Upcoming IPO: निवेशकों के लिए बड़ा मौका! कोल इंडिया की दो सब्सिडियरी का आने वाला है आईपीओ

Upcoming IPO: सरकारी कंपनी कोल इंडिया की दो बड़ी सब्सिडियरी का IPO निवेशकों के लिए नया मौका लेकर आने वाला है। इन दोनों की देश के कोयला उत्पादन में अहम हिस्सेदारी है। जानिए दोनों कंपनियों का कारोबार और IPO की खास बातें।

अपडेटेड Nov 08, 2026 पर 10:34 AM
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कोल इंडिया की सब्सिडियरी Mahanadi Coalfields Limited यानी MCL की शुरुआत 1992 में हुई थी।

Upcoming IPO: सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया की दो बड़ी सब्सिडियरी कंपनियों Mahanadi Coalfields Limited (MCL) और South Eastern Coalfields Limited (SECL) का IPO आने वाला है। इन दोनों कंपनियों की देश के कोयला उत्पादन में बड़ी हिस्सेदारी है। इनके IPO से निवेशकों को सरकारी कोयला कंपनियों में पैसा लगाने का मौका मिलेगा।

MCL का कारोबार कितना बड़ा है?

Mahanadi Coalfields Limited यानी MCL की शुरुआत 1992 में हुई थी। इसका मुख्यालय ओडिशा में है। कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से तालचर और इब वैली कोलफील्ड में फैला हुआ है। ये दोनों इलाके कोयला उत्पादन के लिए काफी अहम हैं।


MCL बिजली कंपनियों को बड़े पैमाने पर कोयले की सप्लाई करती है। इसके अलावा सीमेंट और दूसरे उद्योग भी कंपनी से कोयला खरीदते हैं। MCL ओपनकास्ट और अंडरग्राउंड दोनों तरह की खदानों से कोयला निकालती है।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 218.31 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। यानी करीब 21.83 करोड़ टन। यह कोल इंडिया के कुल प्रोडक्शन का लगभग 28.3% था। कंपनी का नेट प्रॉफिट करीब ₹10,698 करोड़ रहा।

MCL के पास कोयले का बड़ा भंडार है। कंपनी के अनुमानित कोयला संसाधन करीब 106.76 अरब टन हैं। इससे आने वाले समय में कंपनी के कारोबार की संभावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।

SECL देश की बड़ी कोयला कंपनियों में शामिल

South Eastern Coalfields Limited यानी SECL की शुरुआत 1985 में हुई थी। इसका हेडक्वार्टर बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में है। कंपनी का कारोबार छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में फैला हुआ है।

SECL की गेवर, दीपका और कुसमुंडा जैसी बड़ी खदानें काफी चर्चित हैं। ये खदानें छत्तीसगढ़ के कोरबा इलाके में हैं। यहां बड़े पैमाने पर कोयला निकाला जाता है। कंपनी की सप्लाई का बड़ा हिस्सा बिजली बनाने वाली कंपनियों को जाता है।

वित्त वर्ष 2025-26 में SECL ने 176.29 मिलियन टन कोयले का उत्पादन किया। यानी करीब 17.63 करोड़ टन। कंपनी ने इस दौरान ₹32,956.52 करोड़ का रेवेन्यू कमाया। वहीं, नेट प्रॉफिट करीब ₹4,754.59 करोड़ रहा।

SECL देश की कोयला जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती है। खासकर बिजली उत्पादन के लिए कंपनी की सप्लाई काफी महत्वपूर्ण है।

IPO में कितनी हिस्सेदारी बिकेगी?

दोनों कंपनियों के IPO में कोल इंडिया अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रही है। SECL के IPO में 66.81 करोड़ शेयर बेचने की योजना है। यह कंपनी की 10% हिस्सेदारी के बराबर है। MCL में भी कोल इंडिया 10% हिस्सेदारी बेच सकती है।

MCL ने IPO के लिए DRHP सितंबर 2026 में दाखिल किया था। 5 नवंबर 2026 को SEBI से मंजूरी मिल गई है। वहीं, SECL ने नवंबर 2026 में IPO के लिए ड्राफ्ट पेपर दाखिल किए हैं।

दोनों IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए आएंगे। इसका मतलब है कि कंपनियां नए शेयर जारी नहीं करेंगी। कोल इंडिया अपने मौजूदा शेयर बेचेगी। इससे मिलने वाला पैसा कोल इंडिया को मिलेगा।

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