Mokshada Ekadashi 2025: एकादशी के दिन बिना छुए इस तरह करें तुलसी की पूजा, भूल कर भी न करें तुलसी से जुड़ी ये गलतियां

Mokshada Ekadashi 2025: मार्गशीष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोक्षदा एकादशी होती है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन व्रत करने वाले भक्त को और उसके पूर्वजों को सभी पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

अपडेटेड Nov 30, 2025 पर 7:00 AM
Story continues below Advertisement
इसी दिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान कृष्ण ने पांडु पुत्र अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।

Mokshada Ekadashi 2025: मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। धर्म ग्रंथों में इस माह का भगवान श्री कृष्ण का प्रिय बताया गया है। इसी दिन कुरुक्षेत्र की रणभूमि में भगवान कृष्ण ने पांडु पुत्र अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसलिए गीता जयंति भी इसी दिन मनाई जाती है। माना जाता है कि मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत करने वाले भक्त और उनके पूवर्जों को भी मोक्ष मिलता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इनकी पूजा में तुलसी दल रखना अनिवार्य होता है। लेकिन एकादशी के दिन तुलसी की पूजा और उसे जल देना वर्जित माना जाता है। मगर, आज हम आपको बताएंगे कि मोक्षदा एकादशी के दिन तुलसी को बिना छुए उसकी पूजा किस तरह कर सकते हैं।

मोक्षदा एकादशी की तारीख

पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि रविवार, 30 नवंबर 2025 को रात 9:29 बजे शुरू होगी और 1 दिसंबर 2025 को शाम 7:01 बजे समाप्त होगी। चूंकि एकादशी व्रत उदया तिथि के आधार पर रखा जाता है, इसलिए व्रत 1 दिसंबर 2025 को ही रखा जाएगा। इस व्रत का पारण समय प्रातःकाल के बाद द्वादशी तिथि में होगा।

इस तरह करें तुलसी माता की पूजा

मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह स्नान आदि से मुक्त होकर साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई कर विधिवत रूप से भगवान विष्णु की पूजा करें। इस दिन भगवान विष्णु के भोग में तुलसी दल भी जरूर शामिल करें। अब शाम के समय तुलसी के पास एक घी का दीपक जलाएं और 7 बार परिक्रमा करें। साथ ही पूजा में तुलसी माता के मंत्रों का भी जप करें।

तुलसी जी के मंत्र -


महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

तुलसी गायत्री - ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।

तुलसी नामाष्टक मंत्र -

वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।

पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।

य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।

न करें तुलसी से जुड़ी ये गलतियां

  • मोक्षदा एकादशी के दिन तुलसी के पास लड़ाई-झगड़ा करना या अपशब्द कहना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा करने से तुलसी मां नाराज होती हैं।
  • तुलसी के पौधे को मोक्षदा एकादशी के दिन आपको उत्तर और उत्तर पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
  • मोक्षदा एकादशी के दिन गलती से भी तुलसी के पास जूठे बर्तन, गीले कपड़े न रखें। ऐसा करना नकारात्मक हो सकता है।
  • तुलसी के पौधे के पास झाडू और जुते-चप्पल नहीं रखना चाहिए। ये चीजें तुलसी के पास रखने से माता लक्ष्मी रुठ सकती हैं और जीवन में आर्थिक संकट आ सकते हैं।
  • तुलसी के पौधे के पास कभी भी कांटेदार पौधे नहीं रखें। इसके कारण घर की खुशियां छिन सकती हैं।

Mokshada Ekadashi 2025: बहुत कठोर हैं मोक्षदा एकादशी व्रत के नियम, जानें इसका महत्व और एकादशी की तारीख

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।