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by Roopali Sharma | OCT 29,  2025

अब से हॉरर फिल्मे करेगी स्ट्रेस को छूमंतर और चिंता को कम

कुछ रिसर्च बताते हैं कि कुछ लोगों के लिए होरर फिल्में देखना स्ट्रेस और चिंता कम करने में मदद कर सकता है

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फिल्में एक कंट्रोल और सेफ माहौल में डर को फील कराती हैं, जिससे रियल लाइफ के खतरे कम डरावने लगते हैं

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डर का सेफ एक्सपीरियंस

होरर फिल्में ‘लड़ो या भागो’ रेस्पोंस को एक्टिव करती हैं, जिसके बाद शरीर शांत होता है और सुखद एहसास होता है

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उत्तेजना से राहत

ये फिल्में इमोशन का सामना करने की प्रैक्टिस कराती हैं, जिससे आप फीलिंग को कंट्रोल करना सीखते हैं

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इमोशनल रेगुलेशन

एमेजनरी खतरों का सामना करके लचीला बन सकता है और रियल लाइफ की चुनौतियों के लिए तैयार होता है

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लचीलापन बढ़ाना

फिल्म में डर पर काबू पाने से इमोशन पर कंट्रोल करने की फीलिंग होती है, जिससे सेल्फ-कोन्फिडेंस बढ़ता है

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कंट्रोल की फीलिंग

फिल्म में खो जाने से आप चिंताओं और तनाव से ध्यान हटा सकते हैं, जिससे दिमाग को आराम मिलता है

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चिंताओं से ध्यान हटाना

अरस्तू द्वारा बताए गए कैथार्सिस से, हिंसक और डरावने सीन देखकर नेगेटिव इमोशन बाहर निकल जाते हैं

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कैथार्सिस का एक्सपीरियंस

साथ में डरावनी फिल्में देखने से रिलेशन मजबूत होते हैं, क्योंकि इससे शरीर में ओक्सीटोसिन नामक हार्मोन निकलता है

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सोशल बोन्डिंग

फिल्में ब्रेन के उन हिस्सों को एक्टिव करती हैं जो डर से निपटते हैं, जिससे कोग्निटिव फंक्शन सुधारते है

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कोग्निटिव एक्सरसाइज

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