नौकरी के दौरान हर महीने सैलरी आती है, तो घर का खर्च चलाना आसान रहता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जब सैलरी बंद हो जाती है, तब सबसे बड़ी चिंता पैसों की होती है। घर का राशन, बिजली बिल, दवाइयों और दूसरे खर्चों के लिए नियमित आमदनी जरूरी है। ऐसे में बुजुर्गों के लिए सरकार की सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) काम आ सकती है। इस स्कीम में पैसा जमा करके हर तीन महीने में ब्याज पाया जा सकता है।
