दिल्ली में इन दिनों एक ऐसा चुनावी माहौल बना है, जिसमें न नेता हैं, न भाषण और न ही राजनीतिक वादे। यहां मुकाबला है शहर के सबसे गोल-मटोल और ‘चोंकी’ कुत्ते के खिताब का। सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह मजेदार आइडिया देखते ही देखते लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। अलग-अलग इलाकों के तगड़े कुत्ते मैदान में उतरे हैं और उनके समर्थक भी पूरे जोश के साथ प्रचार में जुटे हैं। कोई अपने पसंदीदा कुत्ते को किंग बता रहा है, तो कोई उसके लिए वोट मांग रहा है। अब देखना है कि इस अनोखे चुनाव में बाजी कौन मारता है।
इंस्टाग्राम से निकला ‘फैट डॉग इलेक्शन’
इस अनोखे मुकाबले की शुरुआत ‘Fat Dogs of Delhi’ नाम के इंस्टाग्राम पेज से हुई। आइडिया अमेरिका के मशहूर Fat Bear Week से प्रेरित है, लेकिन यहां भालुओं की जगह दिल्ली के 64 भारी-भरकम कुत्ते मैदान में हैं। प्रतियोगिता का फॉर्मेट बिल्कुल नॉकआउट टूर्नामेंट जैसा रखा गया। 24 सितंबर से शुरू हुआ मुकाबला 29 सितंबर को ग्रैंड फिनाले तक पहुंचना है। हर राउंड में इंस्टाग्राम स्टोरी पर दो कुत्तों के बीच वोटिंग होती है और जनता अपने पसंदीदा ‘चोंकर’ को आगे बढ़ाती है।
पोस्टर, फैन क्लब और ‘पेड PR’ के आरोप!
मुकाबला शुरू होते ही कुत्तों के समर्थक भी पूरे चुनावी रंग में उतर आए। कहीं पोस्टर बने, कहीं फैन क्लब तैयार हुए तो कहीं अपने पसंदीदा उम्मीदवार के लिए सोशल मीडिया पर जोरदार प्रचार शुरू हो गया। मजेदार बात यह है कि कुछ समर्थकों ने प्रतिद्वंद्वी कुत्तों को मिल रहे कथित ‘पेड PR’ पर भी सवाल उठा दिए। डिलीवरी कंपनी Blinkit ने भी सोशल मीडिया पर कुट्टा सिंह के समर्थन का ऐलान कर दिया और विजेता को मुफ्त ट्रीट देने की बात कही।
चार ‘चोंकर’ पहुंचे सेमीफाइनल में
64 उम्मीदवारों की शुरुआत अब चार नामों तक सिमट गई गूगू, तारा खान उर्फ खान साहेब, हीरो और गोला उर्फ कबाब उर्फ राजपाल सिंह। इनमें तारा और गोला की मौत हो चुकी है, फिर भी उनके समर्थकों ने उन्हें मुकाबले से बाहर नहीं किया।
46 किलो का गूगू, लेकिन अब डाइट पर!
साकेत का गूगू इस चुनाव का चर्चित चेहरा है। करीब 46 किलो वजन वाले इस मिश्रित नस्ल के कुत्ते को वजन घटाने के लिए दिल्ली के राजोकरी स्थित Jeevashram Foundation में रखा गया है। उसकी डाइट भी अब तय है सुबह दलिया,दोपहर में दूध के साथ चपाती और शाम को थोड़ी मात्रा में चिकन। गूगू को 2021में देखने वाले कबीर वधावन बताते हैं कि तब वह आज के मुकाबले काफी छोटा था। अब इंटरनेट पर उसके प्रशंसक उसे GOAT, चैंपियन और किंग जैसे खिताब दे रहे हैं।
रमबाबू की ‘बिरयानी डिप्लोमेसी’
यूसुफ सराय का रमबाबू उर्फ चोंकी भी कम लोकप्रिय नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक उसे बिरयानी खिलाने वाले प्रशंसकों की कमी नहीं। नसबंदी के बाद उसका वजन बढ़ा और आसपास के लोग प्यार से उसे खाना खिलाते रहे। इस मजेदार चुनाव ने दिल्ली की सीमाएं भी पार कर ली हैं। केरल और कोलकाता तक लोग अपने पसंदीदा कुत्तों के लिए वोट मांग रहे हैं। अब नजर 29 सितंबर के नतीजे पर है देखना है कि दिल्ली का ताज किस ‘चोंकी’ के सिर सजता है।