फ्लाइट सीट अपग्रेड के लिए पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं? चेन्नई के शख्स ने बताया कैसे हुआ कमाल

एयरपोर्ट पर सीट अपग्रेड के लिए लोग अक्सर पैसे या पॉइंट्स खर्च करते हैं, लेकिन चेन्नई के एक शख्स ने इसके लिए अलग तरीका अपनाया। उन्होंने बताया कि विनम्रता से बात करने पर उन्हें एक ही फ्लाइट में दो बार सीट अपग्रेड मिला। उनका अनुभव सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा में है

अपडेटेड Sep 29, 2026 पर 4:26 PM
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यह समझना जरूरी है कि विनम्रता कोई गारंटीड अपग्रेड ट्रिक नहीं है।

एयरपोर्ट पर अपनी पसंद की सीट मिल जाए तो सफर का मजा कुछ और ही होता है। इसके लिए कुछ यात्री पहले से पैसे खर्च करते हैं, तो कुछ अपग्रेड ऑफर या पॉइंट्स का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन चेन्नई के नारायणन हरिहरन के साथ जो हुआ, उसका तरीका काफी अलग था। उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि एक फ्लाइट में उन्हें दो बार सीट अपग्रेड मिला और इसके पीछे उन्होंने अपने विनम्र व्यवहार को वजह बताया। उनका दावा है कि चेक-इन काउंटर पर उन्होंने स्टाफ से मुस्कुराकर बात की, उनका नाम इस्तेमाल किया और फिर शांति से बेहतर सीट के लिए अनुरोध किया। इसके बाद उनकी सीट बदल दी गई। ना

रायणन ने बोर्डिंग गेट पर भी दोबारा इसी तरह अनुरोध किया और उन्हें एक और बेहतर सीट मिल गई। उनकी यह कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। हालांकि, सीट अपग्रेड की कोई गारंटी नहीं होती और यह उपलब्धता व एयरलाइन की नीति पर निर्भर करता है।

27B से सीधे Emergency Row तक पहुंचे


चेन्नई के नारायणन हरिहरन ने X पर अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्हें फ्लाइट में 27B सीट मिली थी। चेक-इन काउंटर पर उन्होंने स्टाफ से मुस्कुराकर बात की, नाम लेकर बातचीत की और उनके दिन के बारे में पूछा। इसके बाद उन्होंने बेहद सामान्य तरीके से बेहतर सीट देने का अनुरोध किया। नारायणन के मुताबिक, उनकी सीट बदलकर Emergency Row की 14F कर दी गई। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई।

Boarding Gate पर फिर मांगी सीट

बोर्डिंग गेट तक पहुंचने के बाद नारायणन ने एक बार फिर उसी तरीके को आजमाया। उन्होंने वहां मौजूद स्टाफ से विनम्रता से बात की और सीट अपग्रेड के लिए पूछा। इस बार उन्हें 1F सीट मिल गई। यानी जिस यात्रा की शुरुआत 27B से होनी थी, वह पहले 14F और फिर 1F तक पहुंच गई।

आखिर क्यों काम आई विनम्रता?

अपने पोस्ट में नारायणन ने इसके पीछे अपनी एक सोच भी बताई। उनका कहना था कि एयरपोर्ट स्टाफ को पूरे दिन थके हुए और परेशान यात्रियों से बातचीत करनी पड़ती है। ऐसे में अगर कोई यात्री शांति से और सम्मान के साथ बात करे तो उसकी रिक्वेस्ट पर ध्यान देना आसान हो सकता है। उनके पोस्ट में मूल बात यही थी कि अच्छा व्यवहार किसी कर्मचारी के लिए भी दिन का अनुभव थोड़ा बेहतर बना सकता है।

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सोशल मीडिया पर लोगों ने भी सुनाए अनुभव

नारायणन की पोस्ट को करीब 30 हजार व्यूज मिले और कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। कुछ यूजर्स ने बताया कि एयरपोर्ट पर स्टाफ से सामान्य और सम्मानजनक बातचीत करने से उन्हें भी सकारात्मक अनुभव मिला है। एक यूजर ने CISF जवान से हुई बातचीत का किस्सा बताया और कहा कि सामान्य बातचीत से जवान काफी खुश नजर आया। वहीं एक अन्य यूजर ने दावा किया कि अगर सीट उपलब्ध हो तो चेक-इन स्टाफ कभी-कभी विनम्र अनुरोध पर अपग्रेड दे सकता है।

लेकिन हर बार नहीं मिलेगा अपग्रेड

यह समझना जरूरी है कि विनम्रता कोई गारंटीड अपग्रेड ट्रिक नहीं है। सीट उपलब्ध होना, एयरलाइन की पॉलिसी और उस समय की स्थिति जैसे कई दूसरे कारण भी मायने रखते हैं। फिर भी नारायणन की कहानी एक साधारण बात जरूर याद दिलाती है कभी-कभी यात्रा में मुस्कान, धैर्य और सम्मान से बात करना उम्मीद से ज्यादा काम आ सकता है।

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