भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स में जीत हासिल कर ली है। इससे पहले वह इस प्रतियोगिता में मेडल जीतने से चूक गई थीं, लेकिन इस बार उन्होंने अपनी मेहनत से शानदार प्रदर्शन किया। मुकाबला कड़ा होने के बावजूद उन्होंने पोडियम पर जगह बनाने में कामयाबी हासिल की।
एशियन गेम्स में मेडल जीतने के लिए यह मीराबाई चानू की तीसरी कोशिश थी। इससे पहले हांग्जो 2023 में वह 49 किलो वर्ग में चौथे स्थान पर रही थीं। उन्हें फिटनेस से जुड़ी परेशानी का भी सामना करना पड़ा था। इस बार उन्होंने बेहतर तैयारी के साथ वापसी की और मेडल जीता।
इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और जीता मेडल
मीराबाई ने स्नैच में 83 किलो वजन से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 85 किलो और फिर 87 किलो का वजन उठाया। वह स्नैच राउंड में तीसरे स्थान पर रहीं और क्लीन एंड जर्क के लिए पहुंचीं।
क्लीन एंड जर्क में मीराबाई चानू ने 111 किलो वजन उठाया। स्नैच और क्लीन एंड जर्क को मिलाकर उनका कुल वजन 198 किलो रहा। जिसमें उन्होंने सिल्वर मेडल जीता। उत्तर कोरिया की री सोंग-गम ने 215 किलो के कुल वजन के साथ गोल्ड जीता, जबकि इंडोनेशिया की लुलुक डायना ट्राई विजयाना ने 191 किलो के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
करियर में मिली ये उपलब्धियां
इस मेडल के साथ मीराबाई को करियर में एक और बड़ी उपलब्धि मिली है। अब उनके नाम ओलंपिक, वर्ल्ड चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स, कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप, एशियन चैंपियनशिप और एशियन गेम्स में मेडल हैं। कर्णम मल्लेश्वरी के बाद वह दूसरी भारतीय महिला वेटलिफ्टर हैं। मीराबाई की कहानी बताती है कि हार मिलने के बाद भी निराश नहीं होना चाहिए। आप मेहनत, तैयारी और हिम्मत के साथ फिर से अपनी जगह बना सकता है।