SBI रिसर्च ने दिसंबर में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के अपने अनुमान को बरकरार रखा है। महंगाई का दबाव,कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का सख्त मौद्रिक नीति की ओर झुकाव जैसे कारण दरों में बढ़ोतरी की वजह बन सकते हैं। आरबीआई ने भी निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना से इनकार कर दिया है। अक्टूबर की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के विवरण का विश्लेषण करने वाली अपनी रिपोर्ट में SBI रिसर्च ने कहा है कि गवर्नर के बयानों से भविष्य के जोखिमों और नीति को और सख्त किए जाने की संभावना पर अधिक जोर दिए जाने के संकेत मिल रहे हैं।
SBI रिसर्च की रिपोर्ट में कहा गया है,"हम दिसंबर में दरों में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़त का अपना अनुमान बरकरार रखे हुए हैं। यह बढ़त या तो सीधे तौर पर रेपो रेट में 50 bps की बढ़ोतरी के जरिए हो सकती है,या फिर एक अलग तरीके से जिसमें रेपो रेट में 25 bps की बढ़ोतरी के साथ ही LAF कॉरिडोर का दायरा 25 bps तक बढ़ाये जाने का तरीका अपनाया जा सकता है।"
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अक्टूबर की MPC बैठक के मिनट्स में संकेत दिया था कि भविष्य के फैसलों में या तो दरों में बढ़ोतरी होगी या फिर उन्हें यथावत रखा जाएगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि महंगाई और आर्थिक विकास की स्थिति कैसी रहती है। MPC ने इस महीने की शुरुआत में सर्वसम्मति से रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया था और अपने रुख को बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (सोच-समझकर सख्ती बढ़ाने) का कर दिया था।
मल्होत्रा ने कहा कि ब्याज दरें बढ़ाने के इस दौर की अवधि और इसका दायरा,महंगाई,कीमतों के दबाव,सप्लाई शॉक के असर और मांग की स्थितियों पर निर्भर करेगा। इन हालात को देखते हुए,रिपोर्ट में दिसंबर की पॉलिसी के लिए दो विकल्प बताए गए हैं। RBI या तो रेपो रेट को 50 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर सकता है, या फिर इसे 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.75 प्रतिशत कर सकता है और साथ ही लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) कॉरिडोर को असिमेट्रिक तरीके से बढ़ा सकता है।
दूसरे विकल्प के तहत,मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) दर बढ़कर 6.25 प्रतिशत हो जाएगी,जबकि स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.50 प्रतिशत पर बनी रहेगी। SBI रिसर्च का कहना है कि इस कदम से ग्लोबल अनिश्चितता के बीच बाजार के कामकाज को सुचारू बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
महंगाई अभी भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। SBI रिसर्च का कहना है कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में 75 प्रतिशत का योगदान देने वाली वस्तुओं की संख्या अगस्त में 25 थी,जो सितंबर में बढ़कर 31 हो गई। इससे पता चलता है कि कीमतों का दबाव अब और अधिक वस्तुओं तक फैल गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर में महंगाई दर 6.5 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। इसमें यह भी अनुमान लगाया गया है कि 15 दिनों की अवधि के दौरान ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 110 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रह सकती है, जिससे महंगाई का जोखिम और बढ़ सकता है।
RBI की अक्टूबर की MPC बैठक के मिनट्स में अनुमान लगाया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में खुदरा महंगाई दर 6 प्रतिशत रहेगी, जो चौथी तिमाही में घटकर 5.7 प्रतिशत पर आ जाएगी। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 प्रतिशत रखा है। RBI की अगली MPC बैठक 2-4 दिसंबर को होनी है, जिसमें महंगाई और आर्थिक विकास की स्थितियों की फिर से समीक्षा की जाएगी।
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