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Nobel Peace Prize 2026: भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला शांति का नोबेल, जानें कौन हैं और क्यों चुनी गईं

नोबेल शांति पुरस्कार 2026 का ऐलान हो गया है और इस बार भारतीय तमिल मूल की नावी पिल्लई को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है। दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ संघर्ष से लेकर अंतरराष्ट्रीय न्याय और मानवाधिकारों की रक्षा तक, उनका सफर काफी प्रेरणादायक रहा है

Edited By: Anchal Jhaअपडेटेड Oct 09, 2026 पर 3:35 PM
Nobel Peace Prize 2026: भारतीय मूल की नावी पिल्लई को मिला शांति का नोबेल, जानें कौन हैं और क्यों चुनी गईं
नावी पिल्लई को यह सम्मान 10 दिसंबर 2026 को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में प्रदान किया जाएगा।

दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर से निकलकर अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाली  नावी पिल्लई  को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का ऐलान किया गया है। नॉर्वे की नोबेल समिति ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को नवनेथम 'नावी' पिल्लई को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए चुना। भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं पिल्ले ने अपने करियर में भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए काम किया। उनका सफर इस बात की मिसाल है कि कानून के जरिए भी अन्याय के खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ी जा सकती है।

रंगभेद के दौर में शुरू हुआ संघर्ष

नावी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन शहर में एक भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था। उस समय देश में रंगभेद की व्यवस्था लागू थी, जिसमें नस्ल के आधार पर लोगों के अधिकार और अवसर तय होते थे। ऐसे माहौल में पिल्ले ने कानून का रास्ता चुना और वकील के रूप में उन लोगों के अधिकारों की पैरवी की, जिन्हें भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता था।

उनके करियर का एक अहम हिस्सा रंगभेद का विरोध करने वाले लोगों को कानूनी सहायता देना रहा। उन्होंने नेल्सन मंडेला और अन्य रंगभेद-विरोधी कार्यकर्ताओं के समर्थन में काम किया। आगे चलकर उनका योगदान दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय न्याय और मानवाधिकारों के क्षेत्र तक पहुंचा।

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