चीन ने रेगिस्तान को बना दिया गेहूं का लहलहाता खेत! इसके लिए उसने गोल खेत क्यों बनाए? समझिए उसकी पूरी ट्रिक
China Taklimakan Desert Wheat Circles: चीन ने टकला मकान रेगिस्तान की तपती रेत को 23 वर्ग किलोमीटर से बड़े हरे-भरे खेतों में बदल दिया है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अंतरिक्ष से देखने पर ये खेत चौकोर नहीं, बल्कि बिल्कुल गोल नजर आते हैं। कुनलुन पहाड़ की पिघलती बर्फ, चीनी बेईदोऊ सैटेलाइट से चलने वाले ट्रैक्टर्स और सिंचाई की एक अनोखी सीक्रेट ट्रिक से चीन ने यह करिश्मा किया है
अंतरिक्ष या उपग्रह से देखने पर ये खेत चौकोर नहीं, बल्कि एकदम सटीक गोलाकार दिखाई देते हैं
China Taklimakan Desert: चीन ने अपनी तकनीक और वैज्ञानिक सोच के दम पर एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसे कभी नामुमकिन माना जाता था। चीन ने अपने सबसे बेरहम और सूखे टकला मकान रेगिस्तान के दक्षिणी किनारे पर रेत के टीलों को गेहूं के लहलहाते खेतों में बदल दिया है। इस रेगिस्तानी इलाके में करीब 23 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में गेहूं की बुआई की जा रही है।
लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट में सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है इन खेतों की बनावट। अंतरिक्ष या उपग्रह से देखने पर ये खेत चौकोर नहीं, बल्कि एकदम सटीक गोलाकार दिखाई देते हैं। आइए समझते हैं कि चीन ने रेगिस्तान में गेहूं उगाने के लिए ये गोल खेत क्यों बनाए और इसके पीछे क्या ट्रिक है।
आखिर क्यों बनाए गए बिल्कुल गोल खेत?
रेगिस्तान की रेतीली जमीन पर पारंपरिक तरीके से चौकोर खेतों में खेती करना और पानी देना नामुमकिन जैसा होता है। इसलिए चीन ने यहां सेंटर-पिवट इरिगेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है।
घूमने वाले स्प्रिंकलर (Pivot Arm): इसमें खेत के बीचों-बीच एक सेंट्रल प्वाइंट (केंद्र) होता है, जिससे लोहे का एक बड़ा सा पाइप (स्प्रिंकलर आर्म) जुड़ा होता है।
360 डिग्री रोटेशन: यह पाइप केंद्र के चारों ओर 360 डिग्री पर गोल घूमता है और फसलों पर एक समान पानी का छिड़काव करता है।
गोलाकार आकृति: क्योंकि पानी छिड़कने वाला यह सिस्टम घड़ी की सुइयों की तरह गोल-गोल घूमता है, इसलिए सिंचित होकर हरी-भरी होने वाली फसल का आकार भी अपने आप एक सटीक गोलाकार चक्र बन जाता है।
कुनलुन पर्वत की बर्फ पिघलाकर पहुंचा रहे पानी
रेगिस्तान में सबसे बड़ी चुनौती पानी की होती है। चीन इस सिंचाई प्रणाली के लिए पानी कुनलुन पर्वत की पिघलती हुई बर्फ से खींचकर ला रहा है।
परंपरागत तरीके से खेतों में पानी भरने के बजाय इस ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सिस्टम से छिड़काव करने पर पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल होता है और वाष्पीकरण या रेत में पानी बह जाने से होने वाले नुकसान से बचत होती है।
रेत में कैसे उग रही फसल? मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने का तरीका
रेगिस्तान की मिट्टी बेहद कमजोर, रेतीली और पोषक तत्वों से रहित होती है। रेत को उड़ने से रोकने और मिट्टी में नमी व ताकत बनाए रखने के लिए चीनी किसान क्रॉप रोटेशन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
गेहूं की फसल के साथ-साथ यहां जई (Oats) और अल्फाल्फा (Alfalfa) जैसी फसलें बारी-बारी से उगाई जा रही हैं। ये फसलें दोहरे फायदे देती हैं, एक तरफ ये अपनी जड़ों से रेत को उड़ने से रोकती हैं और मिट्टी को उपजाऊ बनाती हैं, वहीं दूसरी तरफ इनसे मवेशियों के लिए पौष्टिक चारा भी मिल जाता है।
BeiDou सैटेलाइट ने आसान की बुआई
इस पूरे प्रोजेक्ट में चीन की स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली बेईदोऊ (BeiDou) का अहम योगदान है। रेगिस्तान के दुर्गम इलाके में ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों को एकदम सटीक दिशा में चलाने और बुआई करने के लिए BeiDou से चलने वाले जीपीएस और ऑटोमेटेड ट्रैक्टर्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे इंसानी गलती की गुंजाइश खत्म हो जाती है और कम समय में बड़े इलाके में बुआई पूरी हो जाती है।
चीन का 'डेजर्ट टू फार्मलैंड' विजन
रेगिस्तान को कृषि योग्य भूमि में बदलने का यह काम चीन के एक बहुत बड़े राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है। टकला मकान रेगिस्तान में गेहूं की बुआई का यह काम 20 अक्टूबर के आसपास पूरा होने की उम्मीद है।
चीन का यह मॉडल यह साबित करता है कि अगर सही तकनीक, सैटेलाइट नेविगेशन और पानी के सही प्रबंधन का इस्तेमाल किया जाए, तो बंजर रेगिस्तान भी देश का पेट भरने के लिए अनाज पैदा कर सकते हैं।