Gold Silver Price: विदेश में सोना $4300 के नीचे फिसला, चांदी 2.5% टूटी, भारत में कैसी होगी चाल और अब क्या करें निवेशक
Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में COMEX सोना 1.57% गिरकर $4,253.40 प्रति औंस पर आ गया, जबकि COMEX चांदी 2.76% गिरकर $63.01 प्रति औंस पर आ गई।यह गिरावट पिछले हफ़्ते दोनों कीमती धातुओं में हुई गिरावट के बाद आई है
Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोमवार (28 सितंबर) को सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।
Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोमवार (28 सितंबर) को सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। तेल की बढ़ती कीमतें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और ज़्यादा बॉन्ड यील्ड ने बिना ब्याज वाले एसेट्स (जैसे सोना और चांदी) की मांग को प्रभावित किया।मार्केट डेटा के अनुसार, इंटरनेशनल मार्केट में COMEX सोना 1.57% गिरकर $4,253.40 प्रति औंस पर आ गया, जबकि COMEX चांदी 2.76% गिरकर $63.01 प्रति औंस पर आ गई।यह गिरावट पिछले हफ़्ते दोनों कीमती धातुओं में हुई गिरावट के बाद आई है।
पिछले हफ़्ते दिसंबर डिलीवरी के लिए COMEX गोल्ड फ़्यूचर्स $103.70 यानी 2.34% गिरकर $4,321.20 प्रति औंस पर बंद हुआ, जबकि चांदी $2.35 यानी 3.5% गिरकर $64.80 प्रति औंस पर आ गई।
भारत में कैसी है चाल
घरेलू बाज़ार में, अक्टूबर डिलीवरी के लिए MCX गोल्ड फ़्यूचर्स पिछले हफ़्ते लगभग 2.3% गिरकर ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बंद हुआ। सिल्वर फ़्यूचर्स 3% गिरकर ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गए।
कीमतों में दबाव क्यों?
कीमतों में दबाव का एक मुख्य कारण अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों में बदलाव है। बाजार अक्टूबर में फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की संभावना मानकर चल रहे हैं। ज़्यादा ब्याज दरों और बॉन्ड यील्ड से सोना और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स कम आकर्षक हो जाते हैं।
अमेरिकी ट्रेज़री यील्ड भी बढ़ी है, जिसमें 30-साल की यील्ड 2004 के बाद के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई है। लंबी अवधि की यील्ड में बढ़ोतरी ने बुलियन की कीमतों पर दबाव डाला है।
2) अमेरिकी डॉलर भी एक और अहम कारक है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर लगभग 101.39 पर पहुंच गया है, जो दो महीनों में इसका उच्चतम स्तर है। मज़बूत डॉलर सोने सहित डॉलर में कीमत तय होने वाली कमोडिटीज़ की मांग पर दबाव डाल सकता है।
LKP सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च एनालिस्ट, VP जतिन त्रिवेदी ने कहा, "पिछले हफ़्ते सोने की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव रहा। यह ₹1.5-1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करता रहा और 2% से ज़्यादा की गिरावट के साथ बंद हुआ। ऊंचे स्तरों से प्रॉफिट बुकिंग जारी रही क्योंकि बाजार ने अक्टूबर में फेड द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की संभावना को ध्यान में रखा।"
उन्होंने आगे कहा कि डॉलर इंडेक्स का 101 से ऊपर लगातार बने रहना सोने पर दबाव बढ़ा सकता है।
जियोपॉलिटिकल टेंशन का कीमतों पर क्या होगा असर
जियोपॉलिटिकल टेंशन एक अहम कारक बने हुए हैं, लेकिन सोने पर इनके असर को अभी ऊंची यील्ड और डॉलर से पड़ने वाले दबाव के मुकाबले देखा जा रहा है।
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास की घटनाओं ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है। सोमवार (28 सितंबर) को ब्रेंट क्रूड 1.6% बढ़कर $106 प्रति बैरल हो गया, जबकि US क्रूड फ्यूचर्स 1.1% बढ़कर $93.47 प्रति बैरल हो गया।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई की चिंताएं बढ़ा सकती हैं। इससे ब्याज दरों की चाल को लेकर उम्मीदें प्रभावित हो सकती हैं और बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रह सकती है, जिससे बुलियन के लिए और मुश्किलें पैदा हो सकती हैं।
साथ ही, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता सोने की 'सेफ-हेवन' (सुरक्षित निवेश) मांग को सहारा दे सकती है। इसका मतलब है कि बुलियन की कीमतें भू-राजनीतिक और ब्याज दर, दोनों क्षेत्रों की घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनी रह सकती हैं।
अब क्या करें निवेशक
US का आर्थिक डेटा कैलेंडर भरा हुआ है। इस हफ़्ते कंज्यूमर कॉन्फिडेंस, GDP, PCE महंगाई, मैन्युफैक्चरिंग डेटा और सितंबर की नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट आने वाली है। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों पर भी करीबी नज़र रखी जाएगी।
US जॉब्स रिपोर्ट ब्याज दरों की उम्मीदों के लिए खास तौर पर अहम होगी। उम्मीद से मजबूत लेबर मार्केट डेटा सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों को मजबूत कर सकता है, जिससे सोने पर और दबाव पड़ सकता है। कमज़ोर डेटा का उल्टा असर हो सकता है, जिससे और ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कम हो सकती हैं।
त्रिवेदी ने कहा, "बाजार का नजरिया सतर्क बना हुआ है और उतार-चढ़ाव के ऊंचे बने रहने की संभावना है क्योंकि बाज़ार की नज़रें आने वाले US नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़ों पर होंगी। ये आंकड़े फेडरल रिजर्व के अक्टूबर के पॉलिसी फैसले को लेकर उम्मीदें तय करने में अहम होंगे।"
JM फाइनेंशियल सर्विसेज में EBG - कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर ने कहा कि पिछले हफ़्ते गोल्ड फ़्यूचर्स पर बिकवाली का दबाव बना रहा, जबकि इंडस्ट्रियल मेटल्स में कंसोलिडेशन और करेक्शन के बीच सिल्वर की कीमतें भी गिरकर बंद हुईं।
भारत में कैसी होगी चाल
भारतीय निवेशकों के लिए रुपये में होने वाले उतार-चढ़ाव भी अहम रहेंगे क्योंकि इंटरनेशनल बुलियन की कीमतें डॉलर में तय होती हैं। जब इंटरनेशनल गोल्ड की कीमतों में गिरावट को घरेलू कीमतों में बदला जाता है, तो रुपया कमजोर होने पर इस गिरावट का असर कुछ हद तक कम हो सकता है, जबकि रुपया मजबूत होने पर इसका उल्टा असर हो सकता है।
US डेटा, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों, डॉलर, कच्चे तेल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों पर नजर रहने के कारण, इस हफ़्ते गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
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