इक्विटी, डेट और गोल्ड? ₹1 करोड़ का पोर्टफोलियो कैसे बनाए, एक्सपर्ट से समझें स्ट्रेटेजी
Portfolio Allocation Strategy: 1 करोड़ रुपये का फंड होने पर केवल रिटर्न नहीं, बल्कि मार्केट का जोखिम संभालना जरूरी हो जाता है। एक्सपर्ट प्रशस्त सेठ के मुताबिक, सुरक्षित और बंपर ग्रोथ के लिए कुछ पैसा इक्विटी, कुछ डेट और गोल्ड में डायवर्सिफाई करना चाहिए। जानिए अपनी उम्र और गोल के हिसाब से पोर्टफोलियो रीबैलेंस करने की पूरी रणनीति
मौजूदा बाजार की चाल को देखते हुए इक्विटी, डेट और गोल्ड में कितना पैसा लगाना चाहिए? जानें
Asset Allocation Strategy: जब आपका निवेश का दायरा या कॉर्पस ₹1 करोड़ जैसे बड़े आंकड़े पर पहुंच जाता है, तब केवल 'ज्यादा रिटर्न' का पीछा करना काफी नहीं होता। बाजार के उतार-चढ़ाव, आपकी जोखिम लेने की क्षमता और पैसों की जरूरत की टाइमलाइन सबसे बड़े कारक बन जाते हैं।
ऐसे में मौजूदा बाजार की चाल को देखते हुए इक्विटी, डेट और गोल्ड में कितना पैसा लगाना चाहिए? प्रूडेंट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के सीईओ प्रशस्त सेठ के अनुसार, एक बैलेंस पोर्टफोलियो के लिए आदर्श रणनीति क्या होनी चाहिए, आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं।
₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो का आइडियल बंटवारा
प्रशस्त सेठ का मानना है कि निवेशक अपने रिस्क प्रोफाइल और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर अपने पोर्टफोलियो को तीन हिस्सों में बांट सकते हैं:
1. एसेट क्लास: इक्विटी
हिस्सा (%): 65% – 75%
₹1 करोड़ पर निवेश: ₹65 लाख – ₹75 लाख
मुख्य भूमिका: लंबी अवधि में कैपिटल ग्रोथ
2. एसेट क्लास: डेट
हिस्सा (%): 15% – 25%
₹1 करोड़ पर निवेश: ₹15 लाख – ₹25 लाख
मुख्य भूमिका: पोर्टफोलियो में स्थिरता व लिक्विडिटी
3. एसेट क्लास: गोल्ड
हिस्सा (%): 5% – 10%
₹1 करोड़ पर निवेश: ₹5 लाख – ₹10 लाख
मुख्य भूमिका: रिस्क घटाने के लिए डायवर्सिफिकेशन
क्या इक्विटी में 70% पैसा लगाना सही है?
लंबी अवधि में वेल्थ क्रिएशन के लिए इक्विटी सबसे बड़ा जरिया है, इसलिए यह पोर्टफोलियो का सबसे बड़ा हिस्सा बना रहेगा। लेकिन बाजार में तेजी देखकर अंधाधुंध पैसा लगाना सही नहीं है। निवेश करते समय कंपनी की ग्रोथ क्षमता (15–20% लॉन्ग टर्म ग्रोथ) और शेयर के सही भाव यानी वैल्यूएशन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।
₹70 लाख के इक्विटी फंड में से 60–70% हिस्सा (लगभग ₹42 से ₹49 लाख) मजबूत लार्ज-कैप कंपनियों में होना चाहिए। बाकी हिस्सा मिड और स्मॉल-कैप में उनके वैल्यूएशन के हिसाब से बांटा जा सकता है। वैसे 70% इक्विटी में होने का मतलब यह नहीं है कि आप जोखिम भरी छोटी कंपनियों में दांव लगा रहे हैं, बल्कि बड़ा हिस्सा स्थापित कंपनियों में सुरक्षित रहता है।
डेट क्यों जरूरी है?
डेट को आमतौर पर कम रिटर्न वाला विकल्प माना जाता है, लेकिन इसका रोल केवल रिटर्न देना नहीं है। यह बाजार के झटकों से बचाव करता है। जब शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तो डेट पोर्टफोलियो को संभालता है।
अगर आपको अगले 1–3 सालों में किसी बड़े काम के लिए पैसे चाहिए, तो उस रकम को शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव में नहीं डाला जा सकता। ऐसे में ₹15 से ₹25 लाख का डेट बकेट लिक्विडिटी और सुरक्षा दोनों देता है।
गोल्ड: रिटर्न के पीछे भागने के लिए नहीं, सेफ्टी के लिए
सोने ने हाल के दिनों में शानदार रिटर्न दिया है, लेकिन केवल हालिया प्रदर्शन देखकर गोल्ड आवंटन नहीं बढ़ाना चाहिए। सोना और शेयर बाजार अक्सर एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चलते हैं। जब इक्विटी पर दबाव होता है, तब सोना पोर्टफोलियो के नुकसान को कम करता है। यह डायवर्सिफिकेशन का बेस्ट जरिया है। ₹1 करोड़ के पोर्टफोलियो में ₹5 से ₹10 लाख (5–10%) की सोने में हिस्सेदारी पर्याप्त मानी जाती है।
न करें ये भूल
₹1 करोड़ का पोर्टफोलियो बनाकर छोड़ देने से काम नहीं चलेगा। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपके वित्तीय लक्ष्य करीब आते हैं या बाजार के भाव बदलते हैं, आपको समय-समय पर इसमें जरूरी बदलाव करते रहना चाहिए।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।