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by Roopali Sharma | mar 02,  2026

हर रोग का समाधान है छाछ, बस पीने का बदलें ये एक तरीका

आयुर्वेद में छाछ (तक्र) को ‘अमृत’ के समान माना गया है, लेकिन इसका पूर्ण लाभ उठाने के लिए वात, पित्त या कफ के अनुसार पीना चाहिए, आइये जानते है इसका सही अनुपात:

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यदि आपकी प्रकृति वात है, तो हल्की खट्टी छाछ में सेंधा नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर पिएं। यह गैस और पेट की मरोड़ को कम करता है

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छाछ पीने के नियम

कफ ज्यादा होने पर छाछ में सोंठ (सूखा अदरक), काली मिर्च और पिप्पली (त्रिकटु चूर्ण) मिलाकर सेवन करें। इससे गला खराब नहीं होता और कफ नहीं बढ़ता

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कफ दोष के लिए

पित्त प्रधान व्यक्तियों को ताजी, कम खट्टी छाछ में मिश्री या चीनी मिलाकर पीनी चाहिए। यह शरीर की गर्मी और एसिडिटी को शांत करती है

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पित्त दोष के लिए

आयुर्वेद के अनुसार सूर्यास्त के बाद या रात में छाछ नहीं पीनी चाहिए, क्योंकि इससे कफ बढ़ सकता है और जोड़ों में दर्द की समस्या हो सकती है

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रात में पीने से बचें

छाछ पीने का सबसे उत्तम समय दोपहर का भोजन है। भोजन के साथ या तुरंत बाद घूंट-घूंट करके पीने से पाचन अग्नि तेज होती है

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सेवन का सही समय

हमेशा ताजी बनी छाछ का उपयोग करें। बहुत पुरानी या ज्यादा खट्टी छाछ पित्त और रक्त दोष को बिगाड़ सकती है

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ताजी छाछ का ही उपयोग

दही को मथकर उसका मक्खन पूरी तरह निकाल लेना चाहिए। मक्खन रहित छाछ हल्की और सुपाच्य होती है

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मक्खन निकालकर पिएं

कभी भी छाछ या दही को दूध के साथ मिलाकर न लें। यह एक विरुद्ध आहार है जो त्वचा रोगों का कारण बन सकता है

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दूध के साथ मिक्स न करें

छाछ में 1 हिस्सा दही और 3 हिस्सा पानी मिलाकर अच्छी तरह मथा जाता है। यह त्रिदोष नाशक और पाचन के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है

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सही अनुपात

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