Iran-US War & Diplomacy Updates: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच ईरान ने बड़ा ऐलान कर दिया है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अगर अमेरिका तेहरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करता है, तो ईरान 'प्रलयकारी युद्ध' का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। वैसे उन्होंने कूटनीति और बातचीत का दरवाजा भी खुला रखा है।
ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से जुड़े ईरान के प्रस्ताव को खारिज करने के बाद आया है।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से कोई फर्क नहीं पड़ता: ईरान
NBC न्यूज के कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' में बातचीत करते हुए अब्बास अराघची ने अमरीकी सैन्य कार्रवाई की चेतावनियों को खारिज किया। उन्होंने कहा, 'हम युद्ध दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगर कोई नया हमला होता है चाहे वह प्रलयकारी युद्ध (Doomsday War) ही क्यों न हो हम मजबूती से खड़े रहेंगे। हमें अमेरिका के मिडटर्म चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है, हम सिर्फ अपने राष्ट्रीय हितों की परवाह करते हैं। लेकिन इसके साथ ही हम कूटनीति के लिए भी तैयार हैं। अब यह राष्ट्रपति ट्रंप पर निर्भर करता है कि वे क्या चुनते हैं।'
दरअसल, हाल ही में 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि नवंबर में होने वाले अमरीकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान पर बमबारी फिर से शुरू हो सकती है। इसी रिपोर्ट और संयुक्त राष्ट्र महासभा में ट्रंप के कड़े भाषण पर ईरानी विदेश मंत्री जवाब दे रहे थे।
ईरान का '7 दिनों वाला प्रस्ताव' और अमरीका का इनकार
ईरान ने कतर के मध्यस्थों के जरिए अमरीका के सामने एक प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव के तहत:
हालांकि, ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। वहीं, अराघची का कहना है कि ट्रंप के इनकार की कोई आधिकारिक सूचना अभी तक राजनयिक चैनलों से ईरान तक नहीं पहुंची है। अराघची ने कहा कि जून में दोनों देशों के बीच हुए अस्थायी युद्धविराम समझौते के आधार पर ही यह प्रस्ताव दिया गया था।
'हम यह युद्ध बहुत जल्द जीतने वाले हैं'
दूसरी ओर, अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी आक्रामक रणनीति पर कायम हैं। फॉक्स न्यूज से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरान भारी दबाव में है और युद्ध हार रहा है, मैंने उनके सौदे को खारिज कर दिया है। वे तुरंत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलकर डील इसलिए करना चाहते हैं क्योंकि वे बुरी तरह हार रहे हैं। मुझे लगता है कि बहुत जल्द हम यह युद्ध पूरी तरह जीत लेंगे।'
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि युद्ध खत्म होते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से नीचे आएंगी।
आगे क्या, युद्ध या कूटनीति?
विश्व व्यापार और तेल आपूर्ति के लिहाज से 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। ईरान जहां अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए फंड और तेल बिक्री की छूट मांग रहा है, वहीं अमरीका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी सैन्य गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाना चाहता है।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची के शब्दों में कहें तो 'भले ही अमरीका के रवैये को देखकर कूटनीति की तरफ लौटने की कोई ठोस वजह नहीं दिखती, लेकिन मैं फिर भी शांति के किसी मौके को नहीं गंवाना चाहता।' अब गेंद अमरीका के पाले में है कि वह युद्ध का रास्ता चुनता है या टेबल टॉक का।