Dollar Vs Rupee : रुपये को संभालने के लिए RBI के उठाए बड़े कदम, जानिए ये कितना करेंगे काम
Dollar Vs Rupee :रुपये को संभालने के लिए RBI की तरफ से बड़ा एलान किया गया है। RBI OMCs की डॉलर जरूरतें खुद पूरी करेगा। आज से तीनों OMCs के लिए स्पेशल डॉलर विंडो खुले हैं। तय बैंकों के जरिये OMCs की रोजाना डॉलर जरूरतें पूरी होंगी। HPCL, BPCL, IOC को बाजार से डॉलर नहीं खरीदना होगा
Currency Check : PL कैपिटल में हेड ऑफ़ कमोडिटीज़, आशीष राजोदिया का कहना है कि आज से आरबीआई इंडियन ऑयल, HPCL और BPCL को उनकी रोज़ाना की पूरी ज़रूरत के लिए डॉलर बेचेगा,जिससे स्पॉट मार्केट में डॉलर की मांग का एक बड़ा जरिया हट जाएगा
Dollar Vs Rupee : डॉलर के मुकाबले रुपये में आज अच्छी मजबूती है और ये करीब एक रुपये मजबूत होकर 95.76 तक पहुंच गया है। दरअसल RBI ने गिरते रुपये को संभालने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। हालांकि RBI की CRR नियमों में सख्ती से बैंकिंग शेयरों में प्रेशर है। SBI करीब 2 फीसदी फिसला है। साथ ही इंडसइंड बैंक, यूनियन बैंक और PNB में भी करीब 1.5 फीसदी की गिरावट है। वहीं सट्टेबाजी वाली शॉर्टिंग रोकने के लिए RBI के एक्शन से डॉलर के मुकाबले रुपया करीब फीसदी मजबूत हुआ है।
RBI का बड़ा एक्शन
रुपये को संभालने के लिए RBI की तरफ से बड़ा एलान किया गया है। RBI OMCs की डॉलर जरूरतें खुद पूरी करेगा। आज से तीनों OMCs के लिए स्पेशल डॉलर विंडो खुले हैं। तय बैंकों के जरिये OMCs की रोजाना डॉलर जरूरतें पूरी होंगी। HPCL, BPCL, IOC को बाजार से डॉलर नहीं खरीदना होगा। OMCs की डॉलर डिमांड से रुपये पर दबाव बढ़ता है।
बैंकों के लिए RBI का एक्शन
CRR की न्यूनतम डेली मेंटेनेंस सीमा 90% से बढ़ाकर 99% कर दी गई है। हालांकि कुल कैश रिजर्व रेश्यो यानी CRR 3% पर ही कायम है। नया नियम 16 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। RBI ने 13 अक्टूबर को 25,000 करोड़ रुपए के OMO का भी एलान किया है। इन कदमों का लक्ष्य FCNR (B) की वजह से आई सरप्लस लिक्विडिटी को मैनेज करना है। बता दें कि 8 अक्टूबर तक 3.88 लाख करोड़ रुपए की सरप्लस लिक्विडिटी थी।
रुपये को संभालने के लिए RBI के कदम का किन पर होगा असर?
RBI ने रुपये को संभालने के लिए जो अहम कदम उठाए हैं उससे सट्टेबाजी वाली शॉर्ट सेलिंग और जरूरत से ज्यादा हेजिंग पर लगाम लगेगी। बैंकों को हेजिंग की 20% रकम फ्री कैश के तौर पर रखनी होगी। RBI के कदम से हेजिंग लागत 3.5% से बढ़कर 5.1% होगी। हेजिंग की ऊंची लागत से डॉलर की डिमांड घटेगी। RBI का मकसद FPIs और ECBs को नुकसान पहुंचाना नहीं है। हेजिंग नियम सिर्फ करेंट अकाउंट और इंपोर्ट्स के लिए हैं। इससे कैपिटल ट्रांजैक्शंस में कोई बदलाव नहीं होगा। FPIs की हेजिंग पर कोई असर नहीं होगा।
रुपये को संभालने के लिए RBI एक्शन के तहत कंपनियां एक ही कॉन्ट्रैक्ट को कैंसिल और दोबारा बुक नहीं कर सकतीं। इससे डॉलर की डिमांड में कमी आएगी। ट्रेडर्स के लिए इंपोर्ट डिमांड के बिना फॉरेक्स वायदा पोजिशन 50 लाख डॉलर की कैप होगी। OMCs स्पेशल विंडो के जरिये सीधे RBI से डॉलर खरीदेंगे। इससे बाजार में डॉलर की डिमांड में कमी आएगी। RBI के एक्शन से ट्रेडर्स लॉन्ग डॉलर पोजिशन घटाने पर मजबूर होंगे और रुपये में मजबूती आएगी। लेकिन इक्विटीज में FPI सेलिंग से रुपये पर दबाव बना रहेगा
RBI का बाजूका: क्या चलेगा रुपया?
सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का कहना है कि रुपया शायद एक बार फिर 95 की तरफ चले। लेकिन एक बार फिर ये रैली फेल होने का जोखिम है। RBI ने FCNR डिपॉजिट से 133 अरब डॉलर जुटाए थे। इतने बड़े FCNR डिपॉजिट के बाद 1 महीने में फिर रुपया गिरने लगा। दरअसल सिस्टम में डॉलर की भारी डिमांड जारी है। 1 महीने में फॉरेक्स रिजर्व 52 अरब डॉलर घटकर 734 अरब डॉलर पर आ गया है। ऐसे में RBI के उठाए कदम छोटी अवधि में रुपये में शॉर्ट कवरिंग ला सकते हैं। लेकिन फंडामेंटली, रुपया 100 रुपए प्रति डॉलर की तरफ बढ़ रहा है।
PL कैपिटल में हेड ऑफ़ कमोडिटीज़, आशीष राजोदिया का कहना है कि आज से आरबीआई इंडियन ऑयल, HPCL और BPCL को उनकी रोज़ाना की पूरी ज़रूरत के लिए डॉलर बेचेगा,जिससे स्पॉट मार्केट में डॉलर की मांग का एक बड़ा जरिया हट जाएगा।
सेंट्रल बैंक ने रुपया डेरिवेटिव्स के नियमों को भी कड़ा कर दिया है। ऐसा पिछले हफ़्ते रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करके उसे 5.50% करने के बाद किया गया है,जो लगभग चार साल में पहली बढ़ोतरी थी। जिन दबावों का सामना करना पड़ रहा है वे कई तरह के हैं।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने अब तक इक्विटी से लगभग ₹44,000 करोड़ निकाले हैं, जिससे इस साल कुल निकासी ₹3 लाख करोड़ से ज़्यादा हो गई है। ब्रेंट क्रूड अभी भी $100 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है और US ट्रेजरी यील्ड 5.2% से ऊपर होने के कारण डॉलर मज़बूत बना हुआ है।
इसमें एक समस्या लागत की है। तेल कंपनियों को डॉलर बेचने से रिज़र्व कम हो जाएगा,जो पहले ही 2 अक्टूबर तक के हफ़्ते में लगभग $13 बिलियन कम हो चुका था। चार्ट पर रुपी-डॉलर पेयर के लिए 94.90 और 94.10 पर सपोर्ट है और 97 पर रेजिस्टेंस है।
अगली परीक्षा भारत में सितंबर की खुदरा महंगाई के आंकड़ों की होगी जिसके लगभग 5.4% तक बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा बुधवार को US CPI के आंकड़े आने वाले हैं। इनमें से किसी के भी ज़्यादा रहने पर सख़्त पॉलिसी की बात फिर से उठ सकती है और रुपी-डॉलर पेयर वापस 97 की ओर जा सकता है, जबकि नरम डेटा और कच्चे तेल की कीमतों में कमी से रुपया 94.90 के सपोर्ट लेवल को टेस्ट कर सकता है।
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