गुरुग्राम में 21 साल के कॉलेज स्टूडेंट ने खोला वेजिटेरियन कैफे, 50 दिनों में कमाए 15 लाख रुपये

कॉलेज और entrepreneurship के बीच संतुलन बनाना कोई आसान काम नहीं है। 21 वर्षीय यह युवा अपनी पढ़ाई की जिम्मेदारियों को संभालने के साथ-साथ एक शाकाहारी बिस्ट्रो चलाने में भी मदद कर रहा है। इस बिस्ट्रो का उद्देश्य ग्राहकों तक असली अंतरराष्ट्रीय स्वाद पहुंचाना है।

अपडेटेड Nov 08, 2026 पर 11:57 AM
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अनन्या का उद्यमिता (entrepreneurship) का सफर एक पारिवारिक प्रयास भी है। उसने अपने माता-पिता के साथ मिलकर इस रेस्टोरेंट की शुरुआत की।

जहां कॉलेज के ज्यादातर छात्र अपना आखिरी साल लेक्चर अटेंड करने असाइनमेंट पूरे करने और परीक्षाओं की तैयारी में बिताते हैं, वहीं 21 साल की एक युवती ने एक अलग ही चुनौती स्वीकार की है। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ वह उद्यमिता (entrepreneurship) की दुनिया में कदम रख रही हैं और सीख रही हैं कि बिजनेस कैसे चलाया जाता है।

मैनेजमेंट स्टडीज में बैचलर डिग्री के आखिरी साल की छात्रा अनन्या अग्रवाल ने गुरुग्राम में एक शाकाहारी बिस्ट्रो (vegetarian bistro) की शुरुआत की है। बताया जाता है कि खुलने के पहले 50 दिनों में ही इस बिस्ट्रो ने 15 लाख रुपये की कमाई कर ली।

21 साल की अनन्या ने कैफे खोलने का फैसला क्यों किया?


अनन्या के लिए रेस्तरां खोलना सिर्फ फ़ूड बिजनेस में उतरने तक सीमित नहीं था। वह एक ऐसी जगह बनाना चाहती थीं, जहां ग्राहक आराम से खाना खा सकें, दोस्तों और परिवार के साथ समय बिता सकें और उन्हें किसी तरह की जल्दबाजी महसूस न हो। उनके प्लान का एक और अहम हिस्सा 'फ़ूड कॉन्सेप्ट' था। विदेशी व्यंजनों (international dishes) को पूरी तरह से बदलने के बजाय, वह उनके असली स्वाद को बनाए रखना चाहती थीं।

'कर्ली टेल्स' (Curly Tales) को अपनी सोच के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा- "भारत में हम इटैलियन मेडिटेरेनियन या मैक्सिकन व्यंजनों में बहुत सारे 'भारतीय स्वाद' (Indianised flavours) मिला देते हैं। इस वजह से उन व्यंजनों का असलीपन (authenticity) खत्म हो जाता है, क्योंकि उनमें बहुत सारे मसाले डाल दिए जाते हैं।"

अनन्या के परिवार के पास बिजनेस का अनुभव है

अनन्या का उद्यमिता (entrepreneurship) का सफर एक पारिवारिक प्रयास भी है। उसने अपने माता-पिता के साथ मिलकर इस रेस्टोरेंट की शुरुआत की। उसके पिता के पास इस काम के लिए एक दशक से भी ज्यादा का बिजनेस अनुभव है। अपने माता-पिता के साथ काम करने से अनन्या को कॉलेज में पढ़े जाने वाले मैनेजमेंट कॉन्सेप्ट्स के अलावा, व्यावहारिक अनुभव के ज़रिए बिजनेस चलाने के बारे में सीखने का मौका मिला है।

कॉलेज की जिंदगी और बिजनेस चलाने के बीच संतुलन

अनन्या के लिए चुनौती सिर्फ रेस्टोरेंट खोलने तक ही सीमित नहीं है। बिजनेस को स्थापित करने में मदद करने के साथ-साथ उसे अपनी पढ़ाई की ज़िम्मेदारियों को भी पूरा करना होता है। एक रेस्टोरेंट चलाने में कई काम शामिल होते हैं, जैसे कामकाज की देखरेख करना, खाने की क्वालिटी बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना कि ग्राहकों को अच्छा अनुभव मिले। ये जिम्मेदारियां उसके कॉलेज के शेड्यूल के साथ-साथ चलती हैं, जिसमें क्लास, असाइनमेंट और परीक्षाएं शामिल हैं। अनन्या ने बताया- "मैं काम करते-करते सीख रही हूँ। उद्यमिता (entrepreneurship) मेरे लिए बहुत मायने रखती है।"

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