France protests latest: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में चल रहे छात्र प्रदर्शनों को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने फ्रांस में बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों को 'बेकाबू बड़े पैमाने पर माइग्रेशन' से जोड़ते हुए दावा किया कि यह मामला सिर्फ स्कूलों का नहीं है, बल्कि 'इस्लाम फ्रांस पर कब्जा करना चाहता है।' ट्रंप ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर की। मंगलवार (6 अक्टूबर) को पूरे फ्रांस में प्रदर्शन हुए। लेबर यूनियनों ने हाई स्कूल के उन छात्रों के समर्थन में रैलियां कीं, जो स्टाफ की कमी, खचाखच भरी क्लासरूम और जर्जर इमारतों के विरोध में दो हफ़्ते से स्कूलों को ब्लॉक किए हुए थे। विरोध-प्रदर्शन के कारण सितंबर के आखिर से ही फ्रांस के सैकड़ों हाई स्कूल बंद हैं। छात्रों का विरोध प्रदर्शन पेरिस समेत फ्रांस के 40 से ज्यादा शहरों तक फैल गया है।
फ्रांस में क्यों हो रहे हैं छात्र प्रदर्शन?
फ्रांस में छात्र स्कूलों और विश्वविद्यालयों की खराब होती स्थिति, शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था के लिए पर्याप्त बजट नहीं मिलने के खिलाफ सड़कों पर हैं। सितंबर में पेरिस क्षेत्र से शुरू हुआ यह आंदोलन 6 अक्टूबर तक 30 से ज्यादा शहरों में फैल गया। कई जगह ट्रेड यूनियन और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी भी छात्रों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए।
छात्रों ने बड़ी संख्या में लिसे (हाई स्कूल) और विश्वविद्यालय परिसरों को ब्लॉक किया। पेरिस, मार्सेई, लिली, लियोन, नांत, स्ट्रासबर्ग और रेनेस समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। कुछ जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, जबकि कई स्थानों पर बैरिकेड जलाने, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस ने कुछ जगहों पर आंसू गैस और भीड़ को नियंत्रित करने के दूसरे तरीकों का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शनकारी छात्रों की क्या हैं मांगें?
5 हजार से ज्यादा गिरफ्तार
फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुसार, विरोध प्रदर्शनों के दौरान 5,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें करीब 87 फीसदी नाबालिग बताए गए हैं। सरकार के मुताबिक, करीब 215 छात्रों और 715 पुलिस अधिकारियों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। लेंस शहर में एक गंभीर घटना भी सामने आई, जहां प्रदर्शन के दौरान ग्रेनेड फटने से एक किशोर का हाथ गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त होने की खबर है। इस मामले की परिस्थितियों की जांच पुलिस निगरानी संस्थाएं कर रही हैं।
बजट और चुनाव ने बढ़ाया राजनीतिक दबाव
फ्रांस में यह आंदोलन ऐसे समय हो रहा है, जब प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू की सरकार 2027 के बजट को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। प्रस्तावित बजट में खर्च में कटौती को लेकर पहले से राजनीतिक विवाद है। ऐसे में छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। यह सरकारी खर्च में कटौती, वेतन और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव के खिलाफ व्यापक असंतोष से भी जुड़ता जा रहा है।
ट्रंप ने अलग दिशा में जोड़ा प्रदर्शन
ट्रंप ने फ्रांस के आंदोलन को छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों से अलग तरीके से पेश किया। उन्होंने X पर लिखा कि फ्रांस में जो कुछ हो रहा है, वह 'बेकाबू बड़े पैमाने पर प्रवासन' का नतीजा है। साथ ही आरोप लगाया कि यह सिर्फ स्कूलों का मुद्दा नहीं, बल्कि 'इस्लाम द्वारा देश पर कब्जा करने' से जुड़ा मामला है। हालांकि, फ्रांस में जारी छात्र आंदोलन की घोषित प्रमुख मांगें शिक्षा के लिए ज्यादा संसाधन, शिक्षकों की भर्ती, बेहतर स्कूल भवन और उच्च शिक्षा के लिए अधिक फंडिंग हैं।
सरकार ने बातचीत का भरोसा दिया
फ्रांसीसी सरकार ने छात्रों के साथ बातचीत शुरू करने का संकेत दिया है। मंत्रियों से अक्टूबर के अंत तक शिक्षकों की कमी, स्कूलों के समय और जर्जर स्कूल भवनों के नवीनीकरण को लेकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है। फिलहाल, छात्र संगठन शिक्षा व्यवस्था में ज्यादा निवेश, अधिक शिक्षक और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग पर कायम हैं। दूसरी ओर, आंदोलन के राजनीतिक प्रभाव को लेकर फ्रांस की सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।