल फंड या PMS स्कीम के तहत।
 
प्रश्न यह है कि इस तरह की बाजार से आपको क्या सीख लेनी चाहिए जिससे भविष्य में आपकी धनराशि की सुरक्षा और बढ़त दोनों हो सकें।
 
मंत्र 1: निवेश आवंटन यानी एसेट एलोकेशन सही है


ऐसेट एलोकेशन केवल ऐसी चीज नहीं है जो आपके निवेश के लिए एक अच्छा विकल्प हो, इसे तो आपके निवेश का आधार होना चाहिए।
 
अगर आप एक ही ऐसेट क्लास यानी कि शेयर मार्केट/ इक्विटी, और वह भी केवल एक देश की शेयर मार्केट, में ही खेलेंगे तो इस खेल में लंबे टिका रहना आसान नहीं रहेगा।
 
निवेश का अर्थ केवल शेयर मार्केट में निवेश नहीं होता अगर यह बात आपको स्पष्ट नहीं है तो आपका निवेशित धन भारी जोखिम में पड़ सकता है।


ऐसेट एलोकेशन का अर्थ है कि आपके निवेश का पाई चार्ट सभी ऐसट क्लासेज यानी कि सभी परिसंपत्ति वर्गों में ठीक ढंग से विभाजित हो और यह ऐसी प्रक्रिया भी नहीं है जो केवल एक बार करनी होती है - इस पर हमेशा दृष्टि रखनी होती है और सभी एसेट बाजारों और सभी देशों की आगे की स्थिति का अनुमान लगाकर इसको समय-समय पर बदलना पड़ता है।
 
आप पूछेंगे कि ऐसा क्यों करना पड़ता है इसका कारण क्या है?
 
यह डेटा देखते ही सब साफ हो जाएगा:
 
2019 में भारतीय गवर्नमेंट सिक्योरिटीज यानी सरकारी प्रतिभूतियों में लगभग 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सोने की कीमतें 24.6 फीसदी बढ़ीं। इसके विपरीत, निफ्टी 500 ने मात्र 7.7 प्रतिशत रिटर्न दिया।
 
2020 में यह अंतर और भी उभर कर सामने आया: भारतीय इक्विटी में लगभग 25 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि सरकारी प्रतिभूतियों में 6 फीसदी और सोने में 21 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है!
 
लेकिन क्या आपने कभी किसी फंड मैनेजर या आपके वित्तीय सलाहकार (फाइनेंसियल एडवाइजर) को सुना है कि आपको बेहतर रिटर्न्स के लिए या कम से कम डायवर्सिफिकेशन अर्थात विविधीकरण के लिए सरकारी प्रतिभूतियों और सोने में निवेश करना चाहिए।
 
या किसी ने यह कहा कि इन ऐसेट क्लासेस का रिटर्न इक्विटी से बेहतर भी हो सकता है? स्पष्ट रूप से नहीं।
 
कारण है कि कोई भी फंड मैनेजर या फाइनेंशयल एडवाइजर सरकारी प्रतिभूतियों या सोने में निवेश की सलाह देने पर अधिक नहीं कमा सकता है। उसे अधिकतम फीस मिलती है आपके धन का निवेश इक्विटी या इक्विटी म्यूच्यूअल फंड में करने के लिए।
 
इन सभी प्रकार की सलाह के पीछे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में यह सोच होती है कि सलाहकार को कौन सी राय देने पर अधिक फीस मिलेगी। निवेशक को क्या रिटर्न मिलेगा यह बात एक तरह से गौण हो जाती।
 
इस बात को हमेशा याद रखें!
 
मंत्र 2: अपने निवेश को पोर्टफोलियो के दृष्टिकोण से देखें
 
अधिकांश निवेशकों का मानना है कि बाजार में बड़ा पैसा बनाने का रास्ता है स्टॉक ब्रोकर से टिप लेना कि कौन सा शेयर चलने वाला है, किस में तेजी होने वाली है और उसमें व्यक्तिगत रूप से निवेश करना।
 
असल में यह पैसा बनाने का नहीं अपनी बर्बादी करने का रास्ता है।
 
एक एक स्टॉक खरीदते हुए आपका ख्याल ही नहीं रहता कि आपका पोर्टफोलियो किस दिशा में जा रहा है।
 
सही तरीका है अपनी इक्विटी और अन्य धन निवेश का इस प्रकार से चयन करना कि आपकी दृष्टि हमेशा इस पर बनी रहे कि आपका पूरा पोर्टफोलियो किस दिशा में जा रहा है।
 
इसका अर्थ क्या है?
 
आपके द्वारा खरीदे जाने वाले प्रत्येक स्टॉक के लिए, यह स्पष्ट होना चाहिए कि उस स्टॉक में आपका कितना आवंटन है, यह आपके पोर्टफोलियो में किस सेक्टर में कितना वेटेज जोड़ता है, और यह आपके इक्विटी पाई चार्ट के जोखिम यानी रिस्क प्रोफाइल को कैसे बदल देता है।
 
अव्यवस्थित ढंग से, टिप्स के आधार पर शेयर खरीदे जाने से आपके पोर्टफोलियो को अनियंत्रित जोखिम का सामना करना पड़ सकता है यानी कि भारी नुकसान की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
 
इस दृष्टि से आप पेशेवर फंड मैनेजरों की रणनीति और प्रदर्शन को भी देखें: इनमें से बहुतों ने पिछले वर्ष तक अपने निवेशकों के पैसे का 40% - 60% वित्तीय शेयरों (बैंक, NBFC इत्यादि) में डाल दिया और पिछले कुछ महीनों में इन पोर्टफोलियों के मूल्य में भारी गिरावट आई।
 
मंत्र 3: निवेश का सबसे मूल मंत्र है जोखिम यानी रिस्क प्रबंधन
 
इलाज से बेहतर है कि रोग होने ही ना दिया जाए। ऐसा आपने कई बार सुना होगा। यह धन पर भी उतना ही लागू होता है जितना कि आपके स्वास्थ्य पर।
 
मजबूत जोखिम प्रबंधन वह निवारक उपाय है जो यह सुनिश्चित कर सकता है कि आपको वित्तीय अस्पताल में जाने की आवश्यकता नहीं है।
 
एक बात गांठ बांध लीजिए कि अपने धन की रक्षा करना, धन में वृद्धि करना इत्यादि लक्ष्यों को पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि आप को बड़ा नुकसान ना हो।
 
उदाहरण के लिए, यदि बाजार में गिरावट में आपके 100 रुपये घट कर 65 रुपये हो जाते हैं, तो केवल ₹100 पर वापस आने के लिए आपको बाजार में 50-60 प्रतिशत की वृद्धि की आवश्यकता है! यह आमतौर पर 2-3 साल की यात्रा है।
 
मनुष्य की यह वृत्ति है कि कटु सत्य से भागता है, कतराता है। कई बार गंभीर बीमारी को समझने में देर कर देता है और दर्द निवारक गोलियां लेकर काम चलाता रहता है।
 
नुकसान को पहचानने और बुक करने में हमारा दिमाग तथा हमारा अहम् हमें रोकता है। मन में ऐसा संवाद चलता है:
 
हम कैसे गलत हो सकते हैं?
 
दुर्भाग्य से, यह दृष्टिकोण आपके निवेश करियर का स्थायी अंत ला सकता है।
 
सबसे भ्रामक सलाह जो आपको सुनाई देगी वह यह, एवरेज डाउन करिए यानी किसी शेयर का भाव यदि गिरता है तो नीचे के भाव में आप और खरीदिए।
 
इस तरह की सलाह देते हुए जो उदाहरण या दृष्टांत आपको दिए हो जाते हैं, वह गिने चुने ही होते हैं और औसतन यह सलाह बिल्कुल ठीक नहीं होती है।
 
हकीकत में, एक नुकसान को मन कठोर करके स्वीकार करना और शेष पूंजी को बेहतर स्थानों में निवेशित करना ही आपकी धन वृद्धि के लिए श्रेष्ठ होता है।
 
मंत्र 4: यदि आप SCCARS से बचना चाहते हैं, तो ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन करें
 
SCCARS का मतलब सिंगल कंट्री, सिंगल करेंसी, सिंगल एसेट रिस्क है।
 
ऐसा क्यों करना चाहिए? इसको समझने लिए एक ही तथ्य काफी है:
 
अमेरिकी डॉलर में भारतीय शेयर बाजार ने दस साल में कोई रिटर्न नहीं दिया है। यानी बाजार डॉलर में गिरा है।
 
2019 में, भारत दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बाजारों में से एक था।
 
ज्यादातर बाजारों ने 25 फीसदी (इटली) से लेकर 50 फीसदी (रूस) तक रिटर्न दिया।
 
अबतक 2020 में भी भारत के बाजार का प्रदर्शन विश्व की प्रदर्शन तालिकाओं में बहुत नीचे है।
 
इसलिए, आम धारणा के विपरीत, विश्व के अन्य बाजारों की तुलना में भारत कई वर्षों से बहुत खराब प्रदर्शन वाला बाजार है।
 
यदि आप एक ही बाजार में निवेशित रहें और ग्लोबल डायवर्सिफिकेशन नहीं करते तो यह संभावना भी बनी रहती है किसी एक समय आपको इसकी बहुत भारी कीमत चुकानी पड़े।
 
इतिहास में इसके बहुत उदाहरण हैं। जैसा जापानी निवेशकों के साथ 1990 के दशक में हुआ, एशिया के कुछ हिस्सों में उस दशक के अंत में और यूरोपियों निवेशकों के साथ पिछले 10 सालों में।
 
तो एक बार फिर पाठ दोहरा लें:
 
बड़े नुकसान से बचें, विजेताओं के साथ रहें और परिसंपत्ति वर्गों, क्षेत्रों और बाजारों में निवेश में विविधता लाएं। यह निवेश के लिए सरल प्राणायाम है। और अब से इसका नियमित अभ्यास करना है!


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