शेयर बाजार में आ सकती है 50% तक तेजी, प्रशांत जैन ने कहा-अगले कुछ हफ्तों में निवेश के बड़े मौके

प्रशांत जैन (Prashant Jain) को इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल में भारतीय शेयर बाजारों का रिटर्न 40-50 फीसदी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में हल्की गिरावट के आसार दिख रहे हैं

अपडेटेड Oct 09, 2026 पर 11:38 AM
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भारतीय शेयर बाजारों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा है। इनमें जियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिकी टैरिफ, गोल्ड के आयात में उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी शामिल हैं।

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का दौर खत्म होने जा रहा है। यह उन इनवेस्टर्स के लिए शेयरों में निवेश का सही वक्त है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं। दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने यह कहा है। उन्होंने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सितंबर तिमाही के लेटर में कई महत्वपूर्ण बताई है।

दिसंबर मध्य तक FIIs की बिकवाली सुस्त पड़ जाएगी

प्रशांत जैन (Prashant Jain) को इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल में भारतीय शेयर बाजारों का रिटर्न 40-50 फीसदी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में हल्की गिरावट के आसार दिख रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाजार में बिकवाली के बारे में उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य तक इसमें कमी आ सकती है।


अगले कुछ हफ्तों में शेयर बाजारों में एंट्री का गोल्डन मौका

उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य के बाद मार्केट्स में रिकवरी शुरू होगी। इसलिए अगले कुछ हफ्ते या महीने शेयर बाजारों में एंट्री का शानदार मौका हो सकता है। पिछले करीब दो सालों से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दिखी है। सितंबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच Nifty 12.4 फीसदी गिरा है। इस दौरान विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने 58 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। हालांकि, FY25 और FY26 में इकोनॉमी की ग्रोथ करीब 7.5 फीसदी रही।

इन वजहों से भारतीय बाजार का प्रदर्शन रहा खराब

भारतीय शेयर बाजारों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा है। इनमें जियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिकी टैरिफ, गोल्ड के आयात में उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी शामिल हैं। साथ ही फॉरेन इनवेस्टर्स की दिलचस्पी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों से जुड़ी स्टॉक्स में बढ़ी है। इससे विदेशी निवेश उन बाजारों में गया है, जिनमें ऐसी कंपनियां मौजूद हैं।

विदेशी निवेशकों ने AI स्टॉक्स में पैसे लगाने में दिखाई दिलचस्पी

AI और सेमीकंडक्टर सुपरसाइकिल में भारत की मौजूदगी ना के बराबर है। इसलिए विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसा निकाल एआई और सेमीकंडक्टर्स वाले बाजारों में लगाए हैं। इस वजह से अमेरिका और कई उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। भारतीय शेयर बाजारों में हालिया बिकवाली की वजह अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड है। यह 5 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इससे अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश का आकर्षण बढ़ा है।

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हर दो साल गिरने के बाद शेयर बाजारों में आती है बड़ी तेजी

3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि हर दो सालों में 15 फीसदी गिरावट के बाद के अगले तीन सालों में शेयर बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। इस दौरान बाजार ने कम से कम 20 फीसदी रिटर्न दिए हैं। कई शेयरों का रिटर्न तो 50 फीसदी या इससे ज्यादा रहा है। हालांकि, यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे भी ऐसा होगा। यह सिर्फ एक ट्रेंड है।

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