FD मैच्योर होने के बाद भूल गए निकालना? बैंक में पड़े पैसे पर मिलता है कितना ब्याज, जानिए RBI के नियम

FD Maturity Rules RBI: फिक्स्ड डिपॉजिट मैच्योर हो गई और आप बैंक से पैसा निकालना भूल गए? घबराएं नहीं, आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन क्या आपको पता है कि मैच्योरिटी के बाद उस पैसे पर पुरानी FD वाला ब्याज मिलेगा या सेविंग्स अकाउंट वाला कम ब्याज? यही नहीं, अगर 10 साल तक पैसों का दावा न किया जाए, तो उस अनक्लेम्ड फंड का क्या होता है? जानें

अपडेटेड Oct 19, 2026 पर 12:58 PM
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जानें एफडी मैच्योर होने के बाद पैसे का क्या होता है और आरबीआई के क्या नियम हैं

FD Maturity Rules: फिक्स्ड डिपॉजिट को पारंपरिक और कम जोखिम वाले निवेशकों के बीच हमेशा से एक पसंदीदा निवेश विकल्प माना जाता है। यह एक तय अवधि में फिक्स रिटर्न की गारंटी देता है। वैसे कई बार बैंक के नोटिफिकेशन पर ध्यान न देने या जानकारी न मिलने के कारण निवेशक समय पर अपनी मैच्योरिटी की रकम का दावा करना भूल जाते हैं।

अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। आपका मूलधन सुरक्षित रहता है, लेकिन मैच्योरिटी के बाद मिलने वाला ब्याज बैंक के नियमों और ऑटो-रिन्यूअल के विकल्पों पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं कि एफडी मैच्योर होने के बाद पैसे का क्या होता है और आरबीआई के क्या नियम हैं।

एफडी मैच्योर होने के बाद पैसे का क्या होता है?


जब कोई एफडी पूरी हो जाती है, तो खाते में दर्ज निर्देशों के आधार पर पैसा या तो रिपे किया जाता है या फिर रिन्यू कर दिया जाता है। अगर आप मैच्योरिटी के बाद कोई एक्शन नहीं लेते हैं, तो इन अलग-अलग परिस्थितियों में आपके पैसे के साथ यह होता है:

ऑटोमैटिक रिन्यूअल: कुछ फिक्स्ड डिपॉजिट में ऑटो-रिन्यूअल का निर्देश दिया होता है, जिसके तहत खाता खोलते समय तय की गई शर्तों के अनुसार इसे आगे बढ़ा दिया जाता है।

खाते में क्रेडिट: अगर डिपॉजिट में रिपेमेंट का निर्देश है, तो बैंक की प्रक्रिया के अनुसार मैच्योरिटी की रकम सीधे आपके रजिस्टर्ड बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।

अनक्लेम्ड पैसों पर ब्याज: भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अगर मैच्योरिटी की रकम का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उस राशि पर सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दर या मच्योर हो चुकी एफडी की अनुबंधित दर इन दोनों में से जो भी कम हो उसके हिसाब से ब्याज मिलता है।

10 साल तक पैसा न निकालने पर क्या होता है?

अगर एफडी की मैच्योरिटी तारीख से 10 साल के भीतर कोई दावा या कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इसे 'अनक्लेम्ड डिपॉजिट' के रूप में वर्गीकृत किया जाता है और इसे बैंक से ट्रांसफर कर दिया जाता है।

RBI के नियमों के अनुसार, जिस महीने में 10 साल की अवधि पूरी होती है, उसके बाद वाले महीने के आखिरी कार्य दिवस पर बैंक कुल बकाया राशि की गणना करता है और इसे केंद्रीय बैंक द्वारा मेंटेन किए जाने वाले डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस (DEA) फंड में ट्रांसफर कर देता है।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपका पैसा डूब गया है। आरबीआई केवल इन अनक्लेम्ड डिपॉजिट्स का कस्टोडियन बनता है, और निवेशक या उनके कानूनी उत्तराधिकारी के क्लेम करने तक मूलधन व उस पर तय ब्याज पाने का अधिकार सुरक्षित रहता है। जमाकर्ता की मृत्यु होने पर नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को मृत्यु प्रमाण पत्र और पहचान दस्तावेज दिखाने होते हैं, जिसके बाद बैंक पूरी प्रक्रिया को आसान बनाते हुए रकम ट्रांसफर कर देता है।

आपको अपनी एफडी कब रिन्यू करनी चाहिए?

अगर आपको निकट भविष्य में पैसों की आवश्यकता नहीं है और आप रिटर्न कमाना जारी रखना चाहते हैं, तो आप अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट को रिन्यू करने का विकल्प चुन सकते हैं।

ब्याज दरों की तुलना करें: रिन्यू करने से पहले बैंक की मौजूदा एफडी दरों की तुलना अपनी पुरानी एफडी दर से जरूर कर लें, क्योंकि नई दरें कम या ज्यादा हो सकती हैं। इसके अलावा अवधि और समय से पहले पैसे निकालने पर लगने वाले पेनाल्टी चार्ज को भी जांच लें।

लिक्विडिटी का रखें ध्यान: अगर आपके पास शॉर्ट-टर्म फाइनेंशियल गोल्स हैं या आपातकालीन स्थिति के लिए पैसों की जरूरत है, तो इसे लंबी अवधि की एफडी में लॉक करना सही नहीं होगा। ऐसे मामलों में आप पैसे सेविंग्स अकाउंट में रख सकते हैं या अलग-अलग मैच्योरिटी तारीखों वाली एफडी में बांट सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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