Dhanteras 2026 Puja Muhurat :धनतेरस का सबसे शुभ पूजा मुहूर्त जानिए, 6 नवंबर को ही धनतेरस मनाना क्यों उत्तम?
धनतेरस इस बार 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी 6 नवंबर सुबह 10:31 बजे से शुरू होकर 7 नवंबर सुबह 10:49 बजे तक रहेगी। पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:44 से 6:04 बजे तक है, जबकि प्रदोष काल शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक रहेगा। खरीदारी के लिए सुबह 11:42 से शाम 6:04 बजे तक अलग-अलग शुभ समय बताए गए हैं। इस दिन धनवंतरी भगवान, मां लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर की पूजा के साथ यमदीप दान का विशेष महत्व है।
धनतेरस 6 नवंबर को, जानिए पूजा और खरीदारी के शुभ मुहूर्त
Dhanteras 2026 : इस बार धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को रहने वाली है। इसी दिन धनवंतरी भगवान, मां लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर जी की पूजा होती है। श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत रोहित शास्त्री कहते हैं कि धनतेरस पर सही समय पर की गई पूजा और खरीदारी से ज्यादा फल मिलता है।
महंत जी के मुताबिक कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी 6 नवंबर को सुबह 10:31 बजे से शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10:49 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल 6 नवंबर को ही है, इसलिए धनतेरस भी उसी दिन मनाया जाएगा।
धनतेरस क्यों मनाया जाता है?
धनतेरस धन, सेहत और खुशहाली का त्योहार है। इस दिन धनवंतरी भगवान की पूजा से अच्छी सेहत और लक्ष्मी जी की पूजा से घर में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। यमदीप दान को परिवार की रक्षा और शांति से जोड़ा जाता है।
घर पर पूजा इस विधि से करें
सबसे पहले खुद को शुद्ध करके बैठें। फिर पूजा वाली जगह पर गंगाजल छिड़कें। लकड़ी के पाटे पर स्वस्तिक बनाएं। उसके बाद धनवंतरी भगवान, लक्ष्मी-नारायण और गणेश जी को विराजित करके पूजा शुरू करें।
शाम को सरसों के तेल का दीया जलाएं। उस पर रोली और चावल से तिलक लगाएं। दीये में थोड़ा मीठा डालकर भोग लगाएं। लक्ष्मी जी और गणेश जी को पैसे चढ़ाएं। फिर उस दीये को लेकर घर के मुख्य दरवाजे के बाहर दक्षिण दिशा में रख दें। इसी को यमदीप दान कहते हैं।
दीया रखते समय ये मंत्र बोलें:
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यज: प्रीयतामिति॥
इस मंत्र से यमराज से अकाल मृत्यु और परेशानियों से बचाने की प्रार्थना की जाती है।
यह रहेगा पूजा के लिए सही समय
धनतेरस पर शाम के समय पूजा करना ही सबसे अच्छा माना गया है। पूजा के लिए सबसे शुभ मुहूर्त यह रहने वाला है।
प्रदोष काल: शाम 5:33 से रात 8:09 बजे तक
पूजा का सबसे अच्छा समय: शाम 5:44 से 6:04 बजे तक
कुल समय: सिर्फ 21 मिनट
खरीदारी के लिए सबसे अच्छा समय कब है?
धनतेरस पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने का पुराना रिवाज है। महंत रोहित शास्त्री के हिसाब से इस दिन खरीदारी के लिए ये समय ठीक रहेगा।
सुबह 11:42 से 12:27 बजे तक
दोपहर 1:05 से 2:29 बजे तक
दोपहर 2:45 से 5:30 बजे तक
शाम 5:32 से 6:04 बजे तक
जो लोग शेयर बाजार में पैसा लगाना चाहते हैं, उनके लिए 6 नवंबर को दोपहर 3:46 से शाम 6 बजे तक का समय अच्छा बताया गया है।
धनतेरस पर बर्तन क्यों खरीदते हैं?
कहा जाता है कि समुद्र मंथन के समय कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को ही धनवंतरी भगवान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनवंतरी भगवान को आयुर्वेद और इलाज का देवता माना जाता है।
इसीलिए धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा चली आ रही है। खासकर पीतल का बर्तन खरीदना अच्छा माना जाता है। महंत जी कहते हैं कि बर्तन को कभी खाली घर नहीं लाना चाहिए। उसमें पानी भरकर लाएं तो शुभ होता है।
लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए ये सारी चीजें करें
साबुत धनिया: धनतेरस पर 50 ग्राम साबुत धनिया लेकर लक्ष्मी जी और धनवंतरी भगवान के चरणों में चढ़ाएं। बाद में उसे प्रसाद की तरह घर में सबको बांट दें। मान्यता है कि इससे घर में बरकत आती है।
नई झाड़ू: इस दिन नई झाड़ू खरीदना भी शुभ माना जाता है। कहते हैं इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा निकल जाती है। इस झाड़ू का इस्तेमाल छोटी दीपावली के दिन किया जाता है।
गाय की पूजा: धनतेरस पर गाय की पूजा का भी बड़ा महत्व है। खासकर दक्षिण भारत में इस दिन गाय को सजाकर पूजा की जाती है। गाय को मां लक्ष्मी का रूप माना गया है।
शंख और रुद्राक्ष: इस दिन दक्षिणावर्ती शंख और रुद्राक्ष की माला खरीदना भी अच्छा माना जाता है।
महंत रोहित शास्त्री ने लोगों से कहा है कि धनतेरस पर सही मुहूर्त में पूजा करें और अपनी परंपरा के हिसाब से दीपदान जरूर करें।