Dhanteras 2026 Puja Muhurat: आज 6 नवंबर को पूरे देश में धनतेरस मनाया जा रहा है। दिवाली से ठीक दो दिन पहले आने वाला ये त्योहार पांच दिन के दीपोत्सव की शुरुआत माना जाता है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी, कुबेर जी और धन्वंतरि भगवान की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि आज सोना-चांदी, बर्तन या कोई भी नई चीज खरीदने से घर में बरकत आती है।
धनतेरस को लोग धनत्रयोदशी भी कहते हैं। सुबह से ही घरों में सफाई, दीपक और पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। अगर आप भी आज पूजा और खरीदारी करने वाले हैं, तो पहले शुभ टाइम और पूजा का तरीका समझ लीजिए।
आज पूजा के लिए ये समय रहने वाला है सबसे शुभ
दृक पंचांग के मुताबिक हर शहर में पूजा का मुहूर्त थोड़ा अलग रहने वाला है।
त्रयोदशी तिथि कब से कब तक
प्रदोष काल शाम करीब 5:59 से रात 8:33 बजे तक रहेगा। इसी बीच पूजा करना सबसे अच्छा माना जाता है।
धनतेरस क्यों मनाया जाता है, जानिए इसके पीछे की मान्यता
धनतेरस नाम में ही दो शब्द हैं, धन और तेरस। धन मतलब दौलत और तेरस मतलब तेरहवीं तिथि। ये त्योहार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को आता है।
कहानी के मुताबिक, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और सेहत का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी पूजा से अच्छी सेहत और लंबी उम्र मांगी जाती है। इसी दिन मां लक्ष्मी और कुबेर जी की भी पूजा होती है। लक्ष्मी जी को धन-समृद्धि की देवी और कुबेर जी को धन के रखवाले के रूप में पूजा जाता है। लोग इसी दिन परिवार की तरक्की और खुशहाली के लिए प्रार्थना करते हैं।
घर पर धनतेरस की पूजा करने का सही तरीका
आज क्या खरीदना अच्छा रहेगा
धनतेरस पर नई चीज खरीदने का रिवाज बहुत पुराना है। लोग अपनी जेब के हिसाब से कुछ न कुछ जरूर खरीदते हैं।
दिवाली का पर्व इस बार 5 दिन तक चलेगा
धनतेरस के साथ ही पांच दिन का दिवाली उत्सव शुरू हो जाता है। इसके बाद छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज आएंगे। धनतेरस पर लोग धन और सेहत मांगते हैं, तो दिवाली पर दीप जलाकर खुशियां मनाते हैं। इस तरह ये त्योहार परिवार और परंपरा को एक साथ जोड़ देता है।