मार्केट रेगुलेटर SEBI ने ऑनलाइन एग्रीकल्चर इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ग्रोपिटल (Growpital) के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। SEBI ने इसकी करीब 193 करोड़ की स्कीम को बंद करने का आदेश दिया है। ग्रोपिटल (Growpital) की खेती-बाड़ी वाली ज़मीन में निवेश की स्कीम को बंद करने का आदेश दिया गया है। सेबी का कहना है कि यह प्लेटफ़ॉर्म बिना मंजूरी के 'कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम'(CIS)चला रहा था और खेती-बाड़ी से पक्का और टैक्स-फ्री रिटर्न देने का वादा करके निवेशकों से 192.88 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस स्कीम के तहत 5,208 निवेशकों से ये 192.88 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं।
ग्रोपिटल ऑनलाइन एग्रीकल्चर इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म है। इसकी शुरुआत 2020 में हुई थी। इसमें स्कीम में 5,000 रुपए से निवेश शुरू हुआ था। निवेश से मिली रकम का इस्तेमाल कमर्शियल फार्मिंग में वर्किंग कैपिटल के तौर पर किया जा रहा था। निवेश से एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट्स की फंडिंग का दावा किया गया था। निवेशकों को यूनिट्स के बदले मुनाफे या रिटर्न का भरोसा दिया गया था। निवेशकों से अश्योर्ड और टैक्स फ्री रिटर्न्स का वादा किया गया था। SEBI ने इस स्कीम को अनधिकृत कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम माना है और ग्रोपिटल को कारोबार/स्कीम बंद करने का आदेश दिया है।
इसके अलावा निवेशकों को 12% ब्याज समेत रकम वापस करने का भी आदेश दिया गया है। मामले से जुड़ी एंटिटी पर पेनल्टी लगाते हुए 28 संस्थाओं पर 26.1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है। रितुराज शर्मा समेत 8 लोगों पर 5 साल का मार्केट बैन भी लगा दिया गया है। 20 अन्य लोगों और संस्थाओं पर 3 साल का बैन लगाया गया है। SEBI ने रिफंड प्रक्रिया की देखरेख के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया है।
कल जारी अपने अंतिम आदेश में SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने सभी 28 नोटिस पाने वालों को SEBI एक्ट और नियमों के उल्लंघन का दोषी ठहराया है। आठ मुख्य नोटिस पाने वालों (ऋतुराज शर्मा, कृष्णा जोशी, गायत्री रिनवा, योटा एग्रो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड, फार्म साइलो टेक LLP और ZF प्रोजेक्ट 1, 2 और 3 LLP) को अनधिकृत CIS के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया है और उन्हें निवेशकों का पैसा 12 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने के लिए संयुक्त रूप से और अलग-अलग तौर पर उत्तरदायी माना गया है।
बाकी नोटिस पाने वालों को इस स्कीम में मदद और बढ़ावा देने का दोषी पाया गया। रेगुलेटर ने आठ मुख्य नोटिस पाने वालों को पांच साल के लिए या रिफंड पूरा होने तक (जो भी बाद में हो) सिक्योरिटीज़ मार्केट से रोक दिया है। बीस अन्य संस्थाओं और व्यक्तियों को तीन साल के लिए रोक दिया गया है।
SEBI की जांच में पाया गया है कि फार्म साइलो टेक LLP'(जो ग्रोपिटल चलाती थी) और 'ZF प्रोजेक्ट 1, 2 और 3 LLP'ने 5,208 अलग-अलग निवेशकों से 192.88 करोड़ रुपये जुटाए थे। निवेशकों को LLP पार्टनर के तौर पर शामिल किया गया था,लेकिन ज़मीन के असली एग्रीमेंट योटा एग्रो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (Yotta Agro Ventures Pvt Ltd) या उसकी सब्सिडियरी कंपनी के नाम पर थे। SEBI ने पाया कि इस वजह से ज़मीन पर निवेशकों का मालिकाना हक या कंट्रोल नहीं था।
रितुराज शर्मा योटा एग्रो के डायरेक्टर और फार्म साइलो टेक के डेज़िग्नेटेड पार्टनर हैं, जबकि कृष्णा जोशी योटा एग्रो के डायरेक्टर हैं। गायत्री रिन्वा फार्म साइलो टेक की डेज़िग्नेटेड पार्टनर हैं।
SEBI ने यह भी पाया कि बिना किसी असल बिज़नेस के 'फार्म साइलो टेक' से 'योटा' को लगभग 95.60 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए, जबकि 'योटा' के नाम पर 'ग्रोबानाना' को खरीदने के लिए 8.53 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया गया।