बड़े शहरों में अपना घर होना कभी सुकून और सुरक्षित जिंदगी की निशानी माना जाता था। लेकिन अब घर खरीदने के बाद भी लोगों को अच्छी सड़कें, सुरक्षा, बिजली और साफ-सफाई जैसी सुविधाओं के लिए अलग से मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। मुंबई में रहने वाले निवेश पेशेवर मनुराज गर्ग ने अपने रिटायर्ड माता-पिता की जिंदगी से जुड़ा ऐसा ही अनुभव साझा किया है। गुरुग्राम की एक प्रीमियम हाउसिंग सोसाइटी में रहने वाले उनके माता-पिता ने सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए एकमुश्त 3.5 लाख रुपये चुकाए। उनकी कहानी ने सोशल मीडिया पर शहरों की व्यवस्था और आम नागरिकों के खर्च को लेकर बहस छेड़ दी है।
हर साल लाखों का खर्च, फिर भी देना पड़ा अतिरिक्त पैसा
लिंक्डइन पर अपनी पोस्ट में मनुराज गर्ग ने बताया कि उनके माता-पिता करीब 2.1 लाख रुपये सालाना मेंटेनेंस शुल्क भी देते हैं। इसके अलावा, सोसाइटी में बड़े स्तर पर सुधार के लिए अलग से रकम मांगी गई। इस परियोजना में तेज रफ्तार लिफ्ट, बेहतर आंतरिक सड़कें, सैकड़ों सीसीटीवी कैमरे, स्विमिंग पूल और जिम जैसी सुविधाओं को अपग्रेड करना शामिल था। गर्ग के मुताबिक, सोसाइटी के करीब 1,400 फ्लैटों से उनके आकार के आधार पर 2 लाख से 3.5 लाख रुपये तक लिए गए।
मां ने कहा- सोसाइटी हमारा कितना ख्याल रखती है
गर्ग ने बताया कि शुरुआत में उन्हें यह रकम काफी ज्यादा लगी, लेकिन उनकी मां की सोच अलग थी। उन्होंने कहा कि सोसाइटी उनके परिवार का बहुत अच्छी तरह ख्याल रखती है। उनके माता-पिता के लिए यह खर्च सिर्फ बेहतर सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा और मानसिक सुकून से भी जुड़ा है। गर्ग के अनुसार, गुरुग्राम में मानसून के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या आई थी, लेकिन उनकी सोसाइटी में लगाए गए पंपों ने कुछ ही मिनटों में पानी निकालने में मदद की। एक अन्य घटना में, रात के समय कुछ कथित तौर पर नशे में धुत लोगों ने सोसाइटी के प्रवेश द्वार से जबरन घुसने की कोशिश की। सुरक्षा कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई की।
माता-पिता के लिए सोसाइटी ही बन गई पूरी दुनिया
गर्ग के मुताबिक, उनके माता-पिता की रोजमर्रा की जरूरतें सोसाइटी के भीतर ही पूरी हो जाती हैं। किराने का सामान घर पहुंच जाता है, जबकि जिम, कैफे, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक मेलजोल के अवसर भी परिसर में मौजूद हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनके माता-पिता गुरुग्राम में नहीं, बल्कि अपनी सोसाइटी में रहते हैं, जो गुरुग्राम में स्थित है।
क्या बुनियादी सुविधाओं के लिए भी देना होगा प्रीमियम?
गर्ग ने सवाल उठाया कि लोग एक तरफ टैक्स देते हैं और दूसरी तरफ निजी सोसाइटियों में उन्हीं सुविधाओं के लिए अतिरिक्त भुगतान करते हैं, जिनकी उम्मीद वे शहर की व्यवस्था से करते हैं। पोस्ट पर कई लोगों ने कहा कि सुरक्षित सड़कें, अच्छी जल निकासी और भरोसेमंद बिजली किसी लग्जरी का हिस्सा नहीं, बल्कि शहर की बुनियादी जरूरतें हैं। वहीं, कुछ लोगों ने इसे निजी आवासीय परिसरों और बाकी शहर के बीच बढ़ती असमानता का उदाहरण बताया। आखिरकार, यह कहानी केवल लाखों रुपये खर्च करने की नहीं, बल्कि उन बुजुर्गों की है जो उम्र के इस पड़ाव पर सुविधा, सुरक्षा और सुकून के लिए अतिरिक्त कीमत चुकाने को तैयार हैं।