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IIT कानपुर की ग्रेजुएट ने बताया, आखिर क्यों दोस्त ने वर्क फ्रॉम होम की नौकरी छोड़ दी? 10 से 6 की शर्त बनी वजह

वर्क फ्रॉम होम में भी अगर सुबह 10 से शाम 6 बजे तक ऑनलाइन रहना पड़े, तो फिर आजादी कहां है? एक महिला ने इसी वजह से अपनी रिमोट नौकरी छोड़ दी। IIT कानपुर की पूर्व छात्रा कनक अग्रवाल ने यह अनुभव साझा करते हुए सवाल उठाया कि कंपनियों के लिए काम के नतीजे ज्यादा जरूरी हैं या ऑनलाइन मौजूदगी?

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Oct 11, 2026 पर 11:14 AM
IIT कानपुर की ग्रेजुएट ने बताया, आखिर क्यों दोस्त ने वर्क फ्रॉम होम की नौकरी छोड़ दी? 10 से 6 की शर्त बनी वजह
यह बहस बताती है कि आज कर्मचारियों के लिए केवल घर से काम करना ही पर्याप्त नहीं है। (representational image)

वर्क फ्रॉम होम को अक्सर आजादी और सुविधा से जोड़कर देखा जाता है। लोगों को लगता है कि घर से काम करने पर वे अपने समय के हिसाब से जिंदगी और नौकरी के बीच संतुलन बना सकते हैं। लेकिन क्या सच में ऐसा है? एक महिला ने इसी सवाल के बीच अपनी पूरी तरह रिमोट नौकरी छोड़ने का फैसला किया। वजह थी कंपनी की यह शर्त कि उन्हें सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार ऑनलाइन और उपलब्ध रहना होगा। इस घटना ने काम के घंटों, कर्मचारियों की आजादी और कंपनियों के भरोसे को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

ऑफिस से बचने के लिए चुना वर्क फ्रॉम होम

इस मामले को IIT कानपुर की पूर्व छात्रा और McKinsey में काम कर चुकीं कनक अग्रवाल ने LinkedIn पर साझा किया। उन्होंने अपनी एक दोस्त का अनुभव बताते हुए सवाल उठाया कि अगर कर्मचारी को घर से काम करते हुए भी ऑफिस जैसी समय-सारणी का पालन करना पड़े, तो रिमोट वर्क का असली फायदा क्या है? कनक के मुताबिक, उनकी दोस्त ने इसी वजह से नौकरी छोड़ दी। वह घर से काम तो कर रही थीं, लेकिन कंपनी चाहती थी कि वह तय समय के दौरान लगातार ऑनलाइन रहें और अपनी उपलब्धता दिखाती रहें। कनक ने इस स्थिति को केवल ऑफिस बनाम घर से काम करने का मामला नहीं, बल्कि अपने समय पर नियंत्रण रखने की आजादी से जुड़ा मुद्दा बताया।

काम पूरा करना जरूरी या पूरे दिन ऑनलाइन दिखना?

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