Stock Market Crash: निफ्टी में 25 साल की सबसे लंबी गिरावट, ये 7 बड़े कारण क्रैश के जिम्मेदार

Stock Market Crash: शेयर बाजार लगातार आठवें हफ्ते गिरा है और Nifty की गिरावट 25 साल की सबसे लंबी हो गई। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस हफ्ते करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया। जानिए बाजार गिरने के 7 बड़े कारण।

अपडेटेड Oct 01, 2026 पर 5:09 PM
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ऑटो शेयरों में गुरुवार को भी बिकवाली रही। निफ्टी ऑटो इंडेक्स इस हफ्ते 3% से ज्यादा गिरा।

Stock Market Crash: शेयर बाजार में गुरुवार को भी गिरावट रही। निफ्टी 199 अंक गिरकर 22,422 पर आ गया। सेंसेक्स भी 571 अंक टूटकर 71,910 पर बंद हुआ। इस हफ्ते हर एक दिन बाजार गिरा और निफ्टी करीब 3% टूट गया। यह छह महीने में निफ्टी का सबसे खराब हफ्ता रहा। साथ ही निफ्टी लगातार आठवें हफ्ते गिरा है। 25 साल में यह उसकी सबसे लंबी गिरावट की लकीर है।

IT को छोड़कर बाकी सभी सेक्टरों में गिरावट रही। हेल्थकेयर और ऑटो शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखा। BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस हफ्ते करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया। यह हफ्ता खत्म हो चुका है क्योंकि अब शुक्रवार 2 अक्टूबर को गांधी जयंती की वजह से बाजार बंद रहेगा।

आइए जानते हैं कि स्टॉक मार्केट में तबाही के पीछे 7 बड़े कारण क्या हैं। साथ ही, एक्सपर्ट से जानिए कि अब निवेशकों को क्या करना चाहिए।


1. ऑटो शेयरों में दबाव

ऑटो शेयरों में गुरुवार को भी बिकवाली रही। निफ्टी ऑटो इंडेक्स इस हफ्ते 3% से ज्यादा गिरा। Bajaj Auto का शेयर अकेले गुरुवार को 8% टूट गया। कंपनी की मासिक बिक्री उम्मीद से कम रही। Maruti Suzuki का शेयर भी 5% गिरा। निफ्टी ऑटो इंडेक्स 4% से ज्यादा गिरा।

2. बैंकिंग स्टॉक्स में कमजोरी

बैंक शेयरों ने गुरुवार को बाकी बाजार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। फिर भी निफ्टी बैंक 182 अंक गिरकर 54,451 पर बंद हुआ। Nifty Bank इस हफ्ते करीब 2% गिरा। HDFC Bank ने इंडेक्स को कुछ सहारा दिया। हालांकि पूरे फाइनेंस सेक्टर पर दबाव बना रहा।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है। 30 सितंबर को फॉरेन पोर्टफोलियो Foreign Portfolio Investors यानी FPI ने भारतीय शेयरों में करीब ₹10,148 करोड़ की बिकवाली की। करीब छह महीने में यह एक दिन में उनकी सबसे बड़ी बिकवाली रही। सितंबर में विदेशी निवेशकों की कुल बिकवाली करीब ₹51,999 करोड़ पहुंच गई।

4. US बॉन्ड यील्ड से बढ़ी चिंता

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी बाजार पर दबाव है। Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक पिछले दो कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हुई है। उन्होंने बताया कि US 10-year बॉन्ड यील्ड 5.3% तक पहुंच गई है। इससे विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सतर्क रह सकते हैं।

5. कच्चे तेल की कीमत

कच्चे तेल की कीमत भी बाजार के लिए अहम है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स करीब 98 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। हालांकि एशियाई कारोबार में Brent करीब 1.5% ऊपर भी रहा। यानी तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। भारत के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता बढ़ाता है। इससे देश का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है। साथ ही महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर भी दबाव आ सकता है।

6. India VIX में तेज उछाल

India VIX 12% से ज्यादा उछलकर 15.12 पर पहुंच गया। India VIX शेयर बाजार में घबराहट और उतार-चढ़ाव का संकेत देता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब India VIX में गिरावट नहीं आती, बाजार में स्थिरता आनी मुश्किल है।

7. रुपया 96 के पार

डॉलर के मुकाबले रुपया गुरुवार को फिर 96 के स्तर के पार चला गया। रुपया 48 पैसे कमजोर हुआ। दो महीने में यह एक दिन की उसकी सबसे बड़ी गिरावट रही। इसने भी स्टॉक पर दबाव बढ़ाया।

बाजार में गिरावट पर एक्सपर्ट की राय

Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक बाजार में हालिया गिरावट की बड़ी वजह बाहरी कारण हैं। बॉन्ड यील्ड कई साल के ऊंचे स्तर पर है और कच्चा तेल भी महंगा बना हुआ है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ी है।

घरेलू स्तर पर भी निवेशक सतर्क हैं। अगले हफ्ते RBI की पॉलिसी और दूसरी तिमाही के नतीजों से पहले बाजार में सावधानी है। नायर के मुताबिक Q2 के नतीजे Q1 के मुकाबले कमजोर रह सकते हैं, क्योंकि Q1 में ऑपरेटिंग कॉस्ट के असर में देरी का फायदा मिला था।

निवेशकों को क्या करना चाहिए

नायर का कहना है कि वैश्विक महंगाई का दबाव और रुपये को सपोर्ट देने की जरूरत RBI के अगले फैसले में अहम हो सकती है। हालांकि, उनका मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है और इन चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है।

नायर के मुताबिक, लंबी अवधि के निवेशक बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं। वहीं, छोटी अवधि के निवेशकों फिलहाल इंतजार करना चाहिए।

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