कभी घर में खाली समय बिताने के लिए मशरूम उगाने वाली केरल की शिजे ने अपने छोटे से प्रयोग को बड़े कारोबार में बदल दिया। साल 2007 में उन्होंने अपने पति थैंकाचन के साथ महज 250 रुपये लगाकर मशरूम की खेती शुरू की थी। आज उनका कारोबार सालाना 80 से 90 लाख रुपये का राजस्व कमा रहा है। अब इस दंपति का लक्ष्य कारोबार को बढ़ाकर 1.6 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। उनकी कहानी बताती है कि छोटे स्तर पर शुरू किया गया काम भी सही दिशा और मेहनत से बड़ा बन सकता है।
खाली समय में शुरू किया मशरूम उगाने का काम
Startuppedia की रिपोर्ट के मुताबिक, 57 वर्षीय शिजे ने शुरुआत में खुद को व्यस्त रखने के लिए मशरूम उगाना शुरू किया था। पति काम पर जाते थे और बच्चे स्कूल में रहते थे। खेती से जुड़े परिवार की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें इस काम में दिलचस्पी थी।
साल 2007 में उन्होंने और उनके पति ने ऑयस्टर मशरूम उगाने का प्रयोग किया। इसके लिए मशरूम बेड और स्पॉन खरीदने पर केवल 250 रुपये खर्च किए। शुरुआती दिनों में दोनों ने अनुभव से खेती के तरीके सीखे और धीरे-धीरे इस काम को आगे बढ़ाया।
600 बेड से शुरू हुआ कारोबार का विस्तार
साल 2008 में दंपति ने करीब 50 हजार रुपये का निवेश करके अपनी कृषि भूमि पर 600 मशरूम बेड तैयार किए। इसके बाद 2009 में उन्होंने Coon Fresh नाम से कारोबार शुरू किया। शुरुआत ताजे मशरूम बेचने से हुई, लेकिन बाद में उन्होंने अपने उत्पादों की रेंज बढ़ा दी। आज उनके कारोबार में मशरूम मोमोज, कटलेट, सैंडविच, ब्रेड रोल, अचार और चटनी पाउडर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा मिलेट पायसम और पोषक तत्वों से भरपूर केक भी बनाए जाते हैं।
महीने के 5 हजार से लाखों के राजस्व तक पहुंचा सफर
रिपोर्ट के अनुसार, कारोबार के शुरुआती तीन से चार महीनों में हर महीने करीब 2,000 से 5,000 रुपये की कमाई होती थी। साल 2009 में कारोबार का राजस्व लगभग 3 लाख रुपये तक पहुंच गया।
शुरुआत में पांच मशरूम बेड से काम करने वाला यह फार्म अब करीब 6,000 बेड तक फैल चुका है। यहां सालाना लगभग 12 टन मशरूम का उत्पादन होता है। फिलहाल कारोबार का सालाना राजस्व 80 से 90 लाख रुपये बताया गया है।
अब 1.6 करोड़ रुपये तक पहुंचने का लक्ष्य
शिजे और थैंकाचन अब अपने कारोबार का राजस्व लगभग दोगुना करके 1.6 करोड़ रुपये तक पहुंचाना चाहते हैं। इसके लिए मशरूम उत्पादन के साथ उससे बनने वाले उत्पादों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ध्यान रहे कि राजस्व कुल कारोबार की कमाई है, शुद्ध मुनाफा नहीं।
10 हजार लोगों को दिया खेती का प्रशिक्षण
Coon Fresh के जरिए यह दंपति किसानों और कॉलेज के विद्यार्थियों को मशरूम की खेती का प्रशिक्षण भी देता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 10 हजार लोगों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
जोड़ों के लिए प्रशिक्षण शुल्क 500 रुपये और छह या उससे अधिक लोगों के समूह के लिए 3,000 रुपये बताया गया है। इस तरह शिजे और थैंकाचन ने अपने कारोबार के साथ दूसरे लोगों को भी खेती के जरिए कमाई के अवसर समझने में मदद की है।