टाटा की कंपनी का AI सुपर हाईवे! ₹4283 करोड़ के निवेश से डेटा सेंटर और AI हब को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ने का प्लान

टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Communications भारत में AI Super Highway बनाने के लिए 4,283 करोड़ रुपये तक खर्च करने की तैयारी में है। 10,000 किलोमीटर का यह नेटवर्क किन शहरों को जोड़ेगा? कंपनी की कमाई और बाजार हिस्सेदारी का पूरा प्लान क्या है? जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Oct 26, 2026 पर 4:16 PM
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टाटा कम्युनिकेशंस का शेयर सोमवार को 1.56% की तेजी के साथ 1680 रुपये पर बंद हुआ।

टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा कम्युनिकेशंस (Tata Communications) अगले 3 से 5 साल में भारी निवेश की योजना बना रही है। इस दौरान कंपनी 450 मिलियन डॉलर (करीब 4,283 करोड़ रुपये) तक खर्च कर सकती है। टाटा की ये कंपनी भारत में AI Super Highway बनाएगी। इसका मकसद देश के प्रमुख डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हब को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ना है।

कंपनी के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और नेटवर्क सर्विसेज के ग्लोबल बिजनेस हेड रूपेश चोकशी ने Moneycontrol को बताया कि कंपनी करीब 10,000 किलोमीटर लंबा फाइबर नेटवर्क बनाएगी। डेटा सेंटरों के बीच कनेक्टिविटी के बाजार में कंपनी की 30-40% हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य है। हालांकि, इस नेटवर्क के लिए अभी किसी ग्राहक के साथ कॉन्ट्रैक्ट का ऐलान नहीं हुआ है।

पहले मुंबई से चेन्नई तक बनेगा नेटवर्क


AI Super Highway का पहला चरण मुंबई, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई को जोड़ेगा। ये शहर बड़े डेटा सेंटर और हाइपरस्केल इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख केंद्र हैं।

दूसरे चरण में चेन्नई, हैदराबाद और विशाखापत्तनम के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी। तीसरे चरण में नेटवर्क का विस्तार भुवनेश्वर और गुजरात तक होगा। इसमें GIFT City और जामनगर भी शामिल हैं।

करीब 10,000 किलोमीटर का यह नेटवर्क 7.2 पेटाबाइट क्षमता उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया गया है। इससे AI से जुड़े भारी डेटा को तेजी से एक जगह से दूसरी जगह भेजने में मदद मिलेगी।

1 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकता है बाजार

Tata Communications का अनुमान है कि भारत में डेटा सेंटरों के बीच कनेक्टिविटी का बाजार मध्यम अवधि में 1 अरब डॉलर से बड़ा हो सकता है। AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से इसकी मांग बढ़ रही है।

कंपनी के मुताबिक, इस तरह के निवेश पर 15-20% रिटर्न का बेंचमार्क रहता है। ऐसे नेटवर्क लंबे समय तक काम करते हैं। वहीं, ग्राहकों के साथ 5 से 10 साल के कॉन्ट्रैक्ट हो सकते हैं।

AI की बढ़ती मांग से नेटवर्क पर दबाव

AI मॉडल की ट्रेनिंग और इस्तेमाल के लिए डेटा सेंटरों के बीच बड़ी मात्रा में डेटा भेजना पड़ता है। इसके लिए सामान्य 10 और 100 गीगाबिट कनेक्शन से आगे 400 गीगाबिट, 800 गीगाबिट और टेराबिट स्तर की क्षमता की मांग बढ़ रही है।

रूपेश चोकशी के मुताबिक, मुंबई से चेन्नई तक डेटा का राउंड ट्रिप 15-16 मिलीसेकंड में पूरा हो सकता है। कंपनी का नेटवर्क हाइपरस्केल कंपनियों, क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स, टेक कंपनियों और AI लैब्स को सेवा देगा।

समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबल में भी निवेश 

टाटा कम्युनिकेशंस समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबल में भी निवेश कर रही है। इसमें मुंबई-सिंगापुर और चेन्नई-सिंगापुर को जोड़ने वाले प्रस्तावित केबल सिस्टम शामिल हैं। ये नेटवर्क भारत के डेटा सेंटरों को विदेशी AI हब से जोड़ने में मदद करेंगे।

Tata Communications के पास पहले से 5 लाख किलोमीटर से ज्यादा सबसी ऑप्टिकल फाइबर और 2 लाख किलोमीटर से अधिक टेरेस्ट्रियल फाइबर नेटवर्क है। कंपनी इसी नेटवर्क के दम पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार बढ़ाना चाहती है।

टाटा कम्युनिकेशंस का शेयर सोमवार को 1.56% की तेजी के साथ 1680 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 13.45% गिरा है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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