SIP संभाल सकता है FIIs की बिकवाली? विदेशी निवेशकों की 11% निकासी सिर्फ एक महीने सितंबर में

Market Outlook: यह सितंबर मार्केट के लिए खूनी साबित हुई और इस महीने FIIs ने 9 महीने में जितने शेयर बेचे, उसमें से करीब 11% तो इसी महीने बेचे। SIP के जरिए DIIs ने मार्केट को ढहने से काफी हद तक बचाने की कोशिश की। जानिए निफ्टी के लिए सितंबर कैसी रही और क्या एसआईपी इतनी पावरफुल है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली को संभाल सके

अपडेटेड Oct 02, 2026 पर 4:39 PM
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इस साल 2026 की पहली तिमाही में तेज गिरावट के बाद Nifty ने जून तिमाही में शानदार वापसी की थी और जुलाई में भी करीब 2% मजबूत हुआ था। हालांकि फिर सितंबर में यह तेजी काफी हद तक खत्म हो गई।

FIIs Selling: पिछले महीने सितंबर में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने धड़ाधड़ शेयर बेचे। उन्होंने ₹44,013 करोड़ के शेयरों की नेट बिक्री की। इस साल नौ महीने में विदेशी निवेशकों ने ₹4.03 लाख करोड़ की नेट निकासी की, जिसमें से करीब 11% तो सिर्फ सितंबर में ही निकाले। हालांकि इसमें भी खास बात ये रही कि सितंबर महीने में विदेशी निवेशकों ने जो शेयर बेचे, उसमें से ₹29,175 करोड़ यानी करीब दो-तिहाई बिकवाली महीने के आखिरी चार कारोबारी दिनों में बेचे। अकेले सिर्फ 30 सितंबर को ही विदेशी निवेशकों ने ₹10,148 करोड़ की नेट बिक्री की जोकि 23 मार्च के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी बिकवाली की। 23 मार्च को FIIs ने करीब ₹10,414 करोड़ के नेट शेयर बेचे थे। महीने के आखिरी में तेज बिकवाली ने साल के मध्य में बाजार में बनी सुधार की उम्मीदों को काफी हद तक खत्म कर दिया।

FIIs नें 21 में 16 दिन खरीदारी से अधिक की बिकवाली

सितंबर महीने में मार्केट पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी निवेशकों ने बनाया, जिन्होंने 21 कारोबारी दिनों में 16 दिन खरीदारी से अधिक बिकवाली की। महीने के आखिरी दिनों में इसकी रफ्तार तेज हो गई। विदेशी निवेशकों ने 25 सितंबर को ₹3,694 करोड़, 28 सितंबर को ₹5,353 करोड़, 29 सितंबर को ₹9,980 करोड़ और 30 सितंबर को ₹10,148 करोड़ की नेट बिक्री की।


DIIs ने की संभालने की कोशिश

विदेशी निवेशकों ने एक तरफ धड़ाधड़ बिकवाली से मार्केट पर दबाव बनाया तो दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी के जरिए इसे संभालने की कोशिश की। डीआईआई ने सितंबर में ₹76,030 करोड़ की नेट खरीदारी की। इसी के दम पर सितंबर में कुल संस्थागत निवेश पॉजिटिव रहा। 30 सितंबर को ही DII ने ₹11,272 करोड़ के शेयर खरीदे, जबकि FII ने ₹10,148 करोड़ की बिकवाली की।

FIIs

Nifty पर भी पड़ा असर

इस साल 2026 की पहली तिमाही में तेज गिरावट के बाद निफ्टी ने जून तिमाही में शानदार वापसी की थी और जुलाई में भी करीब 2% मजबूत हुआ था। हालांकि फिर सितंबर में यह तेजी काफी हद तक खत्म हो गई। सितंबर में 6.1% कमजोर होकर निफ्टी 22,620.45 पर बंद हुआ। यह 2018 के बाद निफ्टी के लिए सबसे कमजोर सितंबर रहा। इसके चलते निफ्टी इस साल 9 महीने के आखिरी तक करीब 13% फिसल गया अगर यही स्थिति बनी रही तो यह 2011 के बाद इसका सबसे खराब सालाना प्रदर्शन हो सकता है। वहीं सेंसेक्स साल की शुरुआत से करीब 15% नीचे है।

Nifty

मार्केट पर दबाव की वजह और किस बात से सपोर्ट?

सितंबर में कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और लगातार विदेशी बिकवाली ने मार्केट पर दबाव बनाया।

चॉइस वेल्थ में रिसर्च और प्रोडक्ट के हेड अक्षत गर्ग का कहना है कि विदेशी निवेशकों ने कैश मार्केट में बिकवाली के साथ-साथ सितंबर सीरीज के दौरान इंडेक्स फ्यूचर्स में लगभग 14,500 करोड़ रुपये की बिकवाली भी की। अक्षत के मुताबिक अगस्त में SIP में रिकॉर्ड ₹32,297 करोड़ के निवेश और SIP खातों की संख्या 10 करोड़ के पार पहुंचना स्ट्रक्चरल शिफ्ट यानी एक बड़े बदलाव का सबूत बताया। उनका कहना है कि एसआईपी के जरिए डीआईआई के निवेश ने मार्केट को संभाल लिया और यह ऐसा निवेश है, जो हर महीने आता रहता है और एफआईआई की बिकवाली को सोख लेता है।

वॉटरफील्ड एडवाइजर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और इक्विटी हेड विपुल भोवर का कहना कि घरेलू रिटेल SIP से मार्केट में हर महीने लगभग $300-$350 करोड़ का निवेश आ रहा है। इससे बाजार को अच्छा-खासा सहारा मिलता है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अकेले इसी से वैल्यूएशन के अंतर को पूरी तरह नहीं भरा जा सकता और न ही विदेशी निवेशकों की अचानक बिकवाली या ग्लोबल झटकों को पूरी तरह संभाला जा सकता है। उनका कहना है कि साल 2024 के आखिरी से बाजार में आई गिरावट से मार्केट में स्पेक्यूलेशन कम हुआ है और वैल्यूएशन भी नीचे आया है, जिससे फंडामेंटल रूप से निवेश के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि कच्चे तेल के प्रति बैरल $100 के पार जाने पर मार्केट में और गिरावट का खतरा भी बना हुआ है।

22,700 के आस-पास के मौजूदा लेवल पर निफ्टी अपने ट्रेलिंग अर्निंग्स के लगभग 19.2 गुना पर है। चॉइस (Choice) का अनुमान है कि अगर कमाई और फेस्टिव डिमांड में सुधार होता है, तो नवंबर-दिसंबर में रिकवरी की गुंजाइश बन सकती है लेकिन अगर स्थिति बिगड़ी तो भी गिरावट 21,800 के आस-पास सीमित रहने की उम्मीद है।

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