Trump Iran President Meeting: करीब 7 महीनों से जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नया मोड़ देखने को मिलने वाला है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे इस हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से मुलाकात करने के लिए 'तैयार' हैं।
यह संभावित मुलाकात ऐसे समय में होने की बात कही जा रही है, जब एक तरफ ईरान ने अमेरिका के सामने बातचीत की 7 शर्तें रखी हैं, तो दूसरी तरफ ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि किसी भी नए अमेरिकी हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। आइए आपको बताते हैं इस संभावित मुलाकात के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी।
न्यूयॉर्क में कैसे हो सकती है हाई-प्रोफाइल मुलाकात?
संयुक्त राष्ट्र (UN) की महासभा में 22 से 28 सितंबर तक चलने वाली बैठकों के सिलसिले में दुनिया भर के नेता न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं। ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रपति मासूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत पूरे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अमेरिका आने की अनुमति दे दी है। क्योंकि दोनों नेता एक ही छत के नीचे मौजूद होंगे, इसलिए बिना किसी अलग से बड़े शिखर सम्मेलन के भी साइडलाइन्स पर सीधी बातचीत का रास्ता खुल सकता है।
ईरान ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया मैसेज
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई के मुताबिक, ईरान ने मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के सामने बातचीत की 7 प्रमुख शर्तें रखी हैं:
'फैसले के मोड़ पर हूं': ट्रंप की चेतावनी और 3 विकल्प
फॉक्स न्यूज से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे इस समय 'डिसाइडिंग मोड' में हैं और आने वाले दिनों में 'बहुत कुछ बड़ा' होने वाला है। ट्रंप के पास इस समय 3 मुख्य रास्ते मौजूद हैं:
आर्थिक दबाव: ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध जारी रखना।
सैन्य कार्रवाई: अमेरिका की ओर से सीधा हमला करना।
डिप्लोमैटिक डील: बातचीत के जरिए किसी समझौते पर पहुंचना।
अपनी सख्त बयानबाजी के लिए मशहूर ट्रंप ने ये तक कह दिया कि, 'मेरा सवाल यह है कि मुझे पूरे देश को कब और कैसे तबाह करना है? बेहतर होगा कि वे सही व्यवहार करें।'
गल्फ देशों के साथ ट्रंप की बड़ी मीटिंग
ट्रंप न्यूयॉर्क में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के नेताओं से भी अलग से मुलाकात करने वाले हैं। माना जा रहा है कि जंग के अगले चरण पर कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले ट्रंप अपने खाड़ी सहयोगियों की राय सीधे तौर पर सुनना चाहते हैं।
वहीं, ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियान का कहना है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन वे किसी की धौंस या ताकत के आगे झुकेंगे नहीं। इसके साथ ही ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए कच्चे तेल की सप्लाई रोकने को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में देख रहा है।
वैसे ट्रंप की इस मुलाकात की रजामंदी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि दोनों देशों के बीच डील पक्की हो गई है। ट्रंप की यह पुरानी कूटनीतिक रणनीति रही है। एक तरफ भारी सैन्य दबाव और सख्त जुबानी हमले, तो दूसरी तरफ टेबल पर बातचीत की खिड़की खुली रखना। अगर यह मुलाकात होती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों के लिहाज से इस साल का सबसे बड़ा घटनाक्रम साबित हो सकता है।