क्या बिजली बिल के जरिए बकाया ई-चालान की वसूली होगी? जानिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहम बातें

Traffic Challan Rules : ई-चालान नहीं भरने पर गाड़ी जब्त हो सकती है और रजिस्ट्रेशन, PUC जैसी सेवाएं भी रुक सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कई सख्त निर्देश दिए हैं। बिजली बिल के जरिए चालान वसूलने की बात भी हुई थी। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Oct 02, 2026 पर 6:57 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने बकाया चालान वाली गाड़ियों की कुछ ऑनलाइन सेवाएं फ्रीज करने को कहा है।

ई-चालान नहीं भरना अब भारी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ई-चालान को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। रैंडम चेकिंग में अगर किसी गाड़ी का चालान बकाया मिला, तो गाड़ी जब्त की जा सकती है।

इसके अलावा गाड़ी से जुड़ी कई ऑनलाइन सेवाएं भी रोकी जा सकती हैं। इनमें रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराना, डुप्लीकेट RC लेना और मालिक का पता बदलना शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर के आदेश में ये निर्देश दिए हैं। यह आदेश 1 अक्टूबर को अपलोड हुआ। मामला S Rajaseekaran v Union of India का है। इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट 2012 से कर रहा है।


₹49,194 करोड़ के चालान

कोर्ट के सामने रखे आंकड़ों के मुताबिक, ई-चालान के जरिए करीब ₹49,194.05 करोड़ की रकम वसूलनी थी। इसमें से ₹26,175.05 करोड़ की वसूली हो चुकी है। करीब ₹23,019 करोड़ अभी भी बकाया है। इसी पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर जुर्माना वसूला ही नहीं जा रहा, तो सिर्फ चालान जारी करने का क्या फायदा है।

चार तरह की ऑनलाइन सेवाएं रुक सकती हैं

कोर्ट ने बकाया चालान वाली गाड़ियों की कुछ ऑनलाइन सेवाएं फ्रीज करने को कहा है। चालान नहीं भरने तक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं होगा। डुप्लीकेट RC जारी करने पर भी रोक रहेगी। गाड़ी के मालिक का पता बदलने की रिक्वेस्ट भी नहीं मानी जाएगी। फिटनेस सर्टिफिकेट भी बकाया चालान चुकाने के बाद ही मिलेगा।

गाड़ी ब्लैकलिस्ट होगी

बकाया चालान वाली गाड़ी को Parivahan Portal पर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इससे गाड़ी बेचने में दिक्कत आ सकती है। गाड़ी के मालिकाना हक का ट्रांसफर भी रोका जा सकता है। यानी चालान का असर गाड़ी बेचने या उसका मालिक बदलने तक पहुंच सकता है।

PUC भी नहीं मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने PUC यानी Pollution Under Control Certificate को लेकर भी निर्देश दिए हैं। बकाया चालान रहने पर संबंधित गाड़ी का PUC जारी नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि चालान नहीं भरने पर सिर्फ जुर्माना ही बकाया नहीं रहेगा। गाड़ी के कई जरूरी काम भी अटक सकते हैं।

रैंडम चेकिंग में गाड़ी जब्त हो सकती है

सुप्रीम कोर्ट ने रैंडम व्हीकल चेकिंग के निर्देश भी दिए हैं। अगर चेकिंग में ऐसी गाड़ी मिलती है जिसका ई-चालान बकाया है, तो उसे जब्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। यानी पुराना चालान सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं रहेगा। सड़क पर चेकिंग के दौरान भी इसकी वजह से कार्रवाई हो सकती है।

एक साल में 5 उल्लंघन पर भी सख्ती

कोर्ट ने Central Motor Vehicles Rules, 1989 के Rule 21(25) का भी जिक्र किया है। 1 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली एक साल की अवधि में पांच या उससे ज्यादा उल्लंघन होने पर इसे जनता के लिए परेशानी या खतरे वाला आचरण माना जा सकता है।

ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो सकती है। लाइसेंस रिन्यू करने पर रोक लग सकती है। पहले से जारी लाइसेंस को सस्पेंड करने के कदम भी उठाए जा सकते हैं।

AI कैमरों से ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले पकड़े जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक एनफोर्समेंट मजबूत करने को कहा है। इसके लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के 28 अक्टूबर 2025 के SOP को लागू करना होगा।

इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट सिस्टम AI से लैस होने चाहिए। ये सिस्टम 12 तरह के ट्रैफिक उल्लंघनों को पकड़ने में सक्षम होने चाहिए। इनमें गलत लेन में गाड़ी चलाना और गलत जगह पर गाड़ी रोकना या पार्क करना जैसे उल्लंघन शामिल हैं।

ई-चालान के लिए बनेगा ऑनलाइन डैशबोर्ड

MoRTH को एक ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाने का निर्देश दिया गया है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इलेक्ट्रॉनिक एनफोर्समेंट की जानकारी मिलेगी। इसमें कैमरों और दूसरे उपकरणों की संख्या भी बताई जाएगी। कितने उपकरण काम कर रहे हैं, इसकी जानकारी भी मिलेगी।

कौन से ट्रैफिक उल्लंघन पकड़े जा रहे हैं, यह भी बताया जाएगा। यह जानकारी कम से कम हर महीने अपडेट करनी होगी। सालाना आंकड़े Road Accidents in India रिपोर्ट में भी शामिल किए जा सकते हैं।

बिजली बिल से चालान वसूली?

सुनवाई के दौरान बकाया ई-चालान की रकम बिजली बिल के जरिए वसूलने की बात भी हुई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के लिखित आदेश में ऐसा कोई निर्देश नहीं है।

लिखित आदेश में फिलहाल गाड़ी जब्त करने और ऑनलाइन सेवाएं रोकने जैसी कार्रवाई की बात है। फिटनेस और PUC रोकने के साथ गाड़ी को ब्लैकलिस्ट करने का भी निर्देश है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ आदेश जारी करने से काम नहीं चलेगा। अगर ये निर्देश जमीन पर लागू नहीं हुए, तो आगे सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

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